(‘ऑल्ट न्यूज’ के लिए अंकिता, शिंजिनी और अंकित की रिपोर्टिंग, अनुवाद : संजय पराते)

पश्चिम बंगाल के राजारहाट न्यू टाउन के बूथ क्रमांक 164 में विधानसभा चुनाव के नतीजों ने स्थानीय निवासियों, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। जब ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने इस निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया और मतदाताओं से बात की, तो उनमें से कई ने नतीजों को बेतुका और असंभव बताया।



सीपीआई (एम)-आईएसएफ गठबंधन के उम्मीदवार सप्तर्षि देब को बूथ क्रमांक 164 से केवल एक वोट मिला। टीएमसी के उम्मीदवार तापस चटर्जी को पांच वोट मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार पीयूष कनोडिया, जिन्होंने यह सीट जीती, उन्हें डाले गए 656 वोटों में से 637 वोट मिले।

बूथ क्रमांक 164 और 165 मुसलमान पारा नामक इलाके में स्थित हैं, जो मुख्य रूप से मुस्लिमबहुल क्षेत्र है। पास के बूथ क्रमांक 165 में, जहां इसी इलाके के और कई मामलों में तो एक ही परिवार के मतदाता वोट डालते हैं, कनोडिया को 32 वोट मिले, जबकि देब को 299 और चटर्जी को 290 वोट मिले। इसके बिल्कुल विपरीत, बूथ संख्या 164 में, जहां 88% मतदाता मुस्लिम हैं, भाजपा को 97% वोट मिले। स्थानीय लोगों ने ‘ऑल्ट न्यूज’ को बताया कि बूथ क्रमांक 164 का परिणाम क्षेत्र की राजनीतिक और जनसांख्यिकीय स्थिति से मेल नहीं खाता।

गिनती के उस अतिरिक्त दौर ने परिणाम को पलट दिया।
न्यू टाउन के नतीजे 5 मई को घोषित किए गए, जो पश्चिम बंगाल के बाकी चुनाव परिणामों के एक दिन बाद था।

इस सीट का परिणाम शुरू से ही विवादों में घिरा है, क्योंकि इस सीट पर पूर्व-सूचित 17 चरणों के बजाय 18 चरणों में मतगणना हुई। निर्वाचन क्षेत्र में 10 सहायक बूथों सहित कुल 330 मतदान केंद्र थे। प्रत्येक मतगणना चरण में 20 ईवीएम की गिनती होनी थी। तदनुसार, उम्मीदवारों को 17 चरणों की मतगणना की उम्मीद थी — 16 चरण, जिनमें प्रत्येक में 20 ईवीएम शामिल थीं और अंतिम चरण में शेष 10 ईवीएम शामिल थीं।

अतिरिक्त गिनती की आवश्यकता क्यों उत्पन्न हुई?

मतगणना के 18 वें चक्र का संबंध मतदान के दिन बूथ क्रमांक 164 पर ईवीएम में दर्ज किए गए 52 अतिरिक्त वोटों से है। वहां ईवीएम में वास्तव में डाले गए वोटों से 52 अधिक वोट प्रदर्शित होने पर, मतदान कर्मचारियों द्वारा लगभग दो घंटे के लिए मतदान रोक दिया गया था।

एक मतदान एजेंट ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि हालांकि ईवीएम में मॉक पोल (मतदान शुरू होने से पहले किया गया पोल) के बाद शून्य वोट दिखाए गए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि मॉक पोल की वीवीपीएटी पर्चियां हटाई गई थीं या नहीं। विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंटों ने संयुक्त रूप से बूथ क्रमांक 164 के लिए वीवीपीएटी गिनती की मांग करते हुए एक लिखित अनुरोध प्रस्तुत किया था। यह 18वां चक्र था।

मतगणना के 17वें चक्र तक भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोडिया, टीएमसी के तापश चटर्जी से पीछे चल रहे थे। बहरहाल, बिल्कुल अंत में बूथ क्रमांक 164 की मतगणना ने नतीजे को पूरी तरह से बदल दिया। 18वें और अंतिम चक्र (बूथ क्रमांक 164 के लिए) में 656 वोट पड़े। इनमें से कनोडिया को 637 वोट, चटर्जी को पांच वोट और देब को एक वोट मिला। फॉर्म-20 में भी यही आंकड़े दर्ज हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो, बूथ क्रमांक 164 के नतीजे ने सीधे-सीधे निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम को निर्धारित किया। 4 मई को रात 11 बजे तक, एक बूथ की गिनती बाकी थी और चटर्जी 316 वोटों से आगे चल रहे थे । 18वें और अंतिम चरण की गिनती के बाद, जिसमें केवल बूथ क्रमांक 164 शामिल था, बढ़त पूरी तरह से पलट गई और कनोडिया ने ठीक 316 वोटों से जीत हासिल की।

‘हमारे वोट कहाँ गए?’

