करियर की शुरुआती दौर मे ही धर्मेंद्र का पर्यटन नगरी मांडू से रहा गहरा नाता राहुल सेन मांडवमो 9669141814 मांडू न्यूज/फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के समाचार से मांडू की हसीन वादियां भी रो पड़ी। फिल्मी दुनिया के जाने-माने चेहरे धर्मेंद्र का ऐतिहासिक पर्यटक नगरी मांडू से खास लगाव रहा उन्होंने अपनी तीन बड़ी सुपर डुपर फिल्मों की शूटिंग मांडू में की जो उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्में मानी जाती है। बताया जाता है कि हेमा मालिनी से उनकी प्रेम कहानी इसी पर्यटन स्थल से शुरू हुई थी जो एक सफल वैवाहिक जीवन में परिवर्तित हुई। धर्मेंद्र ने मांडू में फिल्म राका साका जीने नहीं दूंगा और किनारा की शूटिंग की। अपने मित्र शत्रुघ्न सिन्हा हमसफर हेमा मालिनी राज बब्बर जितेंद्र कैस्टो मुखर्जी प्राण आदि फिल्मी दुनिया के जाने-माने चेहरों के साथ मांडू में कई रातें धर्मेंद्र ने बिताई और बताया जाता है कि इस दौरान यहां उनके कई मित्र भी बने। 1977 में बनी फिल्म किनारा और उसका गीत नाम गुम जाएगा चेहरा यह बदल जाएगा धर्मेंद्र ने मांडू में ही फिल्माया था इस गाने में धर्मेंद्र हेमा मालिनी और जितेंद्र नजर आए। मांडू के जहाज महल हिंडोला महल रानी रूपमती चंपा बावड़ी के साथ मांडू में खाई किनारे उन्होंने कई फिल्मों की शूटिंग की। स्थानीय लोगों को उन्होंने छोटी-बड़ी फिल्मों में किरदार दिए जिससे फिल्मी दुनिया में वह भी नाम कमा सके।1972 में फिल्म राका साका 1977 में फिल्म किनारा और 1984 में फिल्म जीने ही दूंगा की शूटिंग मांडू में हुई। मांडू के डाक बंगले और तवली महल में लगभग 3 महीने उन्होंने यहां बिताए जो किसी भी फिल्म स्टार के जीवन का एक लंबा और बड़ा अनुभव होता है। मांडू के इतिहास को भी उन्होंने अपनी फिल्मों में समेटा और हेमा मालिनी को फिल्म किनारा के माध्यम से राजा रानी की कहानी सुनाई जो आज भी लोगों के जहां में बसती है। मांडू से ही परवान चढ़ी थी धर्मेंद्र हेमा की प्रेम कहानी 1977 में फिल्म किनारा के फिल्मांकन के दौरान हेमा मालिनी और धर्मेंद्र लगभग तीन महीने मांडू में रुके थे। ऐसा कहा जाता है कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने सन 1979 में मुंबई में शादी की थी। इस प्रेम विवाह के प्रेम की शुरुआत 1977 में मांडू में फिल्माई गई फिल्म किनारा के दौरान नजदीक किया बढ़ाने के बाद हुई थी। इसलिए मांडू दोनों के जीवन में बेहद खास रहाहै। मांडू में पान खाने चौराहे पर रोज पहुंच जाते थे धर्मेंद्र, मक्का की रोटी भी थी बेहद पसंद 1977 में धर्मेंद्र जब मांडू रुके थे तो वह शूटिंग खत्म होने के बाद बिना प्रोटोकॉल के मांडू के चौराहे पर रोज शाम को टहलने आया करते थे। इस दौरान वह पान की दुकान पर पहुंच कर रोज पान भी खाते थे। जहाज महल के आसपास रहने वाले आदिवासी बुजुर्गों का कहना है कि , धर्मेंद्र को यहां की मक्का की रोटी बेहद पसंद आई थी और वह समय-समय पर उनसे मक्का की रोटी बनवा कर भी खाते थे। शूटिंग पूरी करके जब धर्मेंद्र ने मांडू से विदाई ली थी तो वह बेहद भावुक होकर सबसे मिलजुल कर रवाना हुए थे। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बड़नगर में तलवार लहराता घूम रहा कुख्यात अपराधी गिरफ्तार इंदौर: गिरनारी गार्डन के पास एक्टिवा पर सवार तीन युवक खुलेआम बीयर पीते दिखे, पुलिस को दी जा रही सूचना