इंदौर, 6 जनवरी 2026 — मध्य प्रदेश की राजधानी इंदौर, जो लगातार वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित होता आ रहा है, अब दूषित पानी के भयावह संकट से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की पेयजल लाइन में सीवर का गंदा पानी मिल जाने से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों बीमार पड़ चुके हैं। इस त्रासदी के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी आज पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे, लेकिन पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें घरों के अंदर जाने से रोका गया। उमंग सिंघार और जीतू पटवारी ने इस घटना को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) का उल्लंघन करार देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “संविधान हर नागरिक को देश में कहीं भी जाने का अधिकार देता है, लेकिन मुख्यमंत्री जी विपक्षी नेताओं को पीड़ितों से मिलने से रोककर संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। क्या अब प्रदेश में तालिबान का राज आ गया है? सरकार सच से इतनी डरी हुई है कि पुलिस बल से लोगों की आवाज दबा रही है।”पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, “सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इन निर्दोष लोगों की जान ली है। 17 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सिर्फ 4 परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। यह कैसी असंवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि हर मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और इंदौर के महापौर पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा चलाया जाए। क्या निर्दोष लोग भाजपा के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे?”यह संकट दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ, जब भागीरथपुरा के निवासियों ने बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की। जांच में पाया गया कि पुलिस चौकी के पास बने सार्वजनिक शौचालय के नीचे मुख्य पाइपलाइन में लीकेज से सीवर का पानी पेयजल में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने बैक्टीरिया से दूषित पानी की पुष्टि की है।सरकार ने अब तक कई अधिकारियों को निलंबित और बर्खास्त किया है, मुआवजे की घोषणा की है, और पानी टैंकरों से सप्लाई शुरू की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की और जांच समिति गठित की है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है और 15 जनवरी को वर्चुअल पेशी का आदेश दिया है।विपक्ष का आरोप है कि शिकायतें महीनों से अनसुनी की जा रही थीं, और यह प्रशासनिक विफलता का सीधा नतीजा है। कांग्रेस ने इसे “भाजपा के कुशासन” का प्रतीक बताया है, जबकि सरकार इसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसा मान रही है।यह घटना इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल उठा रही है और पूरे प्रदेश में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा रही है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर पुलिस जनसुनवाई: आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण, कमिश्नर ने व्यक्तिगत रूप से सुनीं शिकायतें इंदौर दूषित पानी संकट: हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, मौतों के गलत आंकड़े पर सवाल उठाए