प्रदीप चौधरी। राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक और अहम खुलासा हुआ है। हत्या में इस्तेमाल हथियार की तस्वीर सामने आई है, जिसे आरोपियों ने हत्या के बाद खाई में फेंक दिया था। पुलिस को यह हथियार राजा के शव के पास से बरामद हुआ था। 23 मई को शिलांग में हुई इस हत्या के बाद लगातार बारिश के कारण हथियार के आगे के हिस्से में जंग लग गया था, लेकिन इसका हत्था नया होने से पुलिस को शक हुआ कि हथियार हत्या के लिए विशेष रूप से खरीदा गया था। View this post on Instagram लगभग डेढ़ फीट लंबा यह हथियार आरोपी अपने साथ लेकर घूम रहे थे। पुलिस के अनुसार, सोनम ने राजा को सुनसान पार्किंग यार्ड की ओर ले गया, जहां आरोपी विशाल ने पीछे से राजा के सिर पर दो बार वार किया। इससे राजा अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद सोनम सहित चारों आरोपियों ने मिलकर राजा के शव को खाई में फेंक दिया। यह हथियार और अन्य साक्ष्य अब पुलिस जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो कोर्ट में मामले को और मजबूत करेंगे। राजा रघुवंशी हत्याकांड: हत्या के हथियार का तकनीकी विश्लेषण और अहम सुराग खबर:राजा रघुवंशी हत्याकांड में मेघालय पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार, एक “दाव” (माचेट) की बरामदगी की पुष्टि की है, जो गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के पास से खरीदा गया था। यह हथियार, जो लगभग डेढ़ फीट लंबा है, हत्या का प्रमुख साक्ष्य है। हत्या 23 मई 2025 को मेघालय के नोंग्रीआट क्षेत्र में वाईसॉडोंग फॉल्स के पास हुई थी। इसके बाद लगातार बारिश के कारण हथियार के आगे के हिस्से में जंग लग गया था, लेकिन इसका हत्था नया होने से पुलिस को संदेह हुआ कि इसे हत्या के लिए विशेष रूप से खरीदा गया था। तकनीकी विश्लेषण: हथियार का प्रकार और विशेषताएं: हथियार एक “दाव” (खुकरी जैसा घुमावदार ब्लेड) है, जो पूर्वोत्तर भारत में सामान्य नहीं है। इसका डेढ़ फीट का ब्लेड तेज धार वाला है, जिससे गहरे और घातक वार संभव हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, राजा के सिर पर दो गहरे घाव पाए गए, जो तेज धार वाले हथियार से किए गए थे। जंग और स्थिति: लगातार बारिश के कारण हथियार के ब्लेड पर जंग लग गया था, लेकिन हत्थे की नई स्थिति से पुलिस ने अनुमान लगाया कि यह हाल ही में खरीदा गया था। यह सुझाव देता है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी। फॉरेंसिक विश्लेषण: हथियार पर आरोपियों के फिंगरप्रिंट पाए गए, जो इसे अपराध से जोड़ते हैं। इसके अलावा, आरोपी आकाश की शर्ट और सोनम के रेनकोट पर खून के निशान मिले, जिनकी फॉरेंसिक जांच में राजा के खून की पुष्टि हुई। यह हथियार और कपड़ों पर मिले खून के निशान मामले में मजबूत साक्ष्य हैं। खरीद और उत्पत्ति: पुलिस जांच में पता चला कि हथियार गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के पास से खरीदा गया था, जो हत्या की साजिश में बाहरी लोगों की संलिप्तता की ओर इशारा करता है। अपराध में उपयोग: पुलिस के अनुसार, आरोपी विशाल चौहान ने इस हथियार से राजा पर पहला वार किया, जिसके बाद अन्य आरोपियों ने भी हमला किया। दो वार के बाद राजा अचेत होकर गिर पड़ा, जिसके बाद उसे खाई में फेंक दिया गया। महत्व:यह हथियार और इसकी फॉरेंसिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। हथियार की स्थिति, इस पर मिले फिंगरप्रिंट, और खून के निशानों ने पुलिस को अपराध के घटनाक्रम को पुनर्जनन करने में मदद की है। यह साक्ष्य कोर्ट में सोनम रघुवंशी, राज कुशवाहा, और अन्य आरोपियों—विशाल चौहान, आकाश राजपूत, और आनंद कुरमी—के खिलाफ मजबूत सबूत के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। निष्कर्ष:हथियार का तकनीकी विश्लेषण और उसकी बरामदगी ने इस हत्याकांड की साजिश को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह साबित करता है कि हत्या सुनियोजित थी, और हथियार की खरीद से लेकर इसके उपयोग तक, सभी कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थे। मेघालय पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले में और सबूत जुटा रही है, ताकि सभी दोषियों को सजा दिलाई जा सके। क्या सोनम खुद भी हो रही थी ”ब्लैकमेल”..? डीजीपी बोलीं – ”हमारे पास ठोस सबूत..!” इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड को लेकर गुत्थी सुलझने की बजाय नित नए एंगल पर आकर उलझती नजर आती है… अब शिलांग पुलिस ने इसकी ट्रायंगल थ्योरी पर ना सिर्फ दोबारा गौर करना शुरू किया, बल्कि कई अन्य संभावित कड़ियों को जोड़ते हुए उसके सबूत भी जुटाए जा रहे हैं… खुद डीजीपी इदाशिशा नोंग्रांग ने अपने मीडियाई बयान में यह साफ किया कि हत्या की जांच सिर्फ प्रेम संबंधों तक ही सीमित नहीं रहेगी… डीजीपी नोंग्रांग कहती हैं – ”हमें यह बेहद असामान्य लगता है… हम लव एंगल के साथ-साथ सभी संभावित कारणों की भी गहराई से जांच कर रहे हैं… पुलिस के पास मजबूत सबूत भी हैं, लेकिन कुछ कड़ियां अब भी जुड़ना बाकी हैं… हमारे पास एक ठोस केस बन रहा है, लेकिन जो बचा है, वह भी बेहद अहम है…” वहीं पुलिस को शक यहां तक है कि ”क्या सोनम खुद भी किसी से ब्लैकमेल हो रही थी..?” इसी तरह पुलिस इस मुद्दे पर भी गहन पड़ताल कर रही है कि सोनम-राज के पीछे कोई और ”मास्टरमाइंड” हो… वहीं हत्या का मकसद सम्पत्ति, बीमा या अन्य आर्थिक लाभ वाले एंगल पर भी पुलिसिया जांच जारी है… सोनम करती है ”तंत्र-मंत्र” पर विश्वास… राजा के पिता अशोक रघुवंशी का आरोप है कि सोनम भी तंत्र-मंत्र पर विश्वास करती है… उन्होंने मीडिया से कहा कि ”शादी के बाद सोनम के