प्रदीप चौधरी।। मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज घोटाले और सरकारी लापरवाही ने प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। 2025-26 सत्र में कुल 28,560 सीटों में से केवल 17,735 सीटों पर ही रजिस्ट्रेशन हुए, यानी करीब 50% सीटें खाली रह गईं। यह स्थिति लगातार तीसरे साल दोहराई गई है, जिससे छात्रों का नर्सिंग शिक्षा से मोहभंग साफ झलकता है। कभी नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पहचान रखने वाला मध्यप्रदेश आज भ्रष्टाचार और अविश्वास का गढ़ बन चुका है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने भाजपा सरकार और नर्सिंग काउंसिल की नाकामी को इसका जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 को शून्य सत्र घोषित करना पड़ा था, 2024-25 में 70% सीटें खाली रह गई थीं, और अब 2025-26 सत्र में भी यही शर्मनाक स्थिति बरकरार है। प्रदेश में 21 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में से केवल 8 को ही मान्यता मिली है। वहीं, निजी क्षेत्र में बीएससी नर्सिंग के 196 और जीएनएम नर्सिंग के 247 कॉलेजों को मान्यता प्राप्त है। शासकीय और निजी कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग, जीएनएम नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, और पोस्ट बीएससी नर्सिंग की कुल 28,560 सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन महज 17,735 ही हो सके। यह स्थिति न केवल नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, बल्कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को भी खतरे में डाल रही है। सरकार और नर्सिंग काउंसिल की उदासीनता के चलते मध्यप्रदेश की नर्सिंग शिक्षा संकट के दौर से गुजर रही है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन इंदौर: नगर निगम जोन-19 में EOW की बड़ी कार्रवाई, रिश्वतखोरी में ARO और बिल कलेक्टर रंगे हाथ पकड़े गए झमाझम बारिश के बीच विसर्जित हुई मां दुर्गा, भक्तों में दिखा जोश