MP । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी गांव के लिए खुशियों भरा पैगाम आया है। पाकिस्तान की जेल में 14 साल का लंबा वक्त काटने के बाद प्रसन्नजीत रंगारी 38वर्ष आखिरकार रिहा होकर वतन लौट आया है। शनिवार को अमृतसर पहुंचे प्रसन्नजीत की मंजीठा थाना पुलिस ने उसके परिजनों से वीडियो कॉल पर बात कराई। इस दौरान भाई बहन की बातचीत ने वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम कर दीं। प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा और बहनोई राजेश खोबरागड़े ने उससे बात की। संघमित्रा ने बताया कि वर्षों बाद भी भाई ने उसे तुरंत पहचान लिया। जब बहन ने उससे पूछा कि मैं कौन हूं तो प्रसन्नजीत का जवाब था आप दीदी हो लेकिन आपकी आवाज बदल गई है। संघमित्रा के अनुसार प्रसन्नजीत शारीरिक रूप से स्वस्थ दिख रहा है और उसका दिमागी संतुलन भी ठीक लग रहा है। पुलिसकर्मियों ने तसल्ली के लिए उसे परिजनों के सामने चलाकर भी दिखाया।बातचीत के दौरान जब संघमित्रा ने पूछा कि वह पाकिस्तान कैसे पहुंच गया था तो प्रसन्नजीत ने मासूमियत से जवाब दिया कि उसे नहीं पता वह बस ट्रेन में बैठकर वहां चला गया था। घर वापसी के सवाल पर उसने कहा कि वह ट्रेन से आना चाहता है लेकिन उसके पास टिकट नहीं है। बहन ने ढांढस बंधाते हुए कहा कि उसे लेने के लिए वे जल्द अमृतसर पहुंच रहे हैं।प्रसन्नजीत कभी एक मेधावी छात्र था। उसके पिता लोपचंद रंगारी ने कर्ज लेकर उसे जबलपुर के खालसा कॉलेज से बी-फार्मा करवाया था। साल 2011 में उसने फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन भी कराया लेकिन अचानक उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। साल 2012 में वह अचानक लापता हो गया और भटकते हुए पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गया जहाँ उसे लाहौर की जेल में कैद कर लिया गया। साल 2021 में परिजनों को उसके पाकिस्तान में होने की सूचना मिली। बेटे की राह तकते तकते दो साल पहले उसके पिता का निधन हो गया जिनका अपने बेटे को फिर से देखने का सपना अधूरा रह गया।प्रसन्नजीत की रिहाई की खबर मिलने के बाद परिवार अमृतसर जाने को बेताब था लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आ रही थी। कोई भी रिश्तेदार या ग्रामीण अमृतसर तक साथ जाने को तैयार नहीं था। ऐसे में बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना मसीहा बनकर सामने आए। उन्होंने तत्काल परिवार के अमृतसर जाने की व्यवस्था की ट्रेन की टिकट बुक कराई और ग्राम सचिव को उनके साथ जाने के निर्देश दिए। अब प्रसन्नजीत को घर लाने के लिए यात्रा भोजन और ठहरने का पूरा खर्च जिला प्रशासन उठाएगा। बहन संघमित्रा ने भाई की रिहाई के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई । प्रसन्नजीत 14 साल बाद अपनी जन्मभूमि खैरलांजी की मिट्टी पर कदम रखेगा। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जनपद बागपत के केटी स्टेडियम में चल रही बागपत कबड्डी लीग सीजन टू का हुआ भव्य समापन विस्थापितों को आवंटित आवासीय भूखंडो का पंजीयन नि:शुल्क