केरल हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसले में एक महिला को उसके ब्रेन-डेड (दिमागी मौत) घोषित पति के स्पर्म (गैमीट्स) को निकालकर क्रायोप्रिजर्व (फ्रीज) करने की अंतरिम अनुमति प्रदान की है। यह फैसला भविष्य में असिस्टेड रिप्रोडक्शन (सहायता प्राप्त प्रजनन) के माध्यम से बच्चा पैदा करने की संभावना को बनाए रखने के लिए दिया गया है।मामले के अनुसार, महिला के पति को चिकनपॉक्स के बाद एक्सटेंसिव सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस हुआ, जिसके कारण उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया और वे वेंटिलेटर पर जीवनरक्षक उपकरणों के सहारे रखे गए हैं। पत्नी ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि पति की मौजूदा स्थिति में Assisted Reproductive Technology (ART) एक्ट के तहत आवश्यक लिखित सहमति नहीं ली जा सकती, और देरी से स्पर्म की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है या प्रक्रिया असंभव हो सकती है।जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की एकल पीठ ने कोझिकोड के बेबी मेमोरियल हॉस्पिटल को निर्देश दिया कि वह किसी मान्यता प्राप्त ART क्लिनिक की मदद से पति के गैमीट्स निकालकर उन्हें सुरक्षित रखे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पर्म निकालने और सुरक्षित रखने के अलावा ART एक्ट के तहत कोई अन्य प्रक्रिया (जैसे उपयोग या गर्भाधान) बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं की जा सकेगी।यह फैसला पुरुषों के प्रजनन अधिकारों, सहमति और पोस्टमॉर्टम/पोस्ट-ब्रेन डेथ प्रजनन जैसे जटिल मुद्दों पर बहस छेड़ सकता है, क्योंकि यहां पति की स्पष्ट सहमति नहीं थी, लेकिन कोर्ट ने महिला की स्थिति और समय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत दी। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन साम्राज्यवादी अमेरिका का डर्टी गेम कानपुर में 11 साल की मासूम बच्ची से रेप के बाद क्रूर हत्या, खेत में दफन मिली न्यूड लाश