इंदौर, प्रदीप चौधरी। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की विधानसभा सीट ‘इंदौर-2’ में सियासी हलचल तेज हो गई है। विधायक रमेश मेंदोला के एक समय करीबी रहे जीतू चौधरी ने सोशल मीडिया पर उनकी कड़ी आलोचना की है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। चौधरी ने अपनी पोस्ट में विधायक को मौत की धमकी और जेल भेजने का आरोप लगाते हुए कहा है कि “मेरे साथ होने वाली हर दुर्घटना के लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ विधायक रमेश मेंदोला होंगे…”। यह विवाद कनेक्श्वरी ग्राउंड में आयोजित होने वाले गरबा महोत्सव को लेकर भड़का है, जहां निशुल्क होने का दावा करने के बावजूद 100 से 500-1000 रुपये तक एंट्री फीस वसूली जा रही है। गरबा विवाद ने तोड़ी सांझी दोस्ती सूत्रों के अनुसार, जीतू चौधरी ने गरबा आयोजन को लेकर विधायक मेंदोला और उनके समर्थकों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने एक के बाद एक कई पोस्ट साझा कीं, जिनमें लिखा, “डलवा देना जेल में… मुझे मौत का भी खौफ नहीं… मैं किसी से नहीं डरता… मौत जब आना होगी आ जाएगी।” चौधरी का कहना है कि यह गरबा महोत्सव निःशुल्क होना चाहिए, लेकिन पैसे वसूलकर आम जनता का शोषण किया जा रहा है। शायद इसी मुद्दे पर विधायक या उनके गुट ने चौधरी को निशाना बनाया, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। चौधरी की पोस्ट ने स्थानीय स्तर पर तहलका मचा दिया है। इंदौर-2 क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और निवासियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि क्या यह बीजेपी के आंतरिक गुटबाजी का नया रूप है? चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर उनकी जान को खतरा हुआ या उन्हें जेल की सलाखों के पीछे डाला गया, तो इसके लिए विधायक मेंदोला ही जिम्मेदार होंगे। यह बयान न केवल व्यक्तिगत आक्रोश दर्शाता है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में गहराते मतभेदों की ओर भी इशारा करता है। पुराना ऑडियो फिर आया सामने यह पहली बार नहीं है जब जीतू चौधरी और रमेश मेंदोला के बीच तनाव की बात सामने आई हो। कुछ साल पहले एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें चौधरी किसी से बात करते हुए कहते सुनाई दिए थे, “मुझे रमेश मेंदोला मत समझना…”। उस समय भी यह ऑडियो सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना था। अब इस नई पोस्ट ने पुरानी कड़वाहट को फिर से ताजा कर दिया है। चौधरी, जो कभी मेंदोला के ‘खास’ और ‘दादा दयालु’ कहे जाते थे, अब खुले तौर पर बगावत के रंग में रंगते नजर आ रहे हैं। विधायक की प्रतिक्रिया का इंतजार विधायक रमेश मेंदोला की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि, क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह विवाद पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है, खासकर नवरात्रि और गरबा सीजन के दौरान जब सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी होता है। इधर, इंदौर पुलिस और जिला प्रशासन ने चौधरी की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। सियासी निहितार्थ इंदौर-2, जो बीजेपी का गढ़ माना जाता है, में यह घटनाक्रम विपक्ष के लिए भी एक बड़ा अवसर बन सकता है। कांग्रेस और अन्य दल इस मुद्दे को उठाकर बीजेपी पर आंतरिक कलह का आरोप लगा सकते हैं। जीतू चौधरी की यह बगावत स्थानीय स्तर पर तो हलचल मचा ही रही है, लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में विधायक मेंदोला के राजनीतिक कद पर भी पड़ सकता है। अब सारी नजरें विधायक के ‘एक्शन’ पर टिकी हैं – क्या वे चुप रहेंगे या कोई ठोस कदम उठाएंगे? यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि स्थानीय राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और गुटबाजी कैसे सांस्कृतिक आयोजनों को भी प्रभावित कर सकती हैं। इंदौर की जनता, जो हमेशा शांति और विकास की पक्षधर रही है, इस विवाद से निराश नजर आ रही है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बीजेपी ने खो दिया एक बड़ा अवसर: विश्लेषण और निहितार्थ GST के ‘दीवाली गिफ़्ट’ की सच्चाई : पूरा गणित समझिए