नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। एक मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में और उसकी समझ की भाषा में बताना जरूरी है। वहीं, ‘वंदे मातरम’ से जुड़े मामले में कोर्ट ने धार्मिक या अंतरात्मा के आधार पर गीत नहीं गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के सवाल पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। लिखित कारण बताए बिना गिरफ्तारी गैरकानूनीजस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने जसकरणजीत सिंह देओल बनाम पंजाब सरकार मामले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है। यह जानकारी लिखित रूप में और ऐसी भाषा में दी जानी चाहिए जिसे गिरफ्तार व्यक्ति समझ सके। कोर्ट ने कहा कि यह सुरक्षा अपराध की प्रकृति या गंभीरता से प्रभावित नहीं होती और विशेष कानूनों के तहत होने वाली गिरफ्तारियों पर भी लागू होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी इस संवैधानिक आवश्यकता का पालन नहीं होने के कारण अवैध घोषित होती है, तो पुलिस उसे अपनी ओर से सीधे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। दोबारा गिरफ्तारी के लिए संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा और पूर्व अनुमति लेनी होगी। आवेदन में यह भी बताना होगा कि पहली बार गिरफ्तारी के समय कारण क्यों नहीं बताए गए और अब दोबारा हिरासत की आवश्यकता क्यों है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंपने और पहली गिरफ्तारी में संवैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया। ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर आपराधिक कार्रवाई का सवालएक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फिलहाल यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक गायन में दो या छह अंतरे होने चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस सवाल की जांच पर सहमति जताई कि धार्मिक या अंतरात्मा के आधार पर ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने वाले व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। सुनवाई के दौरान पीठ ने Bijoe Emmanuel मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांत का भी संदर्भ दिया। केंद्र सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और अदालत के निर्णय के बाद स्पष्ट होगी। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन कोनी ग्राम पंचायत का काला सच! पूर्व में किये गए कई घोटालों के बाद 8 माह पूर्व बनी पीसीसी सड़क उखड़ी अपने नाम की SIM दूसरे को देने पर हो सकती है कार्रवाई, 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान