देहरादून, 2 अक्टूबर 2025: उत्तराखंड के स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राज्य में सनसनी मचा दी है। इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को देहरादून में राजीव के परिवार से मुलाकात की और उनकी मौत की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की। घटना का विवरण उत्तरकाशी जिले के पत्रकार राजीव प्रताप सिंह 18 सितंबर को लापता हो गए थे। उनकी क्षतिग्रस्त कार जोशियाड़ा बैराज के पास भागीरथी नदी किनारे मिली थी। 28 सितंबर को उनका शव बैराज से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु छाती और पेट में गंभीर आंतरिक चोटों और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण हुई। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इसे सड़क दुर्घटना माना, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में राजीव अकेले दिखाई दिए थे। हालांकि, परिवार ने इसे हत्या का षड्यंत्र करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के आरोप राजीव की पत्नी मुस्कान, जो सात महीने की गर्भवती हैं, ने बताया कि राजीव ने अपने यूट्यूब चैनल ‘दिल्ली-उत्तराखंड लाइव’ पर उत्तरकाशी जिला अस्पताल की खराब स्थिति को उजागर किया था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। मुस्कान ने कहा, “मेरे पति ने सच दिखाया, और इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह दुर्घटना नहीं, हत्या है। मैं सरकार से न्याय की गुहार लगाती हूं।” परिवार ने CBI जांच की भी मांग की है। हरीश रावत का बयान हरीश रावत ने परिवार से मुलाकात के बाद कहा, “राजीव जैसे निडर पत्रकार की संदिग्ध मौत चिंताजनक है। यह प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है। सरकार को तुरंत SIT गठित कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।” उन्होंने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। राजनीतिक हलचल राहुल गांधी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करते हुए इसे “भयावह” बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने लिखा, “BJP शासन में सच्ची पत्रकारिता खतरे में है। राजीव की मौत एक गहरे षड्यंत्र की ओर इशारा करती है।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: सीएम ने शोक जताया और 30 सितंबर को SIT गठन के आदेश दिए। DGP दीपम सेठ के नेतृत्व में गठित यह टीम सभी पहलुओं, विशेषकर धमकियों की जांच कर रही है। सोशल मीडिया: X पर #JusticeForRajeev ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग प्रेस की आजादी और पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। जांच की स्थिति पुलिस ने मामले को अपहरण से जोड़कर जांच शुरू की थी, लेकिन अब SIT सभी संभावनाओं की पड़ताल कर रही है। परिवार के दावों के आधार पर धमकियों की जांच भी की जा रही है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। यह मामला उत्तराखंड में पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजीव की मौत की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच की पारदर्शिता जरूरी है। परिवार और समर्थक न्याय की उम्मीद में हैं, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। क्यूरेटेड बाय: देवेश पांडेयआगे की अपडेट्स के लिए बने रहें। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आदर्श उदाहरण होंगे वन्य जीवों के लिए बनने वाले जू एंड रेस्क्यू सेंटर : मुख्यमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती;