इंदौर। प्रदीप चौधरी। जनवरी 2025 में एक भाजपा पार्षद के नाबालिग पुत्र के साथ कथित मारपीट, अभद्रता और घर में तोड़फोड़ के मामले को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ लोगों ने घर में घुसकर नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार किया और उसके कपड़े उतारने जैसी अमानवीय हरकत की। मामले में बुजुर्ग महिलाओं के साथ कथित अभद्रता और पार्षद परिवार को धमकाने के आरोप भी लगाए गए थे।बताया जाता है कि घटना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी काफी विवाद हुआ था और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित भाजपा पार्षद के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की गई थी। पार्टी ने कथित तौर पर उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित किया था।अब करीब 18 महीने बाद निष्कासन समाप्त कर संबंधित पार्षद की पार्टी में वापसी को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जिस घटना ने पार्टी और शहर की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा किया था, उसमें संगठनात्मक कार्रवाई के बावजूद इतनी जल्दी वापसी का फैसला क्यों लिया गया?वहीं, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही की जा सकती है। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि पार्टी ने निष्कासन समाप्त करने का निर्णय किन परिस्थितियों और आधारों पर लिया।नाबालिग से जुड़े आरोपों को देखते हुए मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक स्थिति सामने आना आवश्यक माना जा रहा है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दिल्ली जल बोर्ड STP टेंडर घोटाला: ACB ने AAP नेता सत्येंद्र जैन समेत छह को किया गिरफ्तार मारपीट और अवैध वसूली के मामलों में 6 माह से फरार आरोपी नवाब शाह गिरफ्तार