मतदाता सूची को लेकर आरोप एड्व्होकेट एवं पूर्व मीडिया पैनलिस्ट म०प्र० कांग्रेस कमेटी सचिव म0प्र0 कांग्रेस कमेटी पी के द्विवेदी ने लगाया तथा सिलसिलेवार तरीके से तथ्य रखे म0प्र0 में हर जिले में अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर खेल किया जाता रहा है, मतदाता सूची पुनरीक्षण नाम से मतदाताओं के नाम जोड़ने घटाने के नाम पर कभी लाखों हजारों मतदाता के नाम सूची से काट दिये जाते हैं, तो कभी बढ़ा दिये जाते हैं। बढ़े मतदाता कैसे नये आये घटे तो कैसे कटे सवालों का तथ्यों सहित जबाब नहीं दिया जाता।अब इंदौर में एक नया खेल होने वाला है बाहर से आकर अध्ययन करनेवाले स्टूडेंट के नाम जोड़ने का काम किस आधार पर जोड़ेंगे क्या उन्होंने पुरानी जगह नाम कटा लिया क्या वे शहर के निवासी हैं आधार क्या होस्टल किराये का घर तो क्या रजिस्ट्रेशन है, भाजपा नेताओं सरकार अधिकारियों ने नीति बनाई है।मतदाताओं के नाम जोड़ने के आधार होने चाहिए पर भाजपा राज में सारे नियम कानून तेल लेने गये इस का उदाहरण पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता का सन् 2013 में मतदाता सूची में नाम । नंबर विधानसभा के कालानी नगर के एक 1000 फुट के मकान में परिवार सहित नाम जुड़ना साबित करता है (नोट गुप्ता ने जिस 24 ए, कालानीनगर के पते का जिक्र करके अपना मतदाता – पहचान पत्र (ईपीआईसी नं. एसजीयू 01407819) बनवाया है, उसी पते पर डेढ़ दर्जन मतदाता पहले से रजिस्टर्ड है। सुदर्शन और उनकी पत्नी शकुंतला के साथ दो बच्चे पंजीबद्ध होने के बाद यहां मतदाताओं की संख्या 21 हो चुकी है जबकी नगर निगम के सम्पत्ति खाते के मुताबिक जी +1 का यह मकान कुल मिलाकर 1000 वर्गफीट में बना है) मैंने मय दस्तावेज साथ यह मामला उठाया था सुदर्शन और उनका परिवार महेशनगर में रहते हैं पैतृक मकान साथ खुद का ख़रीदा मकान 4/2 व पास के ही गिरधर नगर नामक कालोनी में संपत्ति है सन् 1994 में 23 नंबर वार्ड के पार्षद रहे फिर 2008 में एक नंबर से लड़ें तब भी विधानसभा 4 के मतदाता रहे लोकसभा नगरनिगम चुनाव में भी तो फिर यहां नाम कैसे शिकायत दर्ज कराई नाम चुनाव बाद हटाया गया जुड़ा कैसे? आज भी जांच हो रही है उस चुनाव में 10000 से अधिक नाम मेरी शिकायत पर कटे 2008 में ही 1000 फुट के मकान एक मंजिला मकान में एक भाजपाई शिक्षक परिवार के घर में 65 मतदाताओं के नाम पंचायत चुनाव में पकड़े बाद में हटे सुदर्शन सही थे तो 2018 के चुनाव में फिर पुराने पत्ते पर नाम परिवार सहित कैसे कटा जुड़ाकटा केसे अभी तक जांच चल रहअब खास मतदाता परिचय पत्र बनाने का काम अहमदाबाद की कंपनी को मिला था, गड़बड़ी की हदें पार की शिकायत हुई जांच होती कि एक अधिकारी का ही नकली मतदाता पहचान पत्र जारी हो चला तात्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने शिकायत की रावजी बाजार पुलिस ने पकड़ा, राजनीतिक दबाव में पुलिस धीमी रही कंपनी के अमले ने लाखों मतदाताओं के, नाम मतदाता पहचान पत्र बनाने की बात स्वीकारी आरोपीगण गायब जाँच फाईल नस्तीबद्ध कंपनी गायब मामला उठाया पर रफा-दफाआज मेरा सवाल मतदाता अचानक कम कैसे या ज्यादा कैसे हो जाते सैकड़ों नाम ऐन मतदान केंद्र पर कटे कैसे मिलते हैं? जबकि मतदाता बनने पता बदलने नाम हटाने जोड़ने की एक कानून व्यवस्था है, गलती करने पर कानून अनुसार सजा पर भाजपा सरकार में आजतक किसी अधिकारी को सरकार ने दोषी करार नहीं दिया ना जांच हुई हालात यह कि निजी स्कूलों के शिक्षकों नगरनिगम कार्यालय के मस्टरकमी तक चुनाव व्यवस्था संग मतदानकर्मी बनाऐ जाते रहे। नकली मतदाता सूची जगह कैसे पाते रहे नाम कटे जुड़े, पता बदला जोड़े हटाऐ कैसे सवालअनुत्तरित हालात कतिपय जजों के नाम भी हटे मामले उठे थे पर आजतक लीपापोती। द्विवेदी ने आंशका व्यक्त की है कि भाजपा फिर नया खेल करेगी अधिकारियों संग, लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या कर दी गई है आगे ना हो राजनीतिक दल आगे आये 31 अगस्त आगे। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन छोटी ग्वालटोली पुलिस की पेट्रोलिंग पर उठते सवाल जवा थाने के नवागत थाना निरीक्षक अजय खोब्रागड़े ने थाने की कमान संभालने के बाद मीडिया से हुए रूबरू