स्मृति शेष…राजेश उषा शर्मा,इंदौर।कह दो भाई कि ये सब झूठ है,,, बोल दो उठकर कि मैं तो नींद में था और मजाक कर रहा था और में बिलकुल सकुशल हूं,,, काश ये मनहूस खबर असत्य होती,,, बेहद दुखद, बेहद चौंकाने वाली ऐसी खबर से भाजपा और शहरवासी सब क्षुब्ध हैं और शून्य हैं,,,, इस मृत्यु – लोक से हर किसी को एक दिन बिदा होना ही है,, कुछ लोग कुछ कर गुजरने के लिए ही इस लोक में आते हैं,, अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं,,, परिवार का, कुल का नाम रोशन कर जाते हैं,, सरस्वती के लाडले और दुलारे शायद वक्त से पहले ही इस लोक से बिदा हो गए,,, उनके परिवार को, इस शहर को और भाजपा को ऐसे बेबाक, तेज – तर्रार, दबंग, कुशल – रणनीतिकार, युवा- ब्रिगेड, बुलंद आवाज , व्यवहार- कुशल, यारों के यार, विरोधी भी जिनके फैन हों, तर्क- विशेषज्ञ,मंच संचालन के जादूगर, संकटमोचन, सरस्वती पुत्र की नितांत जरूरत थी, सख्त जरूरत थी,,,, उमेश का पत्रकारों से मिलने का अंदाज बिलकुल ही बिलकुल जुदा था,,, मीडिया में तो उनके लगभग सभी से उनके दोस्ताना रिश्ते रहे है,,, दोनों हाथ जोड़कर विनम्रता से कहते – सभी बुद्धिजीवियों को मेरा प्रेम – भरा मेरा प्रणाम… चाहे अधिकारी हो या विरोधी दल के नेता,,, आमजन हो या फिर खासजन सबसे स्नेहिल- प्रेम से पेश आना उनकी खासियत थी,,,, उनके पेश होने का अनूठा अंदाज सबको ही भाता था,,, उनकी डिकशनरी में असंभव शब्द तो था ही नही,,, कई मर्तबा तो पार्टी के संकटमोचन भी साबित हुए है,,, उनकी खासियत और विशेष काबिलियत के कारण ही उन्हें गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी,,,, उमेश की बुलंद आवाज का प्रदेश के साथ – साथ देश में भी बोल – बाला था,,, नरेंद्र मोदी की भी उन पर विशेष नजर थी,,,, उनके बेबाक अंदाज के हर जगह चर्चे रहते थे और वे सदैव सुर्खियों में ही रहा करते थे,,,,सभा को, भीडतंत्र को, जन – जन को बांधे रखना,,,माहौल को जीवित रखना,,, जन – जन में जोश भरना, कार्यकताओं में जुनून पैदा करना ये हर किसी की बूते की बात नही,,, इन मामलों में उमेश डॉक्टर ही थे,,,गत दिनों की ही बात है बंगाली चौराहे के ओवर ब्रिज के शुभारंभ पर शिवराज खासे लेट हो गए, भीड़ धीरे – धीरे बोर होकर खिसकने लगी और अच्छी – खासी भीड़ रवाना होने लगी,,, उमेश ने मामले की गंभीरता को समझा और माइक सम्हाला और कुल मिलाकर भीड़ को ४५ मिनिट तक अपने अंदाज से बांधे रखा,,,ऐसे कई किस्से है जब उमेश पार्टी के संकटमोचक साबित हुए,,, उनकी विशेष और खास शैली से सभीजन मंत्रमुग्ध हो जाया करते थे,,,, एक और खासियत,,,,उनकी याद्दाश्त की भी दाद देनी पड़ेगी,,,वर्षों पुरानी घटनाएं , विशेष किस्से, घटनाक्रम, राजनितिक हादसे उन्हे मुंह जवानी याद रहा करते थे,,, और कई बार तो वे अपनी पार्टी के विरुद्ध भी खड़े हुए,,, अन्याय और अधर्म के मामले वो किसी को भी नही बख्शते थे चाहे उनकी पार्टी ही क्यों न हो,,,,और मौका भांपकर फिर माफी भी मांग लिया करते थे और मना भी लेते थे,,,ऐसा दमदार और शानदार व्यक्तित्व, पार्टी का सच्चा सपूत अनंत यात्रा पर निकल चुका है,,, पार्टी के लिए बहुत ही दुखद क्षति है, गहरा वज्रपात है, जिसकी पूर्ति असंभव है,,, मै भी परम मित्र और एक बड़े भाई को खोकर बेहद शुब्ध हूं,,, शून्य हूं,,, व्यथित हूं,,,, ऐसे भाई, ऐसे अद्भुत सरस्वती सपूत सदियों मे ही पैदा होते हैं,,, निसंदेह उमेश भविष्य की भारतीय राजनीति के सुनहरे एवम अनमोल सितारे थे जो काल में समा गए और लुप्त हो गए,,,, परमात्मा आपको अपने पुण्य और श्री चरणों में स्थान दें,,, आपको कभी न भूल पाएंगे,,,,,भीगे नयनों से शत शत नमन और वंदन,,,,,,, Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन तारागिरी युद्धपोत से नौसेना की बढ़ेगी ताकत : सौरभ गुप्ता अलविदा उमेश भाई
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