16 हजार वर्ग किमी में फैले UIMR से 5 लाख रोजगार, मालवा बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हबभोपाल, 20 जून। प्रदीप चौधरी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के तहत प्रस्तावित यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) मध्यप्रदेश के विकास का नया इंजन बनने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से इंदौर की विकास यात्रा को आसपास के जिलों, तहसीलों और गांवों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर सहित 6 जिलों की 38 तहसीलें तथा 2781 गांव एकीकृत विकास मॉडल से जुड़ेंगे, जिससे करीब सवा करोड़ लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है। UIMR का क्षेत्रफल बढ़ाकर 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक किया गया है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका तय करेगी। सरकार का उद्देश्य इंदौर के विकास मॉडल को पूरे मालवा क्षेत्र तक विस्तार देना है, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच विकास का संतुलन स्थापित किया जा सके।मालवा क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 13,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि बैंक तैयार किया गया है। इसके साथ ही 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनसे करीब 5 लाख युवाओं को रोजगार मिलने का अनुमान है। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इंजीनियरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एंकर सिटी का दर्जा मिलेगा। रतलाम को लॉजिस्टिक्स और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘60 मिनट एक्सेस’ विजन है। इसके तहत पूरे 16 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किसी भी प्रमुख आर्थिक केंद्र तक एक घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे तथा उज्जैन-इंदौर मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। यह क्षेत्र सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र बनेगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की शुरुआत कर देश के पहले अनूठे लैंड पूलिंग मॉडल को भी आगे बढ़ाया है। इस मॉडल के तहत किसानों को उनकी 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस मिलेगी, जिससे वे विकास प्रक्रिया के प्रत्यक्ष भागीदार बन सकेंगे। देवास, धार, मक्सी और शाजापुर को भी ग्रोथ नोड्स के रूप में विकसित कर क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट नीति लागू की जाएगी। इसके तहत जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के आसपास नियंत्रित विकास होगा, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली और अक्षय ऊर्जा आधारित कार्बन न्यूट्रल मॉडल अपनाए जाएंगे।सरकार ने वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत योगदान सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।इसके साथ ही ‘मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के माध्यम से वैज्ञानिक और डेटा आधारित शहरी नियोजन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी अगले 20 से 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बुनियादी ढांचे की अग्रिम योजना तैयार करेगी, जिससे भविष्य में अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या से बचा जा सकेगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिंहस्थ-2028 की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, सीएम मोहन यादव और खट्टर ने किया निरीक्षण मध्यप्रदेश को मिली 5657 करोड़ की सौगात, इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क का भूमि-पूजन