नई दिल्ली: प्रदीप चौधरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कई मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिनमें जनसांख्यिकीय असंतुलन, गुरुकुल शिक्षा, रिटायरमेंट और आरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। RSS के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में उन्होंने इन मुद्दों पर विस्तार से बात की। जनसांख्यिकीय असंतुलन: धर्मांतरण और अवैध प्रवास मोहन भागवत ने जनसांख्यिकीय असंतुलन के लिए धर्मांतरण और अवैध प्रवास को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इसमें किसी भी तरह का प्रलोभन या जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। भागवत ने समाज से अपील की कि अवैध प्रवासियों को नौकरी न दी जाए, बल्कि मुसलमानों सहित स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा, “सरकार अवैध प्रवास को रोकने का प्रयास कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।” गुरुकुल शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर भागवत ने गुरुकुल शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ने की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुकुल का मतलब केवल आश्रम में रहना नहीं, बल्कि देश की परंपराओं और इतिहास को समझना है। उन्होंने फिनलैंड के शिक्षा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आठवीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा दी जाती है और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए अलग विश्वविद्यालय है। भागवत ने कहा, “वैदिक काल के 64 प्रासंगिक पहलुओं को पढ़ाया जाना चाहिए। गुरुकुल शिक्षा को मुख्यधारा में शामिल करना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना चाहिए।” रिटायरमेंट पर यू-टर्न 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट के सवाल पर भागवत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी रिटायर होने की बात नहीं की। उन्होंने कहा, “संघ में हमें काम दिया जाता है, चाहे हम चाहें या न चाहें। अगर मैं 80 साल का हूं और संघ कहता है कि शाखा चलाओ, तो मुझे करना होगा। जब तक संघ चाहेगा, हम काम करने को तैयार हैं।” यह बयान उनके पहले के रुख से अलग माना जा रहा है, जिसे यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है। नई शिक्षा नीति की सराहना मोहन भागवत ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की तारीफ करते हुए इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया था, क्योंकि उनका मकसद शासन करना था, न कि देश का विकास। उन्होंने कहा, “अब हम आजाद हैं। हमें केवल देश नहीं चलाना, बल्कि लोगों को प्रेरित करना है।” भागवत ने जोर दिया कि बच्चों को उनके इतिहास और परंपराओं की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि उनमें गर्व और आत्मविश्वास पैदा हो। आरक्षण पर RSS का रुख आरक्षण के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि RSS संविधान में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आरक्षण का समर्थन करता है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि समाज के सबसे निचले तबके को ऊपर उठाने और सबसे ऊपर वालों को मदद का हाथ बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि जाति-आधारित आरक्षण को संवेदनशीलता के साथ लागू करना चाहिए। मोहन भागवत के बयानों ने एक बार फिर RSS के वैचारिक दृष्टिकोण को सामने लाया है। जनसांख्यिकीय असंतुलन, शिक्षा, आरक्षण और संगठन के कामकाज जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। खास तौर पर रिटायरमेंट पर उनके यू-टर्न ने ध्यान खींचा है, जो RSS के भीतर अनुशासन और समर्पण की संस्कृति को दर्शाता है। साथ ही, गुरुकुल शिक्षा और NEP पर उनके विचार भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक नई सोच को रेखांकित करते हैं। View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन प्रदेश भाजपा कार्यालय में भिंड के विवादित विधायक से पूछताछ की गई थाना नारकोटिक्स सेल इंदौर द्वारा मादक पदार्थों के परिवहन एवं विनिर्माण करने वालों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्यवाही जारी