जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी कॉलेज में नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने के बाद कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को तत्काल सेवा से नहीं हटाया जा सकता। यदि संबंधित पद पर नियमित नियुक्ति हो जाती है, तो राज्य सरकार का दायित्व होगा कि संबंधित गेस्ट फैकल्टी को प्रदेश में उपलब्ध किसी अन्य रिक्त पद पर कार्य करने का अवसर प्रदान करे।यह फैसला रीवा की गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए सेवा समाप्त करना उचित नहीं माना जा सकता और ऐसी स्थिति में नियमानुसार प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जिस कॉलेज में सुमन वर्मा कार्यरत थीं, वहां नियमित शिक्षक भावना डहेरिया की नियुक्ति हो चुकी है। इस पर अदालत के सामने यह प्रश्न आया कि क्या केवल नियमित नियुक्ति के आधार पर गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले संबंधित गेस्ट फैकल्टी को किसी अन्य उपलब्ध रिक्त पद पर समायोजित करने का प्रयास करे। यदि वैकल्पिक पद उपलब्ध कराया जाता है और गेस्ट फैकल्टी वहां कार्यभार ग्रहण करने से इनकार करता है, तभी सरकार नियमानुसार उसकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई कर सकती है।अदालत ने अपने फैसले में ग्वालियर खंडपीठ द्वारा 20 मई 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश का भी उल्लेख किया और उसी सिद्धांत को वर्तमान मामले में लागू किया। साथ ही निर्देश दिया कि वैकल्पिक पद की पेशकश पर संबंधित शिक्षक की लिखित सहमति या असहमति दर्ज की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट को पहले से थी जानकारी, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का दावा रील बनाने के चक्कर में गले में डाला जहरीला सांप, नाग ने डसा; समय पर इलाज से बची जान