सूरसदन में देर रात तक गूंजती रहीं तालियां, शहर सहित आसपास के जिलों से पहुंचे साहित्य प्रेमी आगरा, यूपी। शहर के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र सूरसदन में रविवार को आयोजित बहुप्रतीक्षित काव्य संध्या “घर के वास्ते” में साहित्य और कविता का अनूठा संगम देखने को मिला। देश के लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव एवं चर्चित कवयित्री मानिका दुबे ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। सभागार में मौजूद श्रोताओं ने हर रचना पर तालियों की गूंज से कवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन के बाद स्वयं श्रीवास्तव ने परिवार, रिश्तों, प्रेम, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित अपनी चर्चित रचनाओं का पाठ किया। उनकी सहज प्रस्तुति, प्रभावशाली मंच संचालन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को भावुक भी किया और कई स्थानों पर हास्य एवं व्यंग्य से ठहाके लगाने पर भी मजबूर कर दिया। इसके बाद मंच संभालते हुए मानिका दुबे ने नारी संवेदना, समकालीन समाज और जीवन के विविध पहलुओं पर आधारित अपनी सशक्त कविताओं की प्रस्तुति दी। उनकी ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम के दौरान कई बार पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। आयोजन ओ एस एस इंस्टालेशन सर्विसेज के सौजन्य से ध्वनि म्यूज़िक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आगरा सहित आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, शिक्षाविद, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य साहित्य और संस्कृति के प्रति युवाओं का जुड़ाव बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करना है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रोहतास श्रीवास्तव और मुख्य कार्यक्रम अध्यक्ष शंभू नाथ चौबे, कार्यक्रम आयोजकों में दीपक जैन विनय जैन और आशीष दुबे , आकाश ग्लोबल, उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, श्रोताओं और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। सफल आयोजन ने आगरा की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान की और उपस्थित लोगों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मप्र पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षक बने ‘रक्षित निरीक्षक’ न माथे पर शिकन, न किसी तरह की लाज या शरम : इतनी ढिठाई कहाँ से आती है?
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