सत्य रानी चड्ढा: एक माँ जिसने दुख को आंदोलन में बदला, कानूनों में बदलाव लाया नई दिल्ली: 1979 का वह काला दिन… दिल्ली की एक साधारण माँ सत्य रानी चड्ढा की 20 वर्षीय बेटी शशि बाला (कंचनबाला), जो छह महीने की गर्भवती थी, ससुराल में जिंदा जला दी गई। कारण? महज एक स्कूटर की दहेज की मांग, जो पूरी नहीं हो सकी। पुलिस ने इसे ‘रसोई हादसा’ कहकर टाल दिया, अदालतों ने शुरुआत में केस खारिज कर दिया। लेकिन सत्य रानी ने हार नहीं मानी। उस दर्द को उन्होंने आंसुओं में नहीं, बल्कि एक लंबी लड़ाई में बदल दिया। 34 साल तक उन्होंने अदालतों के चक्कर काटे, दिल्ली की सड़कों पर मार्च किया, संसद के बाहर धरना दिया और शाहजहां आपा के साथ मिलकर 1987 में शक्ति शालिनी नामक संगठन की स्थापना की। उनका संघर्ष सिर्फ अपनी बेटी के लिए नहीं था—यह हजारों बेटियों की जिंदगी बचाने की लड़ाई थी। उनकी मेहनत रंग लाई। 1980 के दशक में दहेज विरोधी आंदोलन की वजह से भारतीय दंड संहिता में महत्वपूर्ण बदलाव आए: धारा 498A: दहेज उत्पीड़न और क्रूरता को अपराध बनाया गया। धारा 304B: दहेज मौत को अलग अपराध घोषित किया गया, जिसमें सजा का प्रावधान और सबूत का बोझ आरोपी पर डाला गया। दहेज प्रतिषेध अधिनियम को मजबूत किया गया। 2013 में, 34 साल बाद, आखिरकार उनके दामाद सुभाष चंद्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया। हालांकि, पूर्ण न्याय नहीं मिला—सजा से पहले आरोपी फरार हो गया, और बाकी परिवारवालों को सजा नहीं हुई। सत्य रानी को अपनी बेटी के लिए व्यक्तिगत न्याय नहीं मिला, लेकिन उनकी लड़ाई ने समाज और कानून की किताबों में नए अध्याय जोड़े। सत्य रानी चड्ढा (1933-2014) को नीरजा भनोट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज भी हर साल भारत में हजारों दहेज मौतें दर्ज होती हैं। कानून बदल गए, लेकिन सोच? क्या हमारी सोच बदली है? सत्य रानी चड्ढा की कहानी हमें याद दिलाती है—एक माँ का साहस कितना ताकतवर हो सकता है। दहेज की इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। यह सिर्फ कानून की नहीं, हमारी मानसिकता की लड़ाई है। View this post on Instagram View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच बांग्लादेश को राहत: भारत देगा 45,000 टन डीजल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के बाद इंदौर में मालवा प्रांत संघचालक की प्रेस वार्ता