रायपुर। वर्तमान परिदृश्य में लेखकों, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों के रचनात्मक हस्तक्षेप के साथ उनके सामाजिक-राजनैतिक हस्तक्षेप को पुख्ता करते हुए सांप्रदायिक फासीवाद से लड़ने के आह्वान के साथ छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ का चौथा राज्य सम्मेलन 7 फरवरी को रायपुर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में प्रसिद्ध कहानीकार कामेश्वर पांडेय (कोरबा) अध्यक्ष, लेखक-पत्रकार पूर्णचंद्र रथ (रायपुर) राज्य सचिव तथा शायर मुमताज (भिलाई) कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए। सम्मेलन में 17 जिलों से आए साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में जलेस के राष्ट्रीय महासचिव नलिन रंजन सिंह भी उपस्थित थे, जिन्होंने सम्मेलन के प्रथम सत्र के उदघाटन खंड में अपने विचारोत्तेजक वक्तव्य दिया । उन्होंने इस देश में जनवाद की रक्षा के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए संस्कृतिकर्मियों की व्यापक एकता का निर्माण करने के स्वर को निर्धारित कर दिया था। अपने वक्तव्य में उन्होंने वर्तमान समय में संविधान में निहित जनवादी मूल्यों और देश भर में प्रगतिशील संस्कृतिकर्मियों पर हो रहे हमलों की तीखी आलोचना करते हुए भाजपा की दक्षिणपंथी सांस्कृतिक नीतियों और फासीवादी विचारधारा पर तीखा हमला बोला और बताया कि किस तरह सत्ता में होने का फायदा उठाते हुए आरएसएस इस देश की साझी संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष-जनवादी मूल्यों को तोड़-मरोड़ रही है, इतिहास का विकृतिकरण कर रही है । वैज्ञानिक चेतना को कुंद कर रही है, ताकि वे हमारे समाज पर पिछड़ी चेतना और वर्ण व्यवस्था को थोप सके। उन्होंने कहा कि आरएसएस ज्ञान परंपरा के नाम पर वेदों और पुराणों की क़बीलाई संस्कृति की पोषक है, जबकि हम कबीर, प्रेमचंद, राहुल सांकृत्यायन, भगत सिंह, नागार्जुन और मुक्तिबोध की परंपरा के वाहक हैं। नलिन ने प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना सम्मेलन 1936 में प्रेमचंद के दिए अध्यक्षीय भाषण की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और राजनीति के आगे चलने वाली साहित्य की मशाल को जलाए रखने का आह्वान किया।इस सत्र के विमर्श खंड में “कारपोरेट पूंजी, सांप्रदायिक फासीवाद और रचनात्मक प्रतिरोध” विषय पर प्रसिद्ध आलोचक प्रो. जयप्रकाश (राजनांदगांव) तथा कहानीकार कामेश्वर पांडे ने अपना वक्तव्य रखा। दोनों वक्ताओं ने “कारपोरेट पूंजी ,सांप्रदायिक फासीवाद और रचनात्मक प्रतिरोध” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इस देश में हिंदुत्व की राजनीति के साथ कॉर्पोरेट पूंजी के गठबंधन को उजागर किया और कहा कि यह समय ऐसा है कि अब संस्कृतिकर्मियों को अपने रचनात्मक हस्तक्षेप के साथ सड़कों पर उतरना पड़ेगा और कला को केवल मनोरंजन की चारदीवारी से बाहर निकालकर आम जनता के सौंदर्यशास्त्र में बदलना पड़ेगा। संस्कृतिकर्म तभी पूरा होता है, जब कला आम जनता से जुड़ती है और उसकी सांस्कृतिक चेतना को परिष्कृत करती है। इसके साथ ही वह आम जनता से सीखती है और अपनी कला के अभिजात्य स्वरूप को बदलती है। सीखने और बदलने की प्रक्रिया ही रचनात्मक प्रतिरोध का निर्माण करती है। उदघाटन सत्र की शुरूआत सम्मेलन के लिए गठित स्वागत समिति की ओर से अरूणकांत शुक्ला (प्रलेस) और राजकुमार सोनी (जसम) के स्वागत भाषण और जनवादी लेखक संघ के निवर्तमान राज्य अध्यक्ष परदेशी राम वर्मा के अध्यक्षीय भाषण से हुई। सम्मेलन का दूसरा सत्र सांगठनिक सत्र था, जिसमें सचिव पूर्णचंद्र रथ ने सांगठनिक रिपोर्ट तथा कोषाध्यक्ष डॉ सुखनंदन सिंह नंदन ने आय व्यय का ब्यौरा रखा। इस रिपोर्ट पर 10 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और दोनों रिपोर्ट सर्वसम्मति से पारित किए गए। प्रतिनिधियों ने संगठन के विस्तार और उसे मजबूत बनाने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सांस्कृतिक क्षेत्र में घट रही घटनाओं के प्रति बुद्धिजीवी समुदाय की ओर से जनवादी लेखक संघ की भी प्रतिक्रिया समाज में लगातार आनी चाहिए।इसी सत्र में सर्वसम्मति से राज्य समिति का भी चुनाव किया गया, जो इस प्रकार है : अध्यक्ष – कामेश्वर पांडेय, उपाध्यक्ष – डॉ. सुखनंदन सिंह नंदन (रायपुर) और भास्कर चौधरी (कोरबा) एक पद महिला साथी के लिए रिक्त, राज्य सचिव – पूर्णचंद्र रथ, उप सचिव – राकेश बम्बोर्डे (दुर्ग), अजय चंद्रवंशी (कवर्धा), नूतनलाल साहू (गरियाबंद), कोषाध्यक्ष – मुमताज, कार्यकारिणी सदस्य – शेखर नाग, शिज्जू शकूर (रायपुर), समयलाल विवेक, (कवर्धा) तथा सोनिया नायडू (दुर्ग) । ऐसे सभी जिला सचिव तथा अध्यक्ष जो कार्यकारिणी में नहीं हैं राज्य परिषद के सदस्य होंगे।सम्मेलन के दोनों सत्रों में शेखर नाग, वर्षा बाेपचे द्वारा क्रांतिकारी जन गीतों की प्रस्तुति दी गई। दूसरे सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त हबीब तनवीर के नया थियेटर समूह के कलाकार अमर सिंह गंधर्व द्वारा गीतों की शानदार प्रस्तुति की गई।सम्मेलन में शिरकत करने वालों में “ढाई आखर प्रेम का” से निसार अली, वरिष्ठ पत्रकार तथा लेखक दिवाकर मुक्तिबोध, आसिफ इकबाल, रजत कृष्ण, संजय पराते, डॉ आलोक वर्मा, ऋचा रथ, लक्ष्मीनारायण कुंभकार, दिलीप कुमार साहू, डॉ. गणेश कौशिक, एल रुद्रमूर्ति , प्रेम मुंडेजा, भागीरथ प्रकाश वर्मा, वीरेंद्र सरल, नरेंद्र कुमार कुलमित्र, महेश आमदे, दिनेश चौहान, रामेश्वर साहू, साजी, जयदास मानिकपुरी आदि शामिल थे।*कामेश्वर पांडे, अध्यक्ष**पूर्णचंद्र रथ, सचिव**जनवादी लेखक संघ, छत्तीसगढ़* View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन विराट हिंदू सम्मेलन को भव्यता से निकाली आमंत्रण यात्रा एवं बाबा श्रीमनकामेश्वर नाथ का डोला इंदौर में दिल दहला देने वाली वारदात: सुगना देवी मैदान में महिला की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या, आरोपी मुकेश कोरी गिरफ्तार