इस असामान्य परिणाम को सबसे पहले ‘स्क्रॉल’ ने 21 मई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में उजागर किया था।

जब ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने मुसलमान पारा का दौरा किया, तो स्थानीय निवासियों ने नतीजों पर हैरानी जताई और अपने-अपने मतदाताओं के बारे में जानकारी दी। इनमें सीपीआई(एम) के पंचायत सदस्य और आईएसएफ के सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे। बूथ क्रमांक 164 के अंतिम परिणाम को देखें, इन सभी ने सामूहिक रूप से भाजपा को वोट दिया था।

“यह बिल्कुल सच नहीं है। फिर हमारे वोट कहाँ गए?” कई निवासियों ने पूछा। स्थानीय लोगों ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के कारण, मूल मतदान केंद्र को दो सहायक बूथों — बूथ क्रमांक 164 और 165 में विभाजित कर दिया गया था। एक ही मोहल्ले के मतदाताओं को बिना किसी स्पष्ट क्रम के दोनों बूथों में वितरित कर दिया गया था। कई मामलों में, एक ही परिवार के सदस्यों को भी अलग-अलग बूथों में बैठा दिया गया था।

एक निवासी, रुखसाना बेगम ने बताया कि उन्होंने बूथ क्रमांक 165 पर वोट डाला, जबकि उनके 25 वर्षीय बेटे साहिनुर ने बूथ क्रमांक 164 पर वोट डाला। ‘ऑल्ट न्यूज़’ को अपने दौरे के दौरान ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले।

“हमें समझ नहीं आ रहा कि भाजपा को हमारे बूथ से इतने वोट कैसे मिले। कुछ गड़बड़ तो जरूर है,” एक निवासी ने कहा। जगदीशपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले और बूथ क्रमांक 164 और 165 को कवर करने वाले सीपीआई (एम) के दो बार निर्वाचित पंचायत सदस्य अहमद अली मंडल ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार के आठ सदस्यों ने बूथ 164 पर सीपीआई (एम)-आईएसएफ गठबंधन के पक्ष में मतदान किया था।

“मेरे परिवार के सभी सदस्यों और मैंने बूथ क्रमांक 164 से गठबंधन के उम्मीदवार को वोट दिया। लेकिन नतीजों में बूथ से सिर्फ एक ही वोट दिखाया गया है। हमारे वोट कहाँ गए?” मंडल ने पूछा।

एक अन्य स्थानीय सीपीआई (एम) समर्थक, अशरफ अली ने कहा कि परिणाम तर्क से परे हैं, खासकर एक ही इलाके के निवासियों से आबाद दो सटे हुए बूथों के बीच स्पष्ट अंतर को देखते हुए। आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए अली ने कहा, “बूथ क्रमांक 165 में सीपीआई (एम) नौ वोटों से आगे थी, जबकि बूथ क्रमांक 164 में पार्टी को केवल एक वोट मिला। मुझे समझ नहीं आ रहा कि इतना बड़ा अंतर कैसे संभव है।” अली ने आगे बताया कि उन्होंने बूथ क्रमांक 165 पर वोट डाला, जबकि उनकी पत्नी ने बूथ नंबर 164 पर वोट डाला। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें यकीन है कि उनकी पत्नी ने सीपीआई (एम) उम्मीदवार को वोट दिया था, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल। हम सीपीआई (एम) समर्थक हैं।”

“ये सारे वोट कहाँ गए?” उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया। अली ने आगे तर्क दिया कि यदि सीपीआई(एम)-आईएसएफ गठबंधन बूथ क्रमांक 165 में बढ़त हासिल कर सकता है, तो बूथ क्रमांक 164 में भी गठबंधन के लिए पर्याप्त समर्थन दिखना चाहिए था। उन्होंने दावा किया, “यहां भाजपा के जीतने की कोई संभावना नहीं थी। असली मुकाबला हमेशा से सीपीआई (एम) और टीएमसी के बीच रहा है।”

इसी तरह की चिंताओं को दोहराते हुए, स्थानीय निवासी और आईएसएफ नेता अख्तर अली मोल्ला ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार के कम से कम आठ सदस्यों के साथ बूथ क्रमांक 164 से सीपीआई (एम)-आईएसएफ गठबंधन के उम्मीदवार को वोट दिया था।

“इस बूथ से उम्मीदवार को सिर्फ एक वोट कैसे मिल सकता है?” मोल्ला ने पूछा। “सिर्फ मैं और मेरा आठ लोगों का परिवार ही नहीं, इस इलाके में और हमारे बूथ पर भी कई पार्टी कार्यकर्ता मौजूद हैं। हमारे सारे वोट कहाँ गए?”

स्थानीय निवासी और बूथ क्रमांक 164 के मतदान एजेंट रमजान अली ने कहा कि उन्होंने, उनकी पत्नी और उनकी दो बेटियों ने बूथ पर मतदान किया था। अली ने कहा, “मैंने व्यक्तिगत रूप से बूथ क्रमांक 164 पर सीपीआई (एम) को वोट दिया, और मेरे परिवार के सदस्यों ने भी ऐसा ही किया।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि भाजपा उस बूथ से इतना जबरदस्त समर्थन हासिल कर सकती थी, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं लगता कि भाजपा उस बूथ से इतने अधिक वोट जुटा सकती थी।”

टीएमसी के बूथ अध्यक्ष मोक्षेद मंडल ने कहा कि वह परिणाम की व्याख्या नहीं कर सकते और उन्होंने इसे “चौंकाने वाला” और “अविश्वसनीय” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे ठीक से नहीं पता कि क्या हुआ। नतीजे वाकई चौंकाने वाले हैं।” मंडल ने बताया कि उनके परिवार के सात सदस्य मतदान के योग्य थे। उनमें से केवल एक को बूथ क्रमांक 164 आबंटित  किया गया था, जबकि अन्य ने बूथ क्रमांक 165 पर मतदान किया। उन्होंने दावा किया कि सभी सातों ने टीएमसी को वोट दिया था। मंडल ने व्यक्तिगत मतदान व्यवहार के संबंध में निश्चितता की सीमाओं को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “हम कभी भी यह पूरी तरह से नहीं जान सकते कि लोग क्या सोच रहे हैं। उनमें से कुछ ने शायद एक पार्टी को वोट दिया हो और दावा किसी और पार्टी का किया हो। फिर भी, बूथ क्रमांक 164 का परिणाम हास्यास्पद है।”

ऑल्ट न्यूज़ ने इस इलाके में स्थित भाजपा पार्टी कार्यालय का दौरा किया और पूछा कि मुस्लिम बहुल बूथ में पार्टी को 98% वोट कैसे मिले? भाजपा का कहना है, “लोगों ने हमें वोट दिया। नतीजे खुद ही सब कुछ बयां करते हैं।”

भाजपा कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि इन सवालों का जवाब सिर्फ विधायक ही दे सकते हैं। उनमें से एक, शुभो नास्कर ने कहा, “आप यह क्यों नहीं देखते कि टीएमसी ने 2021 में यह सीट कैसे जीती?” हालांकि नास्कर ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया, लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने यह संकेत दिया कि टीएमसी ने पिछले चुनाव में हेरफेर के जरिए इस निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की थी।

‘ऑल्ट न्यूज़’ ने विधायक पीयूष कनोडिया से फोन पर बात की। हमने उनसे पूछा कि मुस्लिम बहुल बूथ पर भाजपा को भारी बहुमत मिलने के बारे में उनका क्या विचार है। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में क्या सोचना चाहिए? लोगों ने हमें वोट दिया है। हम ऐसा नहीं कह रहे हैं। नतीजे खुद ही सब कुछ बता रहे हैं।”

ऑल्ट न्यूज़ ने इलाके में भाजपा के चुनाव प्रचार की गतिविधियों के बारे में भी निवासियों से पूछा। निवासियों ने बताया कि उन्होंने भाजपा का कोई खास चुनाव प्रचार नहीं देखा। उनके अनुसार, भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने चुनाव से पहले या जीतने के बाद भी इलाके का दौरा नहीं किया। मोल्लाह, अली और मंडल ने इस बात की पुष्टि की।

‘पूरी मतगणना प्रक्रिया अस्पष्ट थी’

‘ऑल्ट न्यूज’ से बात करते हुए, सीपीआई (एम)-आईएसएफ के उम्मीदवार सप्तर्षि देब ने मतगणना प्रक्रिया से संबंधित घटनाओं का क्रम बताया।

बिधाननगर, न्यू टाउन-गोपालपुर और न्यू टाउन-राजरहाट – इन तीन निर्वाचन क्षेत्रों के वोटों की गिनती एक ही केंद्र पर की गई।

“शुरुआत में सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था। मैंने देखा कि 17 दौर के बाद तापस चटर्जी आगे चल रहे थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उनके अलावा कोई और कभी आगे नहीं था। शुरुआत में उनकी बढ़त काफी बड़ी थी, फिर धीरे-धीरे कम होती गई। लेकिन यह कभी पूरी तरह से उलट नहीं ग़ई,” देब ने कहा।

उनके अनुसार, एक समय मतगणना केंद्र के अंदर यह खबर फैल गई कि टीएमसी सरकार गिर सकती है, जिससे तृणमूल के मतगणना एजेंट हतोत्साहित हो गए। बताया जाता है कि उनमें से कई लोग केंद्र छोड़कर चले गए, और रिटर्निंग ऑफिसर की मेज पर केवल उम्मीदवार और कुछ वरिष्ठ नेता ही बैठे रह गए।

देब ने बताया कि इसके बाद हंगामा मच गया और अंततः भाजपा और टीएमसी दोनों के उम्मीदवारों को मतगणना केंद्र छोड़कर लॉबी में इंतजार करने के लिए कहा गया। बाद में उन्हें वापस अंदर आने की अनुमति दी गई। देब 4 मई को रात करीब 11 बजे मतगणना केंद्र से रवाना हुए। लगभग 12:30 बजे, चुनाव आयोग की वेबसाइट देखने के बाद, उन्हें पता चला कि मतगणना के चक्रों की संख्या 17 से बढ़कर 18 हो गई है। फिर भी, उनके अनुसार, टीएमसी उम्मीदवार आगे चल रहे थे।

“अगली सुबह मुझे बीडीओ के कार्यालय से फोन आया कि दोबारा गिनती हो रही है। मैं गया, लेकिन अंदर नहीं जा सका।” जब हमने उनसे वजह पूछी, तो उन्होंने कहा, “दूसरे दिन अधिकारी किसी को भी अंदर नहीं जाने दे रहे थे… मुझे यकीन है कि भाजपा उम्मीदवार अंदर थे… उनकी कार बाहर खड़ी थी, और बाद में हमने उन्हें मतगणना केंद्र से जीत का प्रमाण पत्र लेकर बाहर आते हुए वीडियो में देखा। तृणमूल उम्मीदवार वहां मौजूद नहीं थे।”

जब हमने उनसे पुनर्गणना प्रक्रिया के बारे में विस्तार से पूछा, तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता। मुझे, एक उम्मीदवार के तौर पर, या मेरे प्रतिनिधियों को कोई सूचना नहीं दी गई। हमें इसके बारे में सुबह-सुबह फोन पर पता चला। मैं पिछली रात 11 बजे निकला था। अगर पुनर्गणना का फैसला रात 2 बजे भी लिया गया होता, तो सभी उम्मीदवारों को सूचित किया जाना चाहिए था। उम्मीदवारों को अपने मतगणना प्रतिनिधियों को बताना चाहिए था… मुझे अपने सभी 50 मतगणना प्रतिनिधियों को साथ लाना चाहिए था… यह सब इतनी गुपचुप तरीके से क्यों हुआ?”

“पुनर्गणना का अनुरोध किसने किया? भाजपा कह रही है कि टीएमसी ने अनुरोध किया, और टीएमसी कह रही है कि भाजपा ने अनुरोध किया।” जब उनसे पूछा गया कि कितने चक्र की पुनर्गणना हुई, तो देब ने बताया, “मुझे लगता है कि उन्होंने अंतिम 2-3 चक्र की गिनती करने का फैसला किया था। मुझे पक्का पता नहीं है। लेकिन मेरे सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार अंतिम तीन दौर (15वें, 16वें और 17वें) की पुनर्गणना होगी।”

“मुझे इस बात से भी परेशानी है कि उम्मीदवारों को अपना फॉर्म 20 दो दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए था, लेकिन हमें नहीं मिला,” देब ने कहा। “जब मैंने दो दिन बाद फोन किया, तो मुझे बताया गया, ‘हमें इसे वितरित करने के लिए अभी तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं।'”

डीवाईएफआई के जिला सचिव के रूप में, देब ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों को पहले ही उनके फॉर्म 20 दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं। बार-बार कहने पर, रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें दो-तीन दिन और इंतजार करने को कहा। देब के अनुसार, परिणाम आने के लगभग दो सप्ताह बाद दस्तावेज़ उपलब्ध कराया गया।

बूथ क्रमांक 164 के बारे में विशेष रूप से बात करते हुए देब ने कहा, “मैं आपको यह नहीं बता सकता कि यहां किस तरह की हेराफेरी हुई। लेकिन यह एक ऐसा बूथ है, जहां पंचायत चुनावों में भी हम आगे थे। जनसांख्यिकीय दृष्टि से भी, ऐसा लगता नहीं है कि यहां भाजपा को भारी बहुमत मिलेगा।”

बंगाल के पूर्व मंत्री और सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता गौतम देब के बेटे ने कहा कि कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रह गए हैं और ये सवाल इस निर्वाचन क्षेत्र के असामान्य परिणाम को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

सबसे पहले, पुनर्गणना की मांग किसने की, कितने चक्र की पुनर्गणना हुई, और कोई आधिकारिक दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया? दूसरा, एक ऐसे बूथ में, जो अल्पसंख्यक बहुल हैं, भाजपा ने इतने भारी बहुमत से वोट कैसे हासिल किए? और तीसरा, इस निर्वाचन क्षेत्र के लिए फॉर्म 20 इतनी देर से क्यों उपलब्ध कराया गया?

जब हमने सप्तर्षि देब से पूछा कि क्या उनकी पार्टी चुनाव परिणाम को चुनौती देगी, तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि कुछ किया जा सकता है या नहीं। हम देख रहे हैं कि टीएमसी क्या करती है… अगर ये पंचायत चुनाव होते, तो मैं इसे न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर तक ले जाता। लेकिन चूंकि ये विधानसभा चुनाव हैं, जहां मेरा वोट शेयर इतना अधिक नहीं है… मैं मीडियाकर्मियों से बात करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाए…”।

जब हमने कनोडिया से कहा कि उनके राजनीतिक विरोधी मतगणना में हेराफेरी का आरोप लगा रहे हैं, तो भाजपा विधायक ने कहा कि वे “भ्रम की दुनिया में जी रहे हैं”। उन्होंने देब के इस आरोप का भी स्पष्ट खंडन किया कि 5 मई को हुई पुनर्गणना के दौरान केवल कनोडिया को ही मतगणना केंद्र के अंदर जाने की अनुमति दी गई थी।

‘ऑल्ट न्यूज़’ ने भारत निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर राजारहाट न्यू टाउन निर्वाचन क्षेत्र में हुई मतगणना का विवरण मांगा है और स्थानीय लोगों तथा सीपीआई(एम) उम्मीदवार द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब देने का अनुरोध किया है। लेकिन, उनकी ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

*टिप्पणी* : यह उल्लेखनीय है कि उक्त इलाका, अर्थात् राजारहाट विधानसभा क्षेत्र का मुसलमान पारा, पिछले विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक रूप से भाजपा के विरुद्ध मतदान करता रहा है। 2016 में, यह राजारहाट न्यू टाउन (115) एसी का बूथ क्रमांक 138 था। मतदान केंद्र वही था —  जगदीशपुर एफपी स्कूल। 2016 के विधानसभा चुनावों में इस बूथ पर सीपीआई(एम), भाजपा और टीएमसी के वोटों का कुल योग इस प्रकार था : सीपीआई (एम) के नरेंद्र नाथ चटर्जी : 499 ; बीजेपी के नुपुर घोष : 35 ; टीएमसी के सब्यसाची घोष : 507.

2021 में, इस इलाके को एक बार फिर दो बूथों में विभाजित किया गया — क्रमांक 148 और 148-ए। दोनों बूथों के लिए मतदान केंद्र जगदीशपुर एफपी स्कूल का कमरा नंबर 2 था। बूथ क्रमांक 148 में तीनों पार्टियों को इस प्रकार वोट मिले थे :
सीपीआई (एम) के सप्तर्षि देब : 373 ; टीएमसी के तापश चटर्जी : 221 ; बीजेपी के भास्कर रॉय : 15.

बूथ 148-ए में मिले वोट इस प्रकार थे : सीपीआई (एम) के सप्तर्षि देब : 353 ; टीएमसी के तापश चटर्जी : 264 ; और
बीजेपी के भास्कर रॉय : 30.

(अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

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