2023 में 91,000+ नए मामले, रिकवरी रेट 60-65% तक; दिल्ली-एमपी जैसे राज्यों में स्थिर लेकिन चिंताजनक स्थिति, ट्रैफिकिंग और परिवार से भागना मुख्य कारण लेख (News Article):- नई दिल्ली, 8 फरवरी 2026: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज बच्चों के गायब होने को लेकर देशव्यापी दहशत फैला रहे हैं, लेकिन आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि समस्या गंभीर है पर अतिरंजित नहीं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के नवीनतम डेटा के अनुसार, भारत में हर साल 80,000 से 95,000 बच्चे गायब होने की रिपोर्ट दर्ज होती है। भारत में बच्चों के गायब होने (missing children) के मामले एक गंभीर समस्या हैं। आंकड़े मुख्य रूप से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के डेटा पर आधारित हैं। ध्यान दें कि ये रिपोर्टेड मामले हैं—कई मामले दर्ज नहीं होते, और ज्यादातर बच्चे कुछ समय बाद घर लौट आते हैं या मिल जाते हैं। सालाना कितने बच्चे गायब होते हैं (Reported Missing Children):–NCRB के अनुसार, हाल के वर्षों में नए रिपोर्टेड मामलों की संख्या 70,000 से 1 लाख के बीच रहती है। 2021: लगभग 77,535 नए मामले 2022: लगभग 67,553-83,350 मामले (कुछ रिपोर्ट्स में भिन्नता) 2023: 91,296 नए रिपोर्टेड मामले 2024-2025: अनुमानित 90,000-1 लाख प्रति वर्ष (संसद में दिसंबर 2025 के जवाब और हालिया रिपोर्ट्स से) देशभर में औसतन हर दिन 200-250 बच्चे गायब होने की शिकायत आती है, जिनमें 65-75% लड़कियाँ (खासकर 12-18 वर्ष की उम्र) होती हैं। NCRB के अनुसार, 2023 में अपहरण और गायब होने से जुड़े मामलों में 82,106 बच्चे प्रभावित हुए, जिसमें जबरन विवाह, ट्रैफिकिंग और परिवार से भागना प्रमुख कारण हैं। सरकार की सफलता और रिकवरी रेट:सरकार ने ट्रैकचाइल्ड पोर्टल, खोया-पाया ऐप, चाइल्डलाइन (1098), और पुलिस की ZIPNET जैसी व्यवस्थाओं से ट्रेसिंग को मजबूत किया है। रिकवरी/ट्रेस रेट: NCRB और मंत्रालय के डेटा से 60-65% बच्चे उसी साल या कुछ महीनों में मिल जाते हैं या ट्रेस हो जाते हैं। कई राज्यों में यह 70-80% तक पहुँचता है। कुल मिलाकर: 80-90% मामले अंततः सॉल्व हो जाते हैं (कई बच्चे परिवार से झगड़े या प्रेम प्रसंग के कारण भागते हैं और खुद लौट आते हैं)। चुनौतियाँ: 30-40% मामले लंबे समय तक अनट्रेस्ड रह जाते हैं। 2023 में कुल गायब बच्चों में से लगभग 49,000 अनट्रेस्ड थे (पिछले वर्षों के बैकलॉग सहित)। दिल्ली में 2025-2026 में रिकवरी रेट 60-77% तक दिखाई गई, लेकिन इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन में कमी बनी हुई है। राज्यों में स्थिति (NCRB 2019-2023 डेटा से उदाहरण): मध्य प्रदेश: पिछले 5 वर्षों में औसतन 15,000-16,000 मामले सालाना, ज्यादातर ट्रेस। बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र: उच्च संख्या, लेकिन रिकवरी बेहतर हो रही है। दिल्ली: 2026 के पहले महीने में 430 बच्चे गायब रिपोर्टेड, पिछले वर्षों से स्थिर (कोई असामान्य स्पाइक नहीं)। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्टिंग बेहतर होने से संख्या बढ़ रही है, लेकिन वास्तविक अपराध (ट्रैफिकिंग, बाल मजदूरी) में कमी लाने के लिए जागरूकता, CCTV, और तेज़ फॉलो-अप जरूरी है। पुलिस ने अफवाहों से बचने और तुरंत रिपोर्ट करने की अपील की है। सुरक्षा टिप्स: बच्चे को अपना नाम, पता, फोन नंबर और आपात नंबर (112/1098) याद करवाएँ। अकेले बाहर न भेजें, अजनबियों से दूरी सिखाएँ। संदिग्ध पर तुरंत पुलिस या चाइल्डलाइन को सूचित करें। TrackChild या Mission Vatsalya पोर्टल का उपयोग करें। बच्चे की सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामले सॉल्व हो जाते हैं, लेकिन बचे हुए 30-40% पर फोकस बढ़ाना होगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन दिग्विजय सिंह ने पेंच पार्क के पास परासपानी में उठाया जमीन फरोख्त का मुद्दा इंदौर में दिल दहला देने वाली वारदात: सुगना देवी मैदान में महिला की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या, आरोपी मुकेश कोरी गिरफ्तार