भोपाल/: मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह के विवादित बयानों का इतिहास लंबा और बार-बार सुर्खियों में आने वाला रहा है। हाल ही में भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उन्होंने एक बार फिर सार्वजनिक माफी मांगी है, लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लोग पुराने विवादों को याद दिला रहे हैं—खासकर 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह पर दिए गए डबल मीनिंग वाले बयान को, जिसके कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। शाह ने पत्रकारों से बातचीत में कर्नल सोफिया मामले पर कहा, “मेरा किसी भी महिला अधिकारी, भारतीय सेना, या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था…ये शब्द देशभक्ति के जोश, उत्साह और जुनून में कहे गए थे। गलती के पीछे की भावना पर विचार किया जाना चाहिए। मैंने कई बार ईमानदारी से माफी मांगी है, और आज फिर से ऐसा कर रहा हूं। मेरे लिए यह बहुत दुख की बात है कि मेरी एक छोटी सी गलती से इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता बहुत महत्वपूर्ण होती है। मैंने इस घटना पर विचार किया है, इससे सबक सीखा है, और भविष्य में अपने शब्दों को लेकर ज्यादा सावधान रहूंगा। एक बार फिर, मैं सभी नागरिकों, भारतीय सेना और इस मामले से जुड़े सभी लोगों से ईमानदारी से माफी मांगता हूं।”यह माफी ऐसे समय में आई है जब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और राज्य सरकार को अभियोजन की मंजूरी पर फैसला लेने की समय सीमा नजदीक है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में दिए गए बयान ने पूरे देश में विवाद खड़ा किया था। उच्चतम न्यायालय की सख्त टिप्पणियों और संगठन के दबाव के बाद यह चौथी या पांचवीं बार है जब शाह ने माफी मांगी है।लेकिन जनता और विपक्ष का सवाल है—बार-बार माफी से काम कैसे चलेगा? 2013 में झाबुआ जिले में आदिवासी छात्राओं के समर कैंप में दिए भाषण में विजय शाह ने साधना सिंह चौहान के संदर्भ में कहा था, “भैया के साथ तो रोज जाती हो, कभी देवर के साथ भी चलो।” यह टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक मानी गई, विपक्ष ने इसे सेक्सिस्ट और असभ्य बताया। विवाद बढ़ने पर शिवराज सरकार में दबाव बढ़ा और शाह को जनजातीय कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, कुछ महीनों बाद जातिगत समीकरणों को देखते हुए उन्हें दोबारा कैबिनेट में शामिल कर लिया गया था।सोशल मीडिया पर लोग तुलना कर रहे हैं—शिवराज के समय में ऐसी टिप्पणी पर तुरंत इस्तीफा हुआ, लेकिन अब सिर्फ माफी? एक यूजर ने लिखा, “शिवराज जी की पत्नी पर बयान दिया तो कुर्सी गई, कर्नल सोफिया पर बयान के बाद सिर्फ माफी? नफरती मानसिकता साफ दिख रही है। इस्तीफे की जगह माफी मांगना उनकी सोच को दर्शाता है।” विपक्षी दल इस पुराने विवाद को उठाकर वर्तमान सरकार पर निशाना साध रहे हैं।विजय शाह के विवादों की फेहरिस्त लंबी है—बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन को ‘डिनर’ ऑफर देने से लेकर अन्य आपत्तिजनक बयानों तक। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई (9 फरवरी) पर सबकी नजरें टिकी हैं—क्या इस बार कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर माफी का सिलसिला जारी रहेगा? View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन “आर एस एस – काया और माया” : हिन्दुत्व वर्चस्ववाद के अतीत का गंधाता कुआं दिग्विजय सिंह ने पेंच पार्क के पास परासपानी में उठाया जमीन फरोख्त का मुद्दा