भोपाल, प्रदीप चौधरी। । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सफाई कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। वेतन कटौती के खिलाफ नगर निगम के हजारों सफाई कर्मचारियों ने काम बंद हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिसका असर पूरे शहर पर दिखने लगा है। कोलार, नेहरू नगर समेत कई इलाकों में कचरा संग्रहण ठप हो गया है, और सड़कों पर कचरे के ढेर लगने से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अगर हड़ताल लंबी चली, तो बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हड़ताल ‘मध्य प्रदेश शासकीय वाहन चालक यांत्रिकी कर्मचारी संघ’ के बैनर तले चल रही है। कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि 30 दिनों की मेहनत के बावजूद उन्हें केवल 15 दिनों का वेतन दिया जा रहा है। संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह कटौती बिना किसी सूचना के की गई है, जिससे कर्मचारियों का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। “हमारी मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी,” एक सफाई कर्मचारी ने कहा। हड़ताल का असर: शहरवासी परेशान कोलार क्षेत्र: यहां कचरा वाहन सड़कों पर खड़े हैं, और घर-घर कचरा इकट्ठा न होने से गलियों में गंदगी फैल रही है। नेहरू नगर चौराहा: वार्ड 27 और 29 के कर्मचारियों ने धरना दिया है, जिससे आसपास के इलाकों में सफाई प्रभावित। समग्र प्रभाव: नगर निगम के करीब 6,000 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों (सफाई मित्र और वाहन चालक सहित) में से सैकड़ों ने हड़ताल में हिस्सा लिया है। शहर के प्रमुख बाजारों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। नागरिकों में रोष है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “सुबह से कचरा नहीं उठा, और निगम का कोई प्रतिनिधि भी नहीं दिखा। यह हड़ताल शहर की सेहत के लिए खतरा है।” निगम का रुख: बातचीत की कोशिश नगर निगम प्रशासन ने हड़ताल को गंभीरता से लिया है। आयुक्त हरेंद्र नारायण ने कहा कि कर्मचारियों से बातचीत चल रही है, और जल्द ही वेतन विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, अभी तक कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला है। पिछले वर्षों में भी इसी तरह के विवादों (जैसे 2020 की दिवाली हड़ताल) में निगम ने 30 दिनों का पूर्ण वेतन देने का आदेश जारी किया था, लेकिन कर्मचारी संगठन पुरानी समस्याओं का हवाला देकर नाराज हैं। : पुरानी समस्या, नया संकट यह पहली बार नहीं है जब भोपाल के सफाई कर्मचारी वेतन को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। जून 2025 में सैलरी देरी पर डोर-टू-डोर कचरा संग्रह ठप हो गया था। इसी तरह, अन्य शहरों जैसे रायपुर और सागर में भी हाल ही में समान हड़तालें हुईं, जहां कर्मचारियों ने बकाया भुगतान की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि निगम के बजट में सफाई विभाग को पर्याप्त फंडिंग न मिलने से ऐसी समस्याएं बार-बार उभरती हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक मांगें (पूर्ण वेतन बहाली और नियमित भुगतान) पूरी न हुईं, तो हड़ताल अनिश्चितकालीन हो सकती है। फिलहाल, शहरवासी सफाई अभियान की उम्मीद में हैं, लेकिन हड़ताल का दबाव निगम पर बढ़ता जा रहा है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार (शेरा) के पैरवी का परिणाम-आत्महत्या करने के लिए मजबूर और प्रताड़ित करने वाले आरोपी को अपर सत्र न्यायालय रीवा द्वारा किया गया दोषमुक्त धमतरी: स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण के खिलाफ माकपा का धरना, बिलों में तीन गुना वृद्धि पर फूटा जनता का गुस्सा