जनवादी लेखक संघ, छत्तीसगढ़ शानी के जन्मदिवस पर जलेसं का भव्य कार्यक्रम : पोस्टर प्रदर्शनी, कथा-उपन्यास विमर्श और काव्य पाठ से सजा साहित्यिक माहौल, दो किताबों का विमोचन भीरायपुर। “देश के यशस्वी लेखकों-कवियों जैसे राजेंद्र यादव, असगर वजाहत के साथ शानी जी की तस्वीरें एक तरह से इतिहास को जीवित कर देती हैं। छत्तीसगढ़ से शानी जी ने कथा लेखन में राष्ट्रीय फलक पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।” यह विचार प्रसिद्ध कथाकार कैलाश बनवासी ने शानी के रचनाकर्म पर केंद्रित एक व्याख्यान में रखा। छत्तीसगढ़ के प्रमुख कथाकारों की सूची सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि 1954-55 में मुक्तिबोध राजनांदगांव में रहकर रचना कर्म कर रहे थे और श्रीकांत वर्मा, शानी, प्रभात त्रिपाठी, विनोद कुमार शुक्ला सहित अनेक लेखकों के लेखन को प्रभावित कर रहे थे। 16 मई को साहित्यकार जनाब गुलशेर खां ‘शानी’ का जन्मदिन था। इस अवसर पर जनवादी लेखक संघ (जलेस), छत्तीसगढ़ तथा शानी फाउंडेशन द्वारा पोस्टर प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ के कथा-उपन्यास पर विमर्श तथा काव्यपाठ का कार्यक्रम रायपुर में आयोजित किया गया संपन्न हुआ। प्रदेश भर के रचनाकारों ने इस आयोजन में शिरकत किया।कार्यक्रम का उदघाटन वरिष्ठ कथाकार एवं जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर पांडे ने किया। उन्होंने कहा, “जब देश में पहुंच मार्ग की दृष्टि से बस्तर एक दूरस्थ एवं विषम स्थान माना जाता था, तब शानी वहां बैठकर न केवल आदिवासी जनजीवन को सूक्ष्मता से देख रहे थे, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समाज के जीवन-संघर्ष को अपनी रचनाओं में उकेर रहे थे। उनकी कृतियाँ ‘कस्तूरी’ और ‘कालाजल’ जैसी रचनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की।” उन्होंने 1हिंदी गद्य की छत्तीसगढ़ी परंपरा, सत्यदेव दुबे, हबीब तनवीर, मुक्तिबोध के ‘विपात्र’ तथा लोचनप्रसाद पाण्डेय के लेखन पर विस्तार से चर्चा की।इस अवसर पर जलेस प्रदेश सचिव पी.सी. रथ ने शानी के योगदान को याद किया और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लेखन परंपरा का जिक्र किया। इस सत्र के अंत में जलेस राज्य उपाध्यक्ष नंदन ने आभार व्यक्त किया।दूसरे सत्र में काव्यपाठ का आयोजन किया गया। नंदकुमार कंसारी ने “फूल कांस की थाली”, निकष परमार ने “उन्होंने मैना को बचाने उसे पिंजड़े में कैद कर लिया” एवं “बस्तर से लौट कर” जैसी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। राजकुमार सोनी, देवेंद्र गोस्वामी, भागीरथ प्रसाद वर्मा, पी.सी. रथ तथा मुमताज ने भी अपनी कविताएं सुनाईं। इस सत्र का संचालन भास्कर चौधरी ने किया। आयोजन में रूपेंद्र राज, शेखर नाग, संजय शाम, संजय पराते सहित अन्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम में कांकेर के वरिष्ठ कवि इस्माईल जगदलपुरी के काव्य संग्रह “बंद गली की टूटती सांसों की आखिरी ग़ज़लें” तथा कामेश्वर पांडे के लघु उपन्यास “लीलागर” का विमोचन किया गया।आयोजन में पारित एक प्रस्ताव कर देश में मजदूरों के न्यूनतम वेतन और 8 घंटे काम के अधिकार के आंदोलन पर सरकार द्वारा दमन की तीखी निंदा की निंदा की गई तथा लखनऊ के बुद्धिजीवी व पत्रकार सत्यम वर्मा की रिहाई की मांग की। यह प्रस्ताव जलेस प्रदेश उपाध्यक्ष भास्कर चौधरी ने रखा।पी सी रथसचिव, जनवादी लेखक संघ, छत्तीसगढ़ Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भारत को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही हैं मोदी सरकार की नीतियां राजनैतिक व्यंग्य-समागम