कमिश्नर को नही करनी चाहिए एक्नॉलेज बल्कि भगा देना चाहिए जनपद और जिला पंचायत में पदस्थ सभी कर्मचारी जाति की खुली एवं पैसे की राजनीति व पैसे की करते है लूट। इतनी हिम्मत की संविदा कर्मी नियुक्तिकर्ता (कलेक्टर) का करने लगे विरोध। बिना जिला सीईओ के सहमति से कर्मचारियों की नही हो सकती हिम्मत- आरोप रीवा। रीवा कलेक्टर के द्वारा जल संवर्धन योजना सहित अन्य योजना की ली गयी समीक्षा बैठक के दौरान जिले के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियो के कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाते हुए कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस, एक माह का वेतन रोकने सहित कई वर्षों से कागजों में संचालित पेंडिंग पड़े जनहित के कार्यो को पूरा करने के लिए आदेशित किया गया था जो उन्हें नागवार गुजरी क्योंकि अभी तक किसी कलेक्टर ने जनहित के योजनाओं में कोई ध्यान नही दिए थे जिससे घबराए कर्मचारियों ने कलेक्टर रीवा का विरोध करते हुए जुलूस निकाल कर सम्भायुक्त को ज्ञापन दिया गया। इसी बीच जिले की जागरूक जनता सहित पत्रकार,समाजसेवियों और सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने खुलकर कलेक्टर रीवा के समर्थन में सामने आ गए है । विधायक अभय मिश्रा ने पंचायत अमले और कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन की सख्ती से घबराकर नियुक्ति कर्ता के विरोध में कर्मचारी धरना प्रदर्शन और दबाव की राजनीति कर रहे हैं। विधायक अभय मिश्रा ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि कलेक्टर साहब चिंता मत करिए, मेरे पास सबके भ्रष्टाचार की फाइलें हैं मैं जिला पंचायत अध्यक्ष रहा हूं, कौन क्या करता था, सब जानता हूं जरूरत पड़ी तो सारी फाइलें सार्वजनिक कर दूंगा। उनके इस बयान के बाद जिले की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कई वर्षों से एक ही जगह कुंडली मार कर बैठे संविदा भर्ती में पदस्थ कर्मचारी भ्रष्टाचार, लापरवाही और मनमानी का खेल खेल रहे है। अब जब प्रशासन जवाबदेही तय कर रहा है और योजनाओं के क्रियान्वयन में सख्ती दिखाई जा रही है, तब कुछ अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। जो जुलूस जिला पंचायत से निकला है उसमें जिला पंचायत सीईओ महताब सिंह गुर्जर की मिलीभगत है वर्ना बिना जिला सीईओ के सहमति से कर्मचारियों की हिम्मत नही हो सकती है ऐसा उन्होंने आरोप लगाया है। उन्होंने रीवा संभाग संभागुक्त पर भी भड़ास निकालते हुए कहा कि मुझे दुःख हो रहा है कमिश्नर साहब इतने मैच्योर,भले, समझदार अधिकारी है उन्हें तो एक्नॉलेज नही करनी चाहिए बल्कि भगा देना चाहिए। विधायक ने कहा कि जनता विकास कार्य चाहती है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक अनुशासन और सख्ती आवश्यक है। श्री मिश्रा ने कहा कि जो लोग वर्षों तक व्यवस्था को अपने हिसाब से चलाते रहे, उन्हें अब परेशानी हो रही है। लेकिन रीवा में अब लापरवाही और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जिले में कई योजनाओं जैसे खेत, तालाब, मान सरोवर, वृक्षारोपण, 15वे वृत योजना सहित मनरेगा में लंबे समय से गड़बड़ियां होती रही हैं और अनेक शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि कोई कलेक्टर ईमानदारी से काम कर रहा है और व्यवस्था सुधारने के लिए दबाव बना रहा है, तो उसका विरोध नहीं बल्कि समर्थन होना चाहिए। कर्मचारियों ने रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर पर अभद्र व्यवहार और मानसिक दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक सख्ती के समर्थन में अब सामाजिक संगठनों, आम लोगों और राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठने लगी है। इधर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी लगातार एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं। विभिन्न विभागों के औचक निरीक्षण, मंडी और छात्रावासों की व्यवस्थाओं की समीक्षा तथा शासकीय कार्यालयों में अनुशासन लागू कराने की कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर समर्थन अभियान तेज होता जा रहा है जिले में जारी इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन बनाम कर्मचारी संगठन की लड़ाई को अब खुली राजनीतिक बहस में बदल दिया है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन तीन दिन के युद्धविराम पर बनी सहमति, कैदियों की अदला-बदली भी होगी: ट्रंप ममता बनर्जी ने बदला सोशल मीडिया बायो, छिड़ी सियासी चर्चा
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