प्रवीण पाण्डेय। संकल्प पर बदली किस्मत गरीबी और संघर्षों से भरी एक कहानी आज लोगों को प्रेरित कर रही है, जिसमें मेरे जीवन का सबसे अच्छा मित्र जो गरीबी को बहुत करीबी से देखा है, मेरे मित्र ने अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से अपने सपनों को साकार किया। संतोष पटेल, जो की ग्वलियर के एक छोटे से गाँव के निवासी है, ये अपने जीवन के हर मोड़ पर मुश्किलों का सामना किया है। उनकी कहानी बताती है कि अगर इंसान में उत्कृष्टता के लिए जोश हो, तो वह संभव है। पत्थर तोड़ने, जंगल में पौधे लगाने और तेंदूपत्ता बेचने जैसे काम किया।पिता के साथ पत्थर तोड़ने, जंगल में पौधे लगाने और तेंदूपत्ता बेचने जैसे कामों में उन्होंने हाथ बटाए। इन सभी संघर्षों ने उन्हें विशेष परिपक्वता और दृढ़ इच्छाशक्ति दी। उन्होंने गाँव के एक उत्कृष्ट विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसमें उन्होंने 10वीं कक्षा में 92% अंक हासिल किए। जिंदगी में बदलाव लाने का संकल्पसंतोष पटेल ने अपनी जिंदगी में बदलाव लाने का संकल्प किया। एक व्यक्ति जिसने गरीबी के आभूषण पहने, उसने अपनी ताकत और मेहनत से आज एक जिले के डीएसपी के रूप में सम्मान प्राप्त किया है। उनकी कहानी में गर्व, संघर्ष और सफलता के गुण समाहित हैं। 12वीं के बाद उन्होंने अपनी प्रवीणता की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया। मेरी मुलाकात यहां हुई मैं बीई कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग किया और ये सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में अपनी पहली नौकरी प्राप्त की। और मैं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रीवा ब्रांच में एटीएम कैश ट्रांसफर इंजीनियर की नौकरी किया लक्ष तो कुछ और बनने का था इस बीच उन्होंने अपनी इच्छाओं के साथ मेहनत की, हम दोनों ने पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरी प्रयास में उन्हें मध्यप्रदेश शासन के ग्रह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर चयनित किया गया। और उसी समय मेरी माता का आकस्मिक निधन हो गया। मेरा सब्र वहीं खत्म हो गया क्योंकि मैं अकेला था मेरे कोई भाई बहन नहीं पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। लेकिन मेरे दोस्त ने अपनी मेहनत लगन से सफलता प्राप्त की है ये बहुत खुशी की बात है। उनकी इस सफलता के पीछे दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत की कहानी है। उन्होंने अपने सपनों के लिए कितनी मेहनत की, यह उनकी ये कहानी साबित करती है। उन्होंने कहा कि जिंदगी का सबसे बड़ा सबक यही है कि हार के बावजूद भी हार मानने का मतलब नहीं होता, बल्कि उससे सीख को खोजना होता है।इससे साफ है कि अगर इंसान में इरादा और मेहनत हो तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं हो सकती।और मेरा स्टेट बैंक की नौकरी से इन्ट्रेस्ट नहीं था, क्योंकि संविदा नियुक्ति थी, मैं आखिरी बार UPSC में बैठा लेकिन 6% से पीछे हो गया।फिर मैं कलेक्टर कार्यालय सीधी में मुझे नौकरी मिल गई। दोस्तों मेहनत लगन विश्वास का संघर्ष करने वाले को निश्चित सफलता मिलती है। मैं राजस्व विभाग में नौकरी करता था लेकिन बाबुओ भ्रष्ट अधिकारियों की दलाली नहीं करता था मुझे अनावश्यक परेशान किया जाने लगा इसलिए मै रिजाइन देकर मीडिया का रास्ता अपनाया और मेरा लक्ष्य है भ्रष्टाचार मिटाना, अब मैं खुश और मेरा दोस्त भी खुश हूं। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस ने 40 आईटी कंपनियों के प्रबंध, पी. आर. ओ. को आडिनेटर के साथ बैठक की. मध्य प्रदेश में 1 जुलाई से बदलने जा रहा पुलिस का चेहरा, 24 हजार टैबलेट खरीदने की तैयारी
You must be logged in to post a comment.