इंदौर। शहर में लगातार बढ़ती यातायात समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. जेम्स पाल ने प्रशासन के समक्ष छोटे और व्यावहारिक स्तर पर समाधान तलाशने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि इंदौर की ट्रैफिक समस्या को केवल पुलिस बल की कमी के रूप में नहीं देखा जा सकता। बढ़ते वाहनों, पार्किंग, लेन अनुशासन, चौराहों की क्षमता, सार्वजनिक परिवहन और निर्माण कार्यों सहित कई कारण यातायात दबाव के लिए जिम्मेदार हैं। डॉ. पाल ने प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर एक माह का पायलट प्रोजेक्ट चलाने का सुझाव दिया है। इसके तहत पीक आवर्स में पुलिस और अधिकृत ट्रैफिक वॉलंटियर्स की पर्याप्त एवं दृश्यमान मौजूदगी सुनिश्चित करने की बात कही गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशिक्षित NCC, NSS, Scout & Guide, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा सेवानिवृत्त पुलिस, अर्धसैनिक एवं शासकीय कर्मचारियों की सेवाएं भी आवश्यक प्रशिक्षण और सक्षम अधिकारियों के नियंत्रण में ली जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन वॉलंटियर्स की भूमिका कानून लागू करने की नहीं, बल्कि ट्रैफिक फसिलिटेशन, वाहन चालकों को मार्गदर्शन, लेन अनुशासन में सहयोग और तत्काल सूचना एवं समन्वय तक सीमित रखी जाए। चयनित मार्गों पर लेन व्यवस्था का परीक्षण डॉ. पाल ने शहर के उपयुक्त चयनित मार्गों पर मुख्य लेन और सर्विस लेन के उपयोग का भी एक माह का परीक्षण करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जहां सड़क की संरचना इसकी अनुमति देती हो, वहां स्पष्ट रोड मार्किंग और संकेतकों के साथ चार पहिया वाहनों के लिए मुख्य लेन तथा दो-तीन पहिया वाहनों के लिए सर्विस लेन की व्यवस्था का परीक्षण किया जा सकता है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को मापने के लिए औसत यात्रा समय, चौराहों पर प्रतीक्षा समय, ट्रैफिक क्यू की लंबाई, वाहनों की औसत गति और आपातकालीन वाहनों को रास्ता मिलने में लगने वाले समय जैसे आंकड़े दर्ज किए जाने का सुझाव दिया गया है। सात माह से सुझाव देने का दावा डॉ. पाल ने कहा कि वे पिछले लगभग सात माह से पीक आवर्स में पुलिस अथवा अधिकृत वॉलंटियर्स की दृश्यमान उपस्थिति और चयनित मार्गों पर लेन-डिसिप्लिन पायलट जैसे सुझाव प्रशासन के समक्ष रखते आ रहे हैं। उनका कहना है कि अभी तक इन सुझावों के आधार पर कोई स्पष्ट और दृश्यमान पायलट प्रोजेक्ट जमीन पर दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की कि सुझावों को केवल पत्राचार तक सीमित रखने के बजाय एक माह का प्रयोग कर उसके परिणामों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाए। यदि कोई सुझाव व्यवहारिक नहीं है तो उसका कारण बताया जाए और यदि प्रभावी है तो उसे अन्य मार्गों पर लागू किया जाए। डॉ. पाल ने कहा कि “इंदौर को केवल ट्रैफिक मैनेजमेंट नहीं, बल्कि ट्रैफिक सॉल्यूशन की दिशा में आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने मीडिया से भी इस मुद्दे को सार्वजनिक जवाबदेही और समाधान आधारित संवाद के रूप में उठाने का आग्रह किया। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन चलती ट्रेन में चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार ड्यूटी के साथ इंसानियत की मिसाल बनीं ‘सिंगिंग कॉप’ सोनाली सोनी, वृद्ध महिला को खिलाया खाना और ओढ़ाई शाल