धमतरी, 8 नवंबर 2025भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – CPI(M) ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की कॉरपोरेटपरस्त बिजली नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को धमतरी के गांधी चौक पर माकपा ने स्मार्ट मीटर परियोजना, बिजली क्षेत्र के निजीकरण और बिजली बिलों में भयंकर वृद्धि के विरोध में जोरदार धरना दिया। धरने के बाद आम सभा हुई और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में विद्युत विभाग से ठेकादारी प्रथा खत्म करने और अस्थायी-संदिवा कर्मियों को स्थायी करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 400 यूनिट तक हाफ बिल योजना वापस लेकर उपभोक्ताओं पर कहर बरपाया है। “पहले जहां 200-300 रुपये का बिल आता था, अब 600-900 रुपये तक आ रहा है। स्मार्ट मीटर तकनीकी खराबी के कारण सामान्य मीटरों से दोगुना-तीन गुना खपत दिखा रहे हैं,” माकपा जिला सचिव समीर कुरैशी ने कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जनविरोधी नीतियां नहीं रोकी गईं, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। धरना स्थल पर उमड़ी भीड़, किसान-मजदूरों का रोष मुख्य मांगें: स्मार्ट मीटर हटाओ, प्री-पेड सिस्टम बंद करो, क्रॉस सब्सिडी बहाल करो, बिजली दरें घटाओ। निजीकरण का खतरा: वक्ताओं ने कहा कि अंबानी-टाटा जैसे कॉरपोरेटों को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली क्षेत्र बेचा जा रहा है। इससे गरीब घरों में अंधेरा छा जाएगा, क्योंकि निजी कंपनियां 20-25 रुपये प्रति यूनिट वसूलेंगी। कर्मचारी संकट: विभाग के हजारों ठेका कर्मचारियों की नौकरियां दांव पर लगी हैं। निजी कंपनियां कम मजदूरी पर काम करवाती हैं। धरने को सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स) और छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेताओं ने संबोधित किया। रेमनलाल यादव, सरला शर्मा, अनुसुईया कंडरा, दुर्गेश देवांगन, हरीश परते, अमरीका नागरची और अहिल्या ध्रुव ने सरकार पर हमला बोला। सभा में सैकड़ों कार्यकर्ता, किसान और आम नागरिक शामिल हुए। कई किसानों ने बताया कि खेती के लिए बिजली बिल दोगुना हो गया है, जिससे फसल लागत बढ़ रही है। : बढ़ते बिल, टूटते वादे छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली दरों में 20-30% तक वृद्धि हुई है। स्मार्ट मीटर योजना के तहत लाखों घरों में मीटर लगाए गए, लेकिन शिकायतें आम हैं कि ये मीटर ‘फास्ट रीडिंग’ देते हैं। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निजीकरण से बिजली की गुणवत्ता गिरेगी और उपभोक्ता बोझ बढ़ेगा। माकपा ने ऐलान किया कि यह धरना शुरुआत है। जल्द ही जिला मुख्यालयों पर बड़े आंदोलन होंगे। फिलहाल, धमतरी के उपभोक्ता राहत की आस में हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी से असंतोष बढ़ता जा रहा है। (रिपोर्ट: माकपा प्रेस विज्ञप्ति और धरना स्थल से। संपर्क: समीर कुरैशी, मो. 89669-21340) View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन भोपाल: वेतन कटौती के विरोध में नगर निगम सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, शहर की सफाई व्यवस्था चौपट बिहार चुनाव : बिगड़े सुर, बेसुरी तान, अटपटे बोल, सन्निपात में एनडीए!