इंदौर, 6 जनवरी 2026 — स्वच्छ भारत के प्रतीक बने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की त्रासदी अब न्यायालय तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसी घटना बेहद गंभीर और शहर की छवि को धूमिल करने वाली है।कोर्ट ने 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा पेश स्टेटस रिपोर्ट पर गहरी नाराजगी जताई। रिपोर्ट में केवल 4 मौतों का उल्लेख किया गया था, जबकि विभिन्न स्रोतों, अस्पतालों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 17 लोगों की जान जा चुकी है। अदालत ने इसे “असंवेदनशीलता” करार देते हुए पूछा कि आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों? हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही तत्काल स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, प्रभावितों को मुफ्त एवं उचित इलाज तथा लापरवाही की जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए। कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पानी के अधिकार को मौलिक बताते हुए दूषित स्रोतों से आपूर्ति तुरंत रोकने पर जोर दिया।यह संकट दिसंबर अंत में शुरू हुआ, जब मुख्य पेयजल पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल गया। अब तक सैकड़ों लोग डायरिया, उल्टी और अन्य बीमारियों से ग्रस्त हैं, जबकि कई की हालत गंभीर बनी हुई है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा बताया है, जबकि सरकार ने कुछ अधिकारियों को निलंबित/बर्खास्त कर जांच समिति गठित की है।यह घटना इंदौर की ‘स्वच्छतम शहर’ की प्रतिष्ठा पर गहरा सवाल खड़ा कर रही है और पूरे प्रदेश में जल गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा रही है। पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा में हैं, जबकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी संकट: क्या अब मध्य प्रदेश में तालिबान-सा राज? विपक्ष ने लगाया संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन का आरोप मध्य प्रदेश पुलिस में बड़े पैमाने पर तबादले: 60 से अधिक राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी