स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले से जाते-जाते एक बार फिर प्रशासन पर निशाना साधा और न्याय का इंतजार करने की बात की। मौनी अमावस्या पर जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए संगम की तरफ जा रहे थे तब मेला प्रशासन की तरफ से उन्हें रोका गया था, तब से वह अनशन पर बैठे हुए थे। तभी से यह विवाद जारी था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ‘हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज स्वर बोझिल हैं और शब्द साथ नहीं दे रहे हैं। भारी मन लेकर प्रयाग से लौटना पड़ रहा है। प्रयाग में जो घटित हुआ उसने झकझोर दिया है। आज मन व्यथित है, बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं। न्याय की प्रतीक्षा कभी खत्म नहीं होती।’ कल शाम और आज सुबह प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि जब भी स्नान के लिए जाना चाहेंगे तब ससम्मान आपको पालकी के साथ स्नान करने के लिए ले जाएंगे। प्रस्ताव में कहा गया कि जो भी अधिकारी उस दिन मौजूद थे वही स्वागत में मौजूद रहेंगे। पुष्प वर्षा भी की जाएगी। लेकिन प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे इसलिए प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। View this post on Instagram उन्होंने आगे कहा कि अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकते हैं तब तो ठीक। लेकिन अगर नहीं तो और कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं। बटुकों, सन्यासी और साधुओं के साथ जो व्यवहार हुआ वो मुख्य मुद्दा है। 10 दिन शिविर के बाहर बैठने के बाद जब जाने का निर्णय किया तब प्रस्ताव आया। हम भारी मन से जा रहे हैं। प्रयाग से रवानगी के वक्त शंकराचार्य के स्वर बोझिल थे. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “प्रयाग में जो कुछ घटित हुआ उसने भीतर तक झकझोर दिया है. आज मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही यहां से विदा ले रहे हैं. अन्याय को हमने अस्वीकार कर दिया है और अब केवल न्याय की प्रतीक्षा करेंगे.” Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बड़ी खबर: बारामती में विमान दुर्घटनाग्रस्त, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत चार के निधन की खबर नारकोटिक्स विंग की बड़ी कार्रवाई: 58 ग्राम MD ड्रग्स के साथ राजस्थान का युवक गिरफ्तार