डीजीपी मध्यप्रदेश कैलाश मकवाना द्वारा इंदौर संभाग के पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक संभाग के सभी जिलों की पुलिस कार्यप्रणाली की समीक्षा और आवश्यक दिशा-निर्देश। पारदर्शी, स्वच्छ और जनोन्मुखी पुलिस प्रशासन के लिए प्रयासरत रहने पर जोर। इंदौर।। अपराधों पर नियंत्रण, बेहतर कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार के उद्देश्य से 29 जून 2025 को मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने इंदौर संभाग के पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक पुलिस आयुक्त कार्यालय, इंदौर के सभागार में की। बैठक में पुलिस आयुक्त इंदौर संतोष कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक इंदौर रेंज (ग्रामीण) अनुराग, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित सिंह, मनोज कुमार श्रीवास्तव, उप पुलिस महानिरीक्षक निमिष अग्रवाल, सिद्धार्थ बहुगुणा, इंदौर संभाग के सभी जिलों (इंदौर ग्रामीण, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर) के पुलिस अधीक्षक और अन्य राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे। View this post on Instagram डीजीपी ने अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था, माफियाओं और संगठित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, महिला सुरक्षा और बेहतर पुलिसिंग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली, साइबर अपराधों और नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के प्रयासों की समीक्षा की और संतोष व्यक्त किया। उन्होंने सामुदायिक पुलिसिंग और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इन समस्याओं पर और बेहतर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। डीजीपी ने संभाग के सभी जिलों की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करें, ताकि जनता को पारदर्शी, स्वच्छ और जनोन्मुखी पुलिस प्रशासन मिले। मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर कहा कि इन पर अकेले पुलिस के बूते नियंत्रण संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए इंटरनेट और मोबाइल के माध्यम से उपलब्ध अश्लील सामग्री, नैतिक पतन, और सामाजिक मूल्यों में कमी को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि पहले माता-पिता और शिक्षक बच्चों पर निगरानी रखते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे बच्चों का दिमाग “विकृत” हो रहा है। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक सहयोग पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने और हाईवे पर पुलिस चौकियाँ स्थापित करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में रेप, ब्लैकमेलिंग, और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर सख्ती से निपटने के लिए स्टेट लेवल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसकी कमान भोपाल देहात के पुलिस महानिरीक्षक अभय सिंह को सौंपी गई है। यह बयान उज्जैन में 29 जून 2025 को एक समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दिया गया, जिसे लेकर कुछ विवाद भी हुआ। डीजीपी मध्यप्रदेश कैलाश मकवाना द्वारा 29 जून 2025 को इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक में महिला सुरक्षा को प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया। बैठक में बलात्कार, साइबर स्टॉकिंग, और अन्य महिला अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। डीजीपी ने समाज में जागरूकता और सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से महिला सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। महिला सुरक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी, जिसमें मध्यप्रदेश पुलिस की पहल, सरकारी योजनाएँ, और डीजीपी के बयानों के आधार पर स्थिति शामिल है। मध्यप्रदेश में महिला अपराधों की स्थिति राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) डेटा (2023): मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि देखी गई, जिसमें बलात्कार, छेड़छाड़, और घरेलू हिंसा के मामले प्रमुख हैं। 2023 में मध्यप्रदेश में बलात्कार के 3,029 मामले दर्ज किए गए, जो राष्ट्रीय स्तर पर उच्च दरों में से एक है। साइबर अपराधों में भी महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है, जैसे ऑनलाइन उत्पीड़न और डीपफेक स्कैम। उज्जैन बयान (29 जून 2025): डीजीपी कैलाश मकवाना ने बलात्कार की घटनाओं के लिए सामाजिक कारकों जैसे अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता, नैतिक पतन, और माता-पिता/शिक्षकों की निगरानी में कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; सामाजिक जागरूकता और नैतिक शिक्षा आवश्यक है। डीजीपी द्वारा महिला सुरक्षा पर दिए गए निर्देश सख्त कानूनी कार्रवाई: बलात्कार, ब्लैकमेलिंग, और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए स्टेट लेवल विशेष जांच दल (SIT) का गठन, जिसकी कमान भोपाल देहात के पुलिस महानिरीक्षक अभय सिंह को दी गई। दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश। जागरूकता अभियान: स्कूलों और कॉलेजों में महिला सुरक्षा और नैतिक शिक्षा पर जागरूकता सत्र आयोजित करने पर जोर। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत स्थानीय समुदायों को जोड़कर जागरूकता बढ़ाने की सलाह। पुलिस की उपस्थिति बढ़ाना: हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस चौकियाँ स्थापित करने का निर्देश। महिला पुलिस अधिकारियों की तैनाती बढ़ाने और महिला हेल्पलाइन को और सक्रिय करने की बात। साइबर अपराधों पर नियंत्रण: महिलाओं के खिलाफ साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, और डीपफेक जैसे अपराधों पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को मजबूत करने का निर्देश। साइबर जागरूकता कार्यक्रमों में महिलाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने की योजना। मध्यप्रदेश पुलिस की महिला सुरक्षा के लिए पहल महिला हेल्पलाइन (1090): 24/7 उपलब्ध हेल्पलाइन, जिसके माध्यम से महिलाएँ तत्काल सहायता माँग सकती हैं। शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमें गठित। निर्भया मोबाइल वैन: इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में निर्भया वैन तैनात, जो संकट में महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करती हैं। महिला पुलिस थाने: सभी जिलों में विशेष महिला थाने स्थापित, जहाँ महिलाएँ बिना डर के शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इंदौर में महिला पुलिस थाना सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। सुरक्षित शहर परियोजना: इंदौर को सुरक्षित शहर बनाने के लिए सीसीटीवी निगरानी, स्ट्रीट लाइटिंग, और पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। सार्वजनिक स्थानों पर “पिंक बूथ” स्थापित किए गए, जहाँ महिला पुलिसकर्मी तैनात रहती हैं। साइबर सुरक्षा: साइबर अपराधों, विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाने वाले स्कैम (जैसे डीपफेक, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग) पर नजर रखने के लिए विशेष साइबर सेल। ‘Cyberdost’ सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जागरूकता। सरकारी योजनाएँ और कानूनी प्रावधान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: धारा 67A: अश्लील सामग्री के प्रसारण पर 7 साल तक की सजा। साइबर स्टॉकिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न के लिए सजा का प्रावधान। भारतीय दंड संहिता (IPC): धारा 376: बलात्कार के लिए 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा। धारा 354: छेड़छाड़ और महिला की गरिमा भंग करने के लिए सजा। निर्भया फंड: केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए परियोजनाएँ, जैसे सुरक्षित शहर और वन स्टॉप सेंटर। वन स्टॉप सेंटर (सखी): मध्यप्रदेश के सभी जिलों में सखी केंद्र, जहाँ महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी, और मनोवैज्ञानिक सहायता एक ही स्थान पर मिलती है। सामाजिक और सामुदायिक उपाय जागरूकता कार्यक्रम: स्कूलों में यौन शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर सत्र। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान। महिलाओं का सशक्तीकरण: आत्मरक्षा प्रशिक्षण (सेल्फ डिफेंस) कार्यक्रम, विशेष रूप से स्कूल-कॉलेज की छात्राओं के लिए। महिलाओं को डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा के बारे में प्रशिक्षण। सामुदायिक पुलिसिंग: डीजीपी ने सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि समाज को महिला सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी लेनी होगी। स्थानीय समुदायों, एनजीओ, और स्वयंसेवी संगठनों के साथ सहयोग। चुनौतियाँ सामाजिक मानसिकता: डीजीपी ने नैतिक पतन और अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता को प्रमुख चुनौती बताया। जागरूकता की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ अपनी शिकायत दर्ज कराने में हिचकती हैं। साइबर अपराधों में वृद्धि: डीपफेक और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे नए खतरे। सीमित संसाधन: पुलिस बल और साइबर विशेषज्ञों की कमी। सुझाव शिक्षा और जागरूकता: स्कूलों में अनिवार्य यौन शिक्षा और नैतिक मूल्यों का पाठ्यक्रम। तकनीकी उन्नति: साइबर अपराधों की जाँच के लिए AI-आधारित उपकरणों का उपयोग। महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती: अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती से शिकायत दर्ज करने में आसानी। सामुदायिक सहयोग: स्थानीय नेताओं और एनजीओ के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएँ। त्वरित न्याय: फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से बलात्कार और अन्य अपराधों के मामलों में शीघ्र सुनवाई। डीजीपी का दृष्टिकोण डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्पष्ट किया कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज, परिवार, और शिक्षकों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इंदौर संभाग के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करें और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए पारदर्शी और जनोन्मुखी पुलिसिंग सुनिश्चित करें। साइबर अपराध वे अवैध गतिविधियाँ हैं जो कंप्यूटर, नेटवर्क या इंटरनेट के माध्यम से की जाती हैं। ये अपराध व्यक्तियों, संगठनों और सरकारों को निशाना बना सकते हैं। डीजीपी मध्यप्रदेश श्री कैलाश मकवाना द्वारा इंदौर में आयोजित समीक्षा बैठक में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग और जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया गया। साइबर अपराध के प्रकार हैकिंग: किसी कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में अनधिकृत पहुँच प्राप्त करना। फिशिंग: नकली ईमेल, मैसेज या वेबसाइट के जरिए व्यक्तिगत जानकारी जैसे पासवर्ड, बैंक खाता विवरण चुराना। डेटा चोरी: निजी या गोपनीय जानकारी को चुराना, जैसे क्रेडिट कार्ड डिटेल्स या व्यक्तिगत डेटा। साइबर स्टॉकिंग: इंटरनेट या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को बार-बार परेशान करना या धमकाना। डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले: किसी वेबसाइट या नेटवर्क को अत्यधिक ट्रैफिक भेजकर बाधित करना। वायरस और मैलवेयर: कंप्यूटर में वायरस, वर्म्स, ट्रोजन हॉर्स आदि भेजकर सिस्टम को नुकसान पहुँचाना। साइबर आतंकवाद: राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए सरकारी या महत्वपूर्ण वेबसाइट्स पर हमले। ऑनलाइन ठगी: फर्जी कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठना। सोशल मीडिया पर अफवाहें: धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक अफवाहें फैलाकर अशांति पैदा करना। डिजिटल अरेस्ट स्कैम: फर्जी पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को डराकर पैसे वसूलना। साइबर अपराधों के कारण तेजी से डिजिटलीकरण: भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट उपयोग में वृद्धि ने साइबर अपराधियों के लिए अवसर बढ़ाए हैं। जागरूकता की कमी: लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना। कमजोर साइबर सुरक्षा: पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड और अपर्याप्त सुरक्षा उपाय। सीमा-पार प्रकृति: साइबर अपराधी विभिन्न देशों से काम करते हैं, जिससे उनकी पहचान और गिरफ्तारी मुश्किल होती है। आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग: AI और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का उपयोग। साइबर अपराधों का प्रभाव वित्तीय नुकसान: व्यक्तियों और संगठनों को लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान। उदाहरण: 2024 में साइबर ठगी के 1,23,672 मामले दर्ज, जिनमें 210.21 करोड़ रुपये की ठगी हुई। गोपनीयता का उल्लंघन: निजी जानकारी का दुरुपयोग, जैसे ब्लैकमेलिंग। मानसिक प्रताड़ना: साइबर स्टॉकिंग और बदमाशी से पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव। राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: सरकारी वेबसाइट्स पर हमले, जैसे 2025 में पाकिस्तानी हैकर्स द्वारा भारतीय डिफेंस वेबसाइट्स पर अटैक। भारत में साइबर अपराध की स्थिति (2025) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2016 में 12,317 मामले थे, जो 2021 में 52,975 तक बढ़ गए। 2023 में साइबर अपराधों में 20% की वृद्धि देखी गई। 2025 में, डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक रोमांस स्कैम जैसे नए अपराध उभरे। झारखंड का जामताड़ा पहले साइबर अपराध का केंद्र था, लेकिन अब यह पूरे भारत में फैल चुका है। निवारक उपाय जागरूकता अभियान: सरकार द्वारा ‘Cyberdost’ ट्विटर हैंडल और I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) के माध्यम से जागरूकता। हर महीने के पहले बुधवार को “साइबर जागरूकता दिवस” मनाने की सलाह। क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता कार्यक्रम। तकनीकी उपाय: मजबूत पासवर्ड और द्वि-कारक प्रमाणीकरण (2FA) का उपयोग। नियमित सॉफ्टवेयर और एंटीवायरस अपडेट। AI-सक्षम खतरा पहचान प्रणालियों का विकास। कानूनी उपाय: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) के तहत हैकिंग, डेटा चोरी आदि के लिए सजा का प्रावधान। धारा 67: अश्लील सामग्री के प्रकाशन पर 5 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना। CBI का ‘ऑपरेशन चक्र’ जैसे अभियान। सामुदायिक पुलिसिंग: डीजीपी मकवाना ने सामुदायिक पुलिसिंग के तहत समाज को जागरूक करने पर जोर दिया। स्कूलों और कॉलेजों में साइबर सुरक्षा सत्र। अंतरराष्ट्रीय सहयोग: सीमा-पार साइबर अपराधों से निपटने के लिए इंटरपोल और अन्य एजेंसियों के साथ सहयोग। व्यक्तिगत सावधानियाँ: अनजान लिंक या मैसेज पर क्लिक न करें। सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। संचार साथी पोर्टल से सक्रिय सिम कार्ड की जाँच करें। फर्जी कॉल्स (जैसे TRAI या बैंक अधिकारी) से सतर्क रहें। सरकारी पहल नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने के लिए। साइबर स्वच्छता केंद्र (2017): वायरस और spyware हटाने में मदद। I4C: साइबर ठगी से बचाने के लिए 4,386 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई। संचार साथी पोर्टल: फर्जी सिम कार्ड की जाँच और ब्लॉक करने की सुविधा। 1930 हेल्पलाइन: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल शिकायत के लिए। सुझाव नियमित प्रशिक्षण: पुलिस और जांच अधिकारियों के लिए साइबर फोरेंसिक प्रशिक्षण। सार्वजनिक-निजी भागीदारी: साइबर खतरों की जानकारी साझा करने के लिए सहयोग। साइबर साक्षरता अभियान: विशेष रूप से ग्रामीण और कम शिक्षित क्षेत्रों में। साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी, कानूनी और सामाजिक स्तर पर संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। डीजीपी मकवाना की बैठक में भी यही बात रेखांकित की गई कि पारदर्शी और जनोन्मुखी पुलिसिंग के साथ-साथ जागरूकता और सामुदायिक सहयोग से इन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन थाना बडनगर पुलिस द्वारा दो आरोपियों को अवैध तलवार के साथ गिरफ्तार किया गया मध्य प्रदेश ओलम्पिक संघ की कार्यकारिणी निर्विरोध चुनी गई