दतिया जिले के थाना गोदन थाने मे पदस्थ ASI प्रमोद पावन के खुदकुशी मामले मे आया नया मोड़, मृतक ASI प्रमोद पावन के भाई के द्वारा दिये गये आवेदन के अनुसर नहीं की FIR, पुलिस प्रशासन में अपने अनुसार बनाई FIR… पुलिस अधीक्षक और सभी वरिष्ट पुलिस अधिकारी मिलकर. .. थाना प्रभारी अरविन्द भदौरिया, थरेट थाना प्रभारी के साथ अन्य दोषी पुलिस कर्मियों को बचाना चाहते है। http://newsnationalworld.news.blog/2025/07/22/asi-committed-suicide-in-godan-police-station-of-datia-district/ प्रमोद के भाई के द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार कोई भी कार्रवाई नहीं की बार-बार गुहार लगाने के बाद दतिया पुलिस अधीक्षक ने नहीं की कार्रवाई… पुलिस अधीक्षक व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार ASI प्रमोद के भाई पर दबाव बना रहे हैं कि मेरे अनुसार कार्रवाई होगी हम अपने तरीके से करेंगे… ईमानदार होना गुनाह है मध्य प्रदेश की सरकार में क्या जब पुलिस ही असहाय हो जाए तो राज्य में न्याय कैसे मिलेगा? प्रमोद पावन आत्महत्या मामला: माफिया राज, जातिवादी अपमान और भाजपा की नाकामी की क्रूर सच्चाई उजागर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया जिले के गोंदन थाने में तैनात दलित समाज के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) प्रमोद पावन की आत्महत्या को भाजपा सरकार की विफलता, माफियाओं के बेलगाम आतंक, और जातिगत उत्पीड़न का शर्मनाक उदाहरण बताया है। मात्र एक घटना नहीं, एक खतरनाक चलन:पिछले 6 महीनों में मध्य प्रदेश में 10 पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या की है, जो प्रशासनिक क्रूरता, मानसिक तनाव, और सामाजिक दबाव की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। प्रमोद पावन का बयान:आत्महत्या से पहले प्रमोद पावन ने वीडियो में कहा, “मेरे ही टीआई मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं” और “रेत माफिया कुचलने की धमकी दे रहा है।” उन्होंने थाना प्रभारी अरविंद भदौरिया, थरेट थाना प्रभारी ए. हसन, और अन्य पुलिसकर्मियों पर मानसिक उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, और धमकियों का आरोप लगाया। भाजपा सरकार में पुलिस असुरक्षित:पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में माफियाओं को खुली छूट है, और पुलिसकर्मी मानसिक दबाव, अत्यधिक कार्यभार, राजनीतिक हस्तक्षेप, और जातिवादी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। यह कानून व्यवस्था की हार है। जातिगत अपमान – भाजपा की दोहरी मानसिकता:पावन के वीडियो में जातिसूचक शब्दों और सामाजिक अपमान का जिक्र है, जो भाजपा की सामाजिक समरसता की बातों को खोखला साबित करता है। पटवारी ने इसे “संस्थागत हत्या” करार देते हुए सरकार की चुप्पी को अपराध बताया। मुख्यमंत्री से सवाल:पटवारी ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री मोहन यादव से पूछा: जब पुलिस ही भय और अपमान में जी रही है, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेगा? क्या प्रमोद पावन की आत्महत्या पर सरकार जवाब देगी? कांग्रेस की 5 मांगें: उच्च न्यायिक जांच। आरोपी टीआई और माफिया से सांठगांठ करने वाले अधिकारियों की गिरफ्तारी और निलंबन। परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा और एक परिजन को नौकरी। जातिगत उत्पीड़न का केस दर्ज हो। पुलिस बल में मानसिक तनाव और माफिया दबाव की जांच। पटवारी की चेतावनी:“अगर भाजपा सरकार ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और गरिमा के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस प्रदेशव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगी। यह लड़ाई संविधान, न्याय, और आत्मसम्मान की है।” View this post on Instagram Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन बुरहानपुर पुलिस की संवेदनशीलता: 9 वर्षीय प्राची की जान बचाई सिरमौर एसडीओपी की बड़ी कार्यवाही में 300 पेटी अवैध शराब जब्त, दो गिरफ्तार