नई दिल्ली। पत्रकार आवेश तिवारी की रिपोर्ट के बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह में स्वतंत्र भारद्वाज की कथित मौजूदगी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति पर हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं, उसे 15 अगस्त को लाल किले के कार्यक्रम में VIP गैलरी के लिए निमंत्रण आखिर किस आधार पर दिया गया?मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और निमंत्रण पत्र ने सवालों को और हवा दे दी है। वायरल सामग्री में भारद्वाज को सुरक्षाकर्मियों के साथ भी देखा जा रहा है। हालांकि, इन तस्वीरों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से होना बाकी है। छात्र के पिता पर हमले के बयान की भी तीखी आलोचनास्वतंत्र भारद्वाज के नाम से प्रसारित बयानों में एक छात्र के पिता के साथ जंतर-मंतर पर कथित मारपीट का जिक्र किया गया है। आरोप है कि आंदोलन के दौरान उनके सिर पर वार किया गया, जिसके बाद उन्हें 17 टांके आए। यदि यह दावा सही है तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय घटना है।किसी भी विचारधारा, संगठन या राजनीतिक समर्थन की आड़ में किसी छात्र के पिता अथवा किसी आम नागरिक पर हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। लोकतंत्र में विरोध और असहमति का जवाब तर्क और कानून से होना चाहिए, हिंसा से नहीं। किसी व्यक्ति द्वारा खुद ही कथित तौर पर हिंसा की घटना का उल्लेख करना भी गंभीर चिंता का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कट्टा चलाने के कथित दावे पर भी पुलिस से जवाब मांगा गयासोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें भारद्वाज द्वारा कथित तौर पर कट्टा चलाने की बात कहे जाने का दावा किया गया है। ऐसे में दिल्ली पुलिस से यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि वीडियो की वास्तविकता क्या है और क्या इस संबंध में कोई शिकायत या आपराधिक प्रकरण दर्ज है? VIP निमंत्रण ने खड़े किए कई सवालपूरे विवाद का सबसे अहम पहलू 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का कथित निमंत्रण है। सामने आए कार्ड में स्वतंत्र भारद्वाज के नाम का उल्लेख दिखाई देता है। ऐसे में सवाल है कि VIP गैलरी में प्रवेश के लिए उनका चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ? निमंत्रण किस स्तर से जारी किया गया और सुरक्षा जांच में क्या प्रक्रिया अपनाई गई?यदि उनके खिलाफ वास्तव में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं तो संबंधित एजेंसियों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोह में आमंत्रित किए जाने का आधार क्या था।मामला केवल किसी एक व्यक्ति के निमंत्रण का नहीं, बल्कि VIP सुरक्षा, सरकारी प्रोटोकॉल और गंभीर आरोपों से घिरे लोगों को राष्ट्रीय समारोहों में प्रवेश देने की प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी है। दिल्ली पुलिस और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि तस्वीरें, वीडियो और सोशल मीडिया के दावों के बजाय तथ्य सामने आ सकें। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन कैसे स्कूल चलें हम………… वार्ड 58 के उपचुनावी दंगल में आजाद समाज पार्टी ने भी ठोकी ताल, उम्मीदवार उतारने की तैयारी