भोपाल। मुस्ताअली बोहरा।मो. 7974002738
अधिवक्ता एवं लेखक।

लोस चुनाव 24 में होगा असल इम्तेहान


डाॅ. मोहन यादव……………..ऐसा नाम जिसकी चर्चा ज्यादा नहीं रही लेकिन आज वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। संघ के करीबी और पिछड़े वर्ग से आने वाले डाॅ यादव का नाम जब सीएम के लिए घोषित हुआ तो हर कोई हैरान रह गया। छत्तीसगढ़ की तरह ही मध्यप्रदेश में भी मोदी-शाह ने सोची समझी रणनीति के तहत सूबे की कमान सौंपी है। देश भर में करीब 45 प्रतिशत ओबीसी वोटर हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 44 प्रतिशत ओबीसी वोट मिले थे लिहाजा 2024 के लोस चुनाव में भी इसी वर्ग को ध्यान में रखते हुए मोहन यादव के सिर ताज पहनाया गया है। इसके साथ ही बिहार में लालू प्रसाद यादव और यूपी में अखिलेश यादव जैसे नेताओं को भी मोहन यादव की ताजपोशी से पाॅलिटिकल मैसेज दिया गया है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों ही सूबों में जिस तरह से सीएम घोषित किए गए उससे ये भी जाहिर है कि भाजपा सेकेंड लाईन तैयार कर रही है। दोनों ही राज्यों में नई पीढ़ी को मौका दिया गया है। सीएम बनने से पहले भले ही मोहन यादव के नाम की चर्चा कम रही हो लेकिन कमान संभालने के बाद उनकी छबि तेज तर्रार और दृढसंकल्प शक्ति वाले नेता बन रही है। कर्ज में डूबे प्रदेश को तरक्की के रास्ते पर लाने के साथ ही लोकसभा चुनाव 24 में मप्र की सभी सीटों पर कमल खिलाने की चुनौती उनके सामने हैं। वह 2013 से मध्य प्रदेश की विधानसभा के सदस्य के रूप में उज्जैन दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। वर्ष 2013 में इस सीट से पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2018 दूसरी और फिर वर्ष 2023 में भी इसी सीट से तीसरी बार चुनाव जीते। मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी शादी सीमा यादव से हुई हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। मोहन यादव ने माधव साइंस कॉलेज से पढ़ाई की हैं। मोहन यादव के पास बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए और पीएचडी सहित कई शैक्षणिक डिग्रियां हैं। 2 जुलाई 2020 को उन्होंने शिवराज सिंह चैहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। वे शिवराज सिंह चैहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। विधायक दल की बैठक में शिवराज सिंह चैहान ने खुद मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को मप्र की राजधानी भोपाल में प्रदेश के 19 वें मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

कम कीमत में वेबसाइट, चलना भी हुआ आसान.


मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला को उपमुख्यमंत्री और नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर बनाया गया है। विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे घोषित होने के बाद से ही मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री को लेकर कयास लग रहे थे। इस दौड़ में निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही वीडी शर्मा सहित कुछ और नेताओं के नाम चल रहे थे। भोपाल में जब मध्यप्रदेश भाजपा विधायक दल के बैठक के दौरान उज्जैन दक्षिण के विधायक और शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किया गया तो सभी चैंक गए।
मन-मोहने वाले फैसले ले रहे मोहन यादव
डाॅ यादव के समक्ष सीएम बनने के बाद कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश को दिशा देने और दशा बदलने की चुनौती तो है ही लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक चुनौतियां भी कम नहीं है। लेकिन पूर्ववर्ती शिवराज सरकार की छाया से बाहर निकलकर अपनी संकल्पशक्ति के साथ डाॅ यादव ने जिस तरह से अल्पसमय में फैसले लिए हैं उससे उनकी मंशा साफ जाहिर हो जाती है। सीएम बनने के बाद उनका पहला आदेश धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज में बजने वाले लाउड स्पीकर और खुले में मांस की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने का था। लाउड स्पीकर वाला मामला चूंकि धार्मिक था इसलिए इसके परिणाम पर सबकी नजर थी। इस आदेश को एक धर्म विशेष के खिलाफ बताने और जताने की कोशिशें भी हुईं, ये आदेश सभी धार्मिक स्थलों के लिए था लिहाजा इसका स्वागत हुआ। इसी तरह खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक वाले आदेश की भी सराहना हुई। वैसे भी खुले में बिकने वाला मांस सेहत के लिए हानिकारक होता है। इसी तरह मोहन यादव ने भोपाल में बीआरटीएस को हटाने का आदेश दिया। बीआरटीएस को बनाने का मकसद यातायात को सुगम बनाना था। लेकिन करोड़ो के खर्च के बाद भी बीआरटीएस से जगह-जगह जाम की स्थिति बनती रही है। इसे हटाने की बात कमलनाथ सरकार के दौरान भी आई थी लेकिन तब भी कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया था। मोहन यादव ने तय समय सीमा में इसे हटाने का आदेश दिया है। गुना में एक यात्री बस और डंपर में टक्कर के बाद दर्जन भर से ज्यादा लोगोें की मौत ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। सीएम मोहन यादव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गुना कलेक्टर, एसपी और परिवहन आयुक्त को पद से हटाकर ये संदेश दे दिया कि वे निर्णय लेने में देर नहीं करते। ये अब तक के किसी भी सड़क हादसे के बाद की गई सबसे बड़ी कार्रवाई थी। उन्होंने एक ड्रायवर से अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कलेक्टर को भी हटाने में कोई देर नहीं की। डाॅ यादव ने कई आईएएस सहित अन्य अधिकारियों का ताबड़तोड़ ट्रांसफर करके अपने तेवर दिखा दिए थे। जो आला अफसर शिवराज के करीबी हुआ करते थे उनको रूखसत कर उनकी जगह दूसरे अधिकारियों को जिम्मा दिया गया। डाॅ यादव ने उन मंत्रियों को झटका दे दिया जो अपनी पसंद के हिसाब से अपने स्टाफ में अधिकारी-कर्मचारी रखते थे। उन्होंने ऐसे डेढ़ दर्जन मंत्रियों की नोटशीट लौटाने में भी देर नहीं लगाई थी। असल में सरकार बदली, मंत्री बदलते रहे लेकिन यहां पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी नहीं बदले। कई कर्मचारी तो ऐसे थे जिनकी आधी से ज्यादा नौकरी मंत्रियों के स्टाफ के तौर पर काम करते हुए ही निकल गई। चूंकि, ऐसे कर्मचारी काम करने के तौर तरीकों से वाकिफ थे लिहाजा मंत्री भी इन्हें ही तरजीह देते थे। डाॅ यादव ने संघ और संगठन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए सालों से जमे अधिकारी कर्मचारियों को हटा दिया है।
इसी तरह जिलों, तहसील और थानों की सीमा के पुनर्निधारण के लिए कमेटी बनाई गई है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद नए सिरे से पुनर्निधारण होगा। इससे जिला मुख्यालय, तहसील और थानों की दूरियों की परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। महज कागजों पर ही जमीनी की खरीद-फरोख्त को रोकने की दिशा में कदम उठाते हुए अब रजिस्टी के साथ ही नामांतरण करने का भी आदेश दिया गया है। इससे नामांतरण कराने के लिए चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी साथ ही फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी। चूंकि, यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं इसलिए वे सरकारी स्कूलों की हालत से वाकिफ हैं। उन्होंने हर जिले में एक्सीलेंस काॅलेज खोलने का निर्णय लिया है। चित्रकूट को अयोध्या की तरह विकसित करने, नर्मदा के डेढ़ दर्जन घाटों को अयोध्या और हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने, प्रदेश में श्रीराम वनगमन पथ को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। रानी दुर्गावती और अन्य वीरांगनाओं की जीवनी को पाठयक्रम में शामिल करने का भी निर्णय लिया गया है। शिवराज सरकार में इकबाल सिंह बैस ताकतवर अफसर हुआ करते थे और कई अहम फैसले उन्हीं के द्वारा लिए जाते थे लेकिन अब मोहन यादव ने उनके ऐसे निर्णयों को बदलने का काम शुरू कर दिया है जिनसे आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। फिर चाहे वह राजधानी के बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाये जाने की बात हो या फिर मध्यप्रदेश गान के मौके पर खड़े होने की बात हो। ये भी कहा जा रहा है कि परिवहन चैक पोस्टों पर अब विभाग के ही कर्मचारियों को उत्तरदायित्व सौंपा जाएगा।
मोहन सरकार ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के भी विलय को की स्वीकृति दी है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के रूप में पुनर्गठित किया जायेगा। मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय अति गंभीर-विशिष्ट उपचार, चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे। मेडिकल कॉलेजों की बेस्ट प्रेक्टिसेस का स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयोग किया जा सकेगा। मेडिकल कॉलेजों से जिला चिकित्सालयों को संबद्ध करना आसान हो जाएगा। स्वास्थ्य नीति और विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं नियंत्रण में सुविधा मिलेगी। कुल मिलाकर, यादव ने कम समय में ऐसे निर्णय लिए जो जनसामान्य से जुड़े हुए हैं। दरअसल, डॉ मोहन यादव के सामने वही चुनौतियां थीं, जो किसी भी नए मुख्यमंत्री के सामने होती है। अव्वल तो उन्हें पूर्ववर्ती शिवराज सरकार की छाया से बाहर निकलने की चुनौती थी और फिर अपनी इच्छाशक्ति के साथ संकल्प को पूरा करने के लिए रास्ता बनाना था। डाॅ यादव ने अपने तेवर दिखाते हुए जता दिया कि नई सरकार जनसरोकारों से जुड़ी हुई है।
————–211 साल का मिथक तोड़ा—————
ताबड़तोड़ फैसलों से चर्चा में आए डाॅ यादव ने उस समय समूचे सूबे सहित देश भर के नेताओं को हैरत में डाल दिया जब उन्होंने उज्जैन में ही रात बिताने का फैसला लिया। चूंकि, ये मान्यता रही है कि महाकाल की नगरी में कोई भी बड़ा नेता रात नहीं बिताता लिहाजा दक्षिण उज्जैन के विधायक और सीएम डाॅ यादव उज्जैन में रात्रि विश्राम करेंगे या नहीं इस सवाल कौंध रहा था। डाॅ यादव ने इस मिथक को तोड़ दिया। उन्होंने मिथक तोड़ने से पहले जनसभा को संबोधित करते हुए ये भी बताया कि 211 साल पहले इस मिथक को तत्कालीन राजा दौलत राव सिंधिया ने बनाया था। मध्यप्रदेश के तत्कालीन राजा महाद जी सिंधिया के निधन के बाद दौलत राव सिंधिया राजधानी को उज्जैन से ग्वालियर ले जाना चाहते थे। इसके चलते उन्होंने यह मिथक बनाया कि उज्जैन में राजा एक ही हैं- बाबा महाकाल, इसलिए दो राजा उज्जैन में निवास नहीं कर सकते। डॉक्टर यादव ने यह भी कहा कि यह मिथक झूठा है। इसका शास्त्रों में कहीं कोई उल्लेख नहीं किया गया है। डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में रात रुक कर इस किवदंति को तोड़ दिया। मालूम हो कि उज्जैन के गीता कॉलोनी इलाके में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं। उनके दो भाई हैं और एक बड़ी बहन है। पूरे परिवार के साथ डॉक्टर मोहन यादव ने रात्रि विश्राम किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। इसकी बानगी भी मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा-2019 और 2020 में चयनित अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में नजर आई। सीएम ने चयनित अधिकारियों से संवाद बताया कि उन्होंने अपना काम उज्जैन में एक छोटी सी होटल से शुरू किया था। होटल चलाते-चलाते राजनीति में आ गए और कॉलेज सेक्रेटरी बन गए। जब मैं इस उलझन में था कि होटल चलाउ या राजनीति में करूं उस दौरान मेरे मित्रों ने साथ ही और इसके बाद आगे बढ़ते गए। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश गान पर अधिकारियों के खड़े होने पर उनको बैठने का इशारा किया। फिर अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के समय खड़ा होना ठीक है, लेकिन कोई दूसरा गान हो जैसे मध्य प्रदेश गान के समय खड़ा होना जरूरी नहीं है। यह परंपरा बदली जानी चाहिए। यहां ये बताना लाजमी होगा कि शिवराज सिंह चैहान ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर मध्य प्रदेश के गान को राष्ट्रगान की तरह सम्मान देने का संकल्प दिलाया था।
——सूबे के विकास का खाका कर रहे तैयार——-
डॉ. मोहन यादव ने उस वक्त सूबे की कमान संभाली है जब प्रदेश पर करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। इसमें मूलधन के अलावा करीब 25 हजार करोड़ रूपए सालाना ब्याज देना पड़ रहा है। इस वित्तीय वष्र में सरकार की राजस्व आय 2 लाख 3 हजार करोड़ रूपए के आसपास है जबकि खर्च 2 लाख 2 हजार करोड़ रूपए है। ऐसे में यादव के सामने चुनौती है कि कर्ज भी चुकता जाए और वादे भी पूरे होते रहें। इसके लिए उन्होंने निवेश का खाका तैयार किया है। टूरिज्म, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स, नगरीय क्षेत्र विकास, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, एमएसएमई उद्योग और बड़े उद्योगों को लेकर अलग-अलग निवेश का प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही देवास, मंडीदीप, पीथमपुर, मुहासा बाबई और जबलपुर के औद्योगिक क्षेत्र के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी निवेश को लेकर प्लान तैयार किया गया है। मध्य प्रदेश में फिल्म सिटी और हेरिटेज विलेज बनाने का भी प्लान बताया गया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर में रामोजी फिल्म सिटी की तरह फिल्म सिटी निर्माण, मीडिया, इंटरटेनमेंट सेक्टर, एनिमेशन, फिल्म, गेम प्रोडक्शन, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संबंधित उद्योगों की स्थापना को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हेरिटेज विलेज के रूप में बांधवगढ़, खजुराहो, महेश्वर, मांडू, चंदेरी, सांची ओरछा जैसे कई शहरों को शामिल किया गया है। वहीं आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निकट स्पिरिचुअल सिटी बनाने का भी प्लान है। जबलपुर और ग्वालियर में रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की बात कही गई है। देवास, सीहोर, इंदौर, ग्वालियर, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सतना, कटनी, पन्ना, रीवा और बुंदेलखंड के जिलों के लिए भी अलग-अलग प्लान बताए गए हैं। मोहन सरकार प्रदेश के बुनियादी विकास के साथ ही औद्योगिक तरक्की, लंबित सिंचाई परियोजनाओं, सड़कों के विस्तार की दिशा में भी काम कर रही है। लगभग दो दशक से लंबित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना अब मूर्त रूप ले सकेगी। इससे मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिले और पूर्वी राजस्थान के 13 जिले लाभान्वित होंगे। 75000 करोड़ की इस परियोजना में राज्यांश मात्र 10 प्रतिशत है, 90 प्रतिशत राशि केंद्र शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। मध्यप्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के बीच श्रमशक्ति भवन स्थित जल शक्ति मंत्रालय के कार्यालय में संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक परियोजना के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की मौजूदगी में हस्ताक्षर हो चुके हैं। प्रदेश के ड्राई बेल्ट वाले जिलों जैसे मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड और श्योपुर में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक बेल्ट वाले जिलों जैसे इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास और राजगढ़ के औद्योगीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के मालवा और चंबल अंचल में लगभग तीन लाख हेक्टेयर का सिंचाई रकबा बढ़ेगा। यह परियोजना 5 वर्ष से कम समय में फलीभूत होगी, जिसकी वर्तमान लागत लगभग 75000 करोड़ रुपए है। पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की फीजिबिलिटी रिपोर्ट फरवरी 2004 में तैयार की गई थी तथा वर्ष 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा आरसीपी का प्रस्ताव लाया गया था। वर्तमान समझौता ज्ञापन में दोनों परियोजनाओं को एकीकृत कर दिया गया है।केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन फरवरी 2024 में होगा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में जबलपुर में 2 हजार 367 करोड़ रूपये की लागत से 226 किलोमीटर लंबी 9 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। इसके अलावा प्रदेश को 10 हजार 405 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात मिली है।
——–औद्योगिक तरक्की की दिशा में प्रयास————-
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास को लेकर उद्योगपतियों से भी मुलाकात की थी। इस दौरान बताया गया कि गोल्ड क्रेस्ट कंपनी मध्यप्रदेश के नीमच जिले में 3 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसका प्रस्ताव कंपनी ने दिया है। कंपनी के प्रबंध निर्देशक आरएस जोशी ने मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव को बताया कि कंपनी ने कैप्टिव पावर प्लांट के साथ तीन मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता का सीमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए निवेश का प्रस्ताव दिया है। फोर्स मोटर्स लिमिटेड के अध्यक्ष अभय फिरोदिया ने बताया कि कंपनी राज्य के पीथमपुर में 1987 से कार्यरत है और 4,515 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है। दो हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। पिनेकल इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डा. सुधीर मेहता ने बताया कि उनकी कंपनी पीथमपुर में 1996 से काम कर रही है और 175 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है। एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। शासन ने पिनेकल मोबिलिटी साल्यूशन कंपनी को पीथमपुर में संयंत्र स्थापित करने के लिए 50 एकड़ भूमि दी है। सागर ग्रुप के अध्यक्ष सुधीर अग्रवाल ने रायसेन जिले में संचालित पांच स्पिनिंग इकाइयों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। इससे दो हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार मिला है। ग्रुप ने 200 करोड़ के निवेश के साथ बासमती चावल एवं अन्य चावल की इकाइयां भी स्थापित की हैं, जिसमें लगभग 400 लोगों को रोजगार मिला है।
——असली परीक्षा तो लोकसभा चुनाव में होगी——
मध्यप्रदेश में शिव सरकार की जगह अब मोहन सरकार है। विधानसभा चुनाव के पहले मप्र में ऐसा लग रहा था मानों भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर होगी लेकिन नतीजों ने जाहिर कर दिया कि आम जनमानस के मन मोदी है। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कमलनाथ के चेहरे पर लड़ रही कांग्रेस महज 66 सीटों पर सिमट गई। मतदाताओं का एक वर्ग भाजपा की इस जीत को शिवराज की लाडली लक्ष्मी योजना के प्रतिफल से भी जोड़कर देख रहा था। खैर, जिस तरह चुनाव के नतीजों ने चैंकाया उससे ज्यादा मुख्यमंत्री पद पर नाम की घोषणा ने चैंकाया। महाकाल की नगरी उज्जैन के बाशिंदे डाॅ मोहन यादव की चर्चा तो दावेदारों में भी ज्यादा नहीं थी। सीएम बनने के बाद लोगों की नजर इस पर भी थी कि वे प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गजों के साथ कैसे काम कर पाएंगे और कैसे अपनी अलग छवि बना पाएंगे। लेकिन, सीएम यादव ने अपने दूरदंशी फैसलों से जता दिया कि वजनदारी के मामले में वे किसी से कम नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी की चैथी और बंपर जीत के बाद कई लोगों का मानना था कि शिवराज के इतर किसी नए चेहरे को कमान सौंपना इतना आसान नहीं होगा लेकिन बहुतों का मानना था कि पीएम मोदी के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। मोदी ने तो मोहन यादव पर भरोसा जताकर कमान सौंप दी है। अब, यादव की असली परीक्षा लोकसभा चुनाव 2024 में होगी। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में भाजपा ने 29 में 28 सीटें जीती थीं। छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने गढ़ बचा लिया था। लोस चुनाव में भाजपा को 58.5 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.8 प्रतिशत वोट शेयर मिले थे। डाॅ यादव के सामने चुनौती है वह अपनी पार्टी के वोट प्रतिशत को बढ़ाते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज करें या कम से कम 28 सीटों का पिछला रिकार्ड तो बरकरार रखें ही। उन्हें संघ और संगठन के साथ तालमेल बिठाते हुए काम करना होगा। शिवराज सिंह चैहान के अलावा अपने से सीनियर लेकर अपने ही काबीना मंत्री प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गजों को साधना भी आसान नहीं होगा। विधानसभा चुनाव के दौरान लाडली बहना योजना, 450 रूपए में गैस सिलेंडर, किसान सम्मान निधि, एमएसपी पर गेंहू और धान खरीदने आदि की घोषणा की गई थी। इन योजनाओं के लिए बजट जुटाने और वादों को पूरा करने की जवाबदेही भी मोहन सरकार पर है। जानकारों का कहना है कि यादव के लिए ये तो अभी शुरूआत है असली पिक्चर तो लोकसभा चुनाव हो जाने के बाद शुरू होगी। हालांकि, लोकसभा चुनाव में यादव को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी क्योंकि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भाजपा के पक्ष में माहौल तो पहले ही तैयार हो चुका है।
—————– रहे हैं सुर्खियों में—————-
यूं तो यादव सरल, सहज और हंसमुख स्वभाव वाले हैं लेकिन एक बार चुनाव आयोग उन पर चुनाव प्रचार से एक दिन का प्रतिबंध भी लगा चुका है। मामला 2020 के उपचुनाव का है। प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए मोहन यादव ने माता सीता के जीवन को तलाकशुदा महिलाओं जैसा बताया था। उज्जैन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यादव ने कहा था कि जिस सीता माता को श्रीराम इतना बड़ा युद्ध करके लाए, उन्हें गर्भवती होने पर भी राज्य की मर्यादा के कारण छोड़ना पड़ा था। सीता माता के बच्चों का जन्म जंगल में हुआ था। इतने कष्ट के बावजूद भी वह पति के प्रति कितनी श्रद्धा करती है कि कष्टों को भूल कर श्रीराम के जीवन की मंगल कामना करती हैं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है। भगवान राम के गुणों को बताने के लिए उन्होंने बच्चों को भी संस्कार दिए। सीता माता के धरती में समाने में प्रसंग को लेकर यादव ने कहा था कि आज की भाषा में इसे आत्महत्या कहा जाता है। वैसे, इस अपवाद को छोड़ दिया जाए तो उनके दामन पर अब तक कोई दाग नहीं है।

जमीन, सोना, शेयर और रिवाल्वर भी यादव के पास
डाॅ यादव की गिनती प्रदेश के अमीर नेताओं में होती है। मायनेता डाॅट काॅम के मुताबिक यादव के पास करीब 42 करोड़ की संपत्ति है, उन पर लगभग 9 करोड़ की देनदारी है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई कंपनियों के शेयर, डिबेंचर और बाॅन्डस में करीब 6 करोड़ 42 लाख 71 हजार रूपये निवेश किया हुआ है। डाॅ यादव और उनकी पत्नी के पास बजाज अलायंस, रिलायंस निपाॅन में इंश्योरेंस पाॅलिसी भी है। मोहन यादव के पास 140 ग्राम सोना और उनकी पत्नी के पास 250 ग्राम सोने के जेवर और करीब सवा किलो चांदी है। इसके अलावा उनके पास एक इनोवा कार और सुजुकी स्कूटर है। इतना ही नहीं डाॅ यादव के पास एक रिवाल्वर और 12 बोर बंदूक भी है। हलफनामे के मुताबिक मोहन यादव के नाम पर उज्जैन में एक करोड़ का प्लाट, पत्नी के नाम पर करीब 6 करोड़ के दो प्लाट हैं। इनके अलावा दोनों के नाम पर 6 करोड़ से ज्यादा के घर और फ्लैट हैं। 15 करोड़ की कृषि भूमि भी है।
————–जाने अपने मुख्यमंत्री को —————
डाॅ. मोहन यादव
जीवन संगी-सीमा यादव
बच्चे-2 पुत्र, 1 पुत्री
राजनीतिक दल-भारतीय जनता पार्टी
निवास-1-1 मुंज मार्ग, फ्री गंज, उज्जैन, मध्य प्रदेश
निर्वाचन क्षेत्र- उज्जैन दक्षिण (217)
पिता- श्री पूनमचंद यादव
माता- श्रीमती लीलाबाई यादव
जन्म तिथि – 25 मार्च,1965
जन्म स्थान- उज्‍जैन
शैक्षणिक योग्यता – बी.एस.सी., एल-एल.बी., एम.ए.(राजनीति विज्ञान), एम.बी.ए.,पी.एच.डी.
व्यवसाय- अभिभाषक, व्‍यापार, कृषि
अभिरुचि – पर्यटन, संस्‍कृति, इतिहास, विज्ञान, खेलकूद
स्थायी पता – 180, रविन्‍द्रनाथ टैगोर मार्ग, अब्‍दालपुरा, जिला-उज्‍जैन
कार्यालय -1-1, मुंज मार्ग, फ्रीगंज, जिला-उज्‍जैन (म.प्र.)
दूरदूभाष-(0734) 2575050, 2575151 मोबाइल-9425092255, 9300915151
स्थानीय पता – विंध्‍य कोठी, विधायक विश्राम गृह परिसर, भोपाल (म.प्र.)
दूरदूभाष-(0755) 2430457, 2430757
————ये है मोहन यादव का परिवार————-
पिता का नाम पूनमचंद यादव
माता का नाम लीलाबाई यादव
ग्यारसी बाई (बहन)
नंदलाल यादव (भाई)
नारायण यादव (भाई)
मोहन यादव (मुख्यमंत्री)
कलावती यादव (बहन)
ग्यारसी बाई (बहन) परिवार में साथ में रहती हैं और कोई संतान नहीं
नंदलाल यादव (भाई), इनकी दो पत्नियां हैं, बेटे का नाम निशांत यादव पिताजी के व्यापार में सहयोग करते हैं, बेटी की शादी हो चुकी है।
नारायण यादव (भाई), रेखाबाई (पत्नी), अभय यादव (पुत्र) खदान का काम करते हैं, आयुष यादव (पुत्र) आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। सलोनी यादव (पुत्री) शादी हो चुकी है।
मोहन यादव (मुख्यमंत्री), सीमा यादव (पत्नी), अभिमन्यु यादव (पुत्र) डॉक्टर हैं, मध्यप्रदेश के मेडिविजन प्रमुख रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में, आकांक्षा यादव (पुत्री) डायग्नोलॉजिस्ट सर्जन, शादी हो चुकी है, वैभव यादव (पुत्र) एलएलबी-एलएलएम, उज्जैन महानगर में सहमंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में
कलावती यादव (बहन), उज्जैन नगर निगम में सभापति, इनकी कोई संतान नहीं है।
——ऐसा ही सीएम मोहन यादव का ससुराल———
मोहन यादव का यूपी से खास रिश्ता है। यूपी के सुल्तानपुर में उनका ससुराल है। गांव कुर्रा दड़वा (फुलौना के निकट) और वर्तमान में नगर के डिहवा विवेकानंद नगर मोहल्ला निवासी ब्रम्हादीन यादव की पुत्री सीमा के साथ मोहन यादव की साल 1994 में शादी हुई थी। मोहन यादव के ससुर का नाम ब्रह्मानंद यादव है। जिनके तीन पुत्र और एक पुत्री है। पुत्री का नाम सीमा यादव है जो मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी हैं। ब्रम्हादीन यादव रीवा प्राथमिक विद्यालय में टीचर थे। इसके साथ ही वह संघ से भी जुड़े थे, तब मोहन यादव उज्जैन में सभासद थे। इस दौरान उज्जैन में मोहन यादव के परिवार से उनकी नजदीकियां बढ़ती गईं और रिश्तेदारी में बदल गईं। ब्रह्मानंद यादव ने मंुबई से शिक्षा-दिक्षा हासिल की। इसके बाद वे रीवा पहुंच गए और वहां एक स्कूल में नौकरी की। वे 1987 में प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए। सुल्तानपुर में शहर के ओमनगर में सीएम यादव के साले विवेकानंद यादव रहते हैं। वे सरस्वती विद्या मंदिर में शारीरिक शिक्षक हैं। उनकी इकलौती छोटी बहन सीमा के पति मोहन यादव के सीएम बनने पर वहां भी खुशियां मनाई गईं। ब्रह्मानंद यादव के एक बेटे सदानंद यादव रीवा में ही रहते है। जो रिटायर्ड शिक्षक है। उनके दूसरे बेटे रामानांद यादव इंडियन एयरफोर्स से सेनानिवृत्त हुए हैं और वे जबलपुर में रहते हैं। सीमा यादव ने रीवा से 1989 में भूगोल से एमए किया है। वे भी अपने भाईयों की तरह ही संघ से जुड़ी रहीं हैं।
छात्र नेता से लेकर मुख्यमंत्री तक
सन् 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में छात्र संघ अध्यक्ष।
सन् 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख।
सन् 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य।
सन् 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री।
सन् 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री।
सन् 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्ड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह।
सन् 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह।
सन् 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य।
सन् 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य।
सन् 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी।
सन् 2000-2003 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्य परिषद के सदस्य।
सन् 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री।
सन् 2004 में भा.ज.पा. की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य।
सन् 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य।
सन् 2004-2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा)।
सन् 2006 में मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष।
सन् 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
सन् 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष।
सन् 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा)।
भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य।
सन् 2013-2016 में भा.ज.पा. के अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक।
उज्जैन के समग्र विकास हेतु अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार और इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित।
मध्यप्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास हेतु सन् 2011-2012 एवं 2012-2013 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत।
सन् 2013 में चैदहवीं विधान सभा के सदस्य (विधायक) निर्वाचित।
सन् 2018 में दूसरी बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित। दिनांक 2 जुलाई, 2020 को मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री पद की शपथ। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में देश में पहली बार मप्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन किया। 54 नए महाविद्यालय खोले।
सन् 2023 में तीसरी बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए।
सन 2023 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री।
धार्मिक क्षेत्र- विक्रमोत्सव-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आरंभ विक्रम संवत पर प्रारंभ होने वाले भारतीय नववर्ष मनाने की परंपरा, विगत 11 वर्षों से प्रतिवर्ष भव्य उत्सव शिप्रा तट पर आयोजित किया जाता है। धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति, तीज, त्यौहार, रीति-रिवाज के पारंपरिक आयोजनों में शामिल होकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला, विज्ञान, पुरातत्व, वेद ज्योतिष से जुडने हेतु जनमानस को अभिप्रेरित किया।
साहित्य- विक्रमादित्य शोधपीठ का गठन।
लेखन- उज्जैयनी का पर्यटन, विश्वकाल गणना के केंद्र डोंगला का लेखन, संकल्प शुभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव आदि पुस्तकों का प्रकाशन।
विदेश यात्रा- अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, बैंकाक, थाईलैंड, चीन, नेपाल, बर्मा, भूटान, म्यांमार, अरब देशों की यात्रा।

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