नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि प्रेम दंडनीय नहीं है और इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने किशोर या लगभग वयस्क होने की कगार पर खड़े युवाओं के वास्तविक प्रेम संबंधों को लेकर पुलिस और समाज से संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने से किशोरों पर स्थायी मानसिक आघात हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें यह देखा गया कि जब बेटियां घर से भाग जाती हैं, तो माता-पिता अक्सर “मान-सम्मान” बचाने के लिए मामले दर्ज कराते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर रिश्ता सहमति से है, तो लड़के को जेल भेजने से उसका मानसिक आघात गंभीर हो सकता है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करें और हर मामले में मुकदमा दर्ज करने की बजाय संवेदनशीलता से काम लें। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रेम संबंधों को अपराध की तरह देखने की बजाय, समाज और कानून को युवाओं की भावनाओं को समझने की जरूरत है। यह टिप्पणी किशोरों के प्रेम संबंधों से जुड़े मामलों में कानूनी दृष्टिकोण को और मानवीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बड़ी खबर. यूट्यूब पर उत्तर भारत में बाढ़ और लैंडस्लाइड: सुप्रीम कोर्ट ने अवैध पेड़ कटाई पर जताई चिंता