🔵 *अंधेरगर्दी*🟪🟩 *कई नामी गिरामी अधिकारी आए – गए लेकिन शहर की हालत ज्यों की त्यों**📌इंद्र और बिजली विभाग का चोली – दामन का संग*।*📌नंबर १ शहर की खुली पोल* *और फूला दम*।📌 *आखिर कौन सुध लेगा राम भरोसे शहर की*????? राजेश उषा शर्मा इंदौर।दो तीन से उमस भरे दिन – रात ने इंद्र के बरसने का इशारा कर दिया था कि वो मेहरबान होने वाले है,,,, आज दोपहर को चली धूल -भरी आंधी ने शहरवासियों को इंतजाम के लिए चेता दिया कि इंद्र जमकर बरसने वाला है,,, कई लोग अपने अपने आशियाने में दुबक लिए,,, कई ने बरसती – छतरी का इंतजाम कर लिया,,,, लेकिन मजाल है कि नगर निगम और बिजली विभाग कुछ इंतजाम करने की जुर्रत कर ले,,, रोड बन गए, शहर संवर गया, रंग रोगन भी होगा, सुंदर पेंटिंग से शहर सज – धज भी गया, सफाई में और कई मामलों में झंडे भी गाड़ लिए,,, लेकिन जल -भराव , ड्रेनेज समस्या और बिजली विभाग की लापरवाही, बेपरवाही और गैरजिम्मेदारी बरसों से नही सुधरी,,,, सिस्टम वही सड़ांध मार रही है,,, जरा सी बारिश में ही बिजली झट से गुल हो जाती है,,, रात भर यदि ऐसी बारिश हो जाए तो आधे से ज्यादा शहर नदी में तब्दील हो जाए और नाव चलानी पड़ जाए,,,,गोधूली बेला से ही गरज के साथ करीब १ घंटे तक लगभग पूरे शहर में इंद्रदेव मेहरबान हुए और जमकर बरसे,,, हालांकि प्री मानसून में भी इंद्र पूरे मूड में थे और बरस्कर अति उमस से निजात दिलाई जिसे शहरवासियों ने दिल से स्वागत भी किया,,, पकोड़े की बिजली के कारण हसरत अधूरी रह गई,,, बस्ती और चाल के बच्चों की टोली ने भरपूर लुफ्त उठाया साथ ही हमारी बचपन की यादें भी तरो – ताज़ा कर दी,,,, लेकिन निगम के और बिजली वालों के दावे और व्यस्थाएं हमेशा की तरह फुस्स हो गई,,, जगह – जगह महीनो से गड्ढे खुले पड़े है,,,वहा कई वाहन भी फिसले,,, जलभराव और ड्रेनेज की उचित व्यवस्था और देखभाल के अभाव में छोटे वाहन खासे परेशान हुए, गाड़ियां बंद हो गई,,, कई वाहन भी भिड़े,,, बिजली विभाग की सेवाएं लगभग तीन/ चौथाई शहर में फुस्स हो गई,,, हमेशा की तरह चरमरा गई,,,, इंद्र देव तो थम गए लेकिन विभाग की नाकामी और लापरवाही, मानसून पूर्व त्यारियां भी फेल साबित हुई,,, कई क्षेत्रों में तो बिजली अभी भी लेख लिखने तक गुल ही है,,, कहीं पर आंख मिचौली चल रही है,,,संबंधित अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने की अदा तो बरसों से बेमिसाल है ही,,, कहीं गलती से उठ भी जाय तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलेगा, घर में भीषण गर्मी और मच्छरों का प्रकोप,,,घर परिवार में गर्भवती महिलाएं, बच्चे, मरीज और वृद्धजन खासे घंटो से परेशान हो रहे है,,, कोई सुध लेनेवाला नही है,,, मोटी तनखा और भारी सुविधाएं के बावजूद अधिकारियों का ये ढुल – मुल रवैया बरसों से बदस्तूर जारी है,,, नेतागण भी सत्तापक्ष या विरोधी खेमा के हो सब के सब बरसों से चुप्पी साधे है,, भारी भरकम बिल भरने के बाद भी शहरवासी कष्ट और पीड़ा चुपचाप झेल रहे है,,, कब खत्म होगी ये अंधेरगर्दी पता नहीं,,, शिवराज मामा कांग्रेस को तो खूब कोसते थे,,,मामा और उनके विभाग ने तो उनका भी रिकॉर्ड ध्वस्त कर डाला,,,, अब तो शरवासियों को ही अब आगे आना पड़ेगा और अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी,,, अपने हक और अधिकार के लिए कमर कसनी होगी,,, महानगर के वासियों की तरह स्मार्ट और एक्टिव होना होगा तभी इस अंधेरगर्दी से निजात मिलेगी,,,निगम/पंचायत चुनाव नजदीक है,,,यही शानदार और बेहतरीन मौका है उन लोगों से लड़ने का और अपनी समस्या जो वर्षों से भोग रहे है अपना अधिकार और हक पेश करने का ये सुनहरा मौका है,, सत्ता की चाबी आपके ही हाथ में है,,,अभी नेता नैन में सपने संजोए आपके घर- द्वार पे वोट के लिए गुहार लगाएंगे,,, बाकी आप समझदार है निसंदेह,,, फॉर्मूला निसंदेह चमत्कारिक और जादुई असर और परिणाम ला सकता है,,, इस वाजिब मांग को नेतागण को मजबूरन मानना ही होगा,, यही नुस्खा/फॉर्मूला शहरवासियों की बरसों से लंबित परेशानियों से मुक्ति और राहत दिला सकता है,,,, तो हो जाएं एकजुट, ब्रह्मास्त जो आपके हाथ है,,, चलाएं और लड़ें अपनी जंग , विजय निश्चित मिलेगी,,,,।।।। 🔵 अंधेरगर्दी पार्ट ,मेट्रो नही मूलभूत सुविधा चाहिएदेर रात तक बिजली की आंख मिचौली चलती रही,,, विचलित और अत्याचार सहते,,, अंधेरगर्दी को देखते शहरवासी हैरान -परेशान होते रहे,, मासूम चीखते रहे,, बुजुर्ग परेशान होते रहे, मच्छर अपने डंक ने उत्पात मचाते रहे,,, सरकारी तंत्र को कोसते रहे,,, मामा द्वारा बड़ी बड़ी लच्छेदार बातें, रस घोलती घोषणाएं, लवणयुक्त वादे बीती रात याद कर पछताते रहे,,, जिस शहर ने सबसे अधिक बार सांसद बनाया और फिर संसद की शीर्ष,,, जिसे पार्षद फिर महापौर, विधायक, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के महासचिव,,,,जिस सांसद को रिकॉर्ड मतों से सांसद पहुंचाया,,, एक महिला विधायक फिर कैबिनेट मंत्री, ऐसे ही एक और कैबिनेट मंत्री, फिर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री और ज्यादा वोट देकर विधायक बनाया और इतिहास रचा गया,,, जिस शहर ने अपने, प्यारे, लाडले नेताओं को,अपने प्रतिनिधियों को अर्श पर पहुंचाया हो,,, जी भरकर प्यार लुटाया हो,,, सत्ता की मलाई भी लपककर लुटवाई हो,,, ऐसे शहर के निवासी कितने बदनसीब होंगे,,, जिन्हे लापरवाह और बेपरवाह अफसरों की गैरजिम्मेदारी की कीमत चुकानी पड़े,,, इतना कष्ट झेलना पड़े, तकलीफें उठानी पड़े और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़े,,,,ये अहिल्या नगरी के रहवासी भी कितना सब्र रखते है,,, अपने प्रतिनिधियों से बावजूद कितना माधुर्य रखते है, प्रेम रखते है,,, हर बार भरोसा रखते है,,, उसी भरोसे का बीती रात फिर कत्ल हुआ और शहर वासियों ने फिर काली रात झेली,,, कितनी आश्चर्य की बात है कि बिजली विभाग का मोटा बिल, रेंटल राशि चाहे उपयोग हो न हो फिर भी देना,,, लेट लतीफी पर अधिभार, बिल न भरने पर कनेक्शन का कटना फिर दोबारा जुड़वाने के लिए मशक्कत करना और फिर उसके के लिए चार्ज भी देना,,, बिजली बिल के पीछे तमाम नियम और शर्ते विभाग के फेवर में ही है एक भी उपभोक्ता के हित में नही,,, सब मंजूर है इस शहर को,,, लेकिन ये दिन में भी बार बार आंख – मिचौली भीषण गर्मी में?? बारिश होते ही देर रात तक गायब हो जाना और घंटो गायब हो जाना,,, फिर लोड के उतार चढ़ाव से घर के उपकरण खराब होना,, जब बिल की संपूर्ण राशि भरते है,,, किराया भी भरते है ,अधिभार सब भरते है तो फिर २४घंटे लगातार सेवाएं तो शहर का हक और अधिकार है,,, ये कैसी नाइंसाफी,,,, कैसी अंधेरगर्दी,,, ये कैसी अराजकता इतने बड़े शहर में???? ये कैसी दोगली व्यवस्था??? ऐसा प्रतीत होता है कि हम किसी तहसील में निवास कर रहे है या गांव में रहते है,,, जहां भारी- भरकम/वजनदार, सत्ताधारी , सत्तापक्ष के कर्ता -धर्ता, मंत्रीगण भी निवास करते है,,, वहां पर भी ऐसी लाचारी और ऐसी दुर्दशा,,,?? बरसों से सड़ी – गली व्यवस्था पनप रही और फल – फूल भी रही है,,, आखिर कब हिसाब होगा,, क्या विभाग हर्जाना भरेगा शरवासियों को?? आखिर कब न्याय होगा बीती काली रात और सालों की कई ऐसी रातों का?? कब आखिर कब??? कौन रहनुमा शहर की अवाम की सुध लेगा और न्याय दिलाएगा इस पीड़ा से और इस अत्याचार से,,,,?? 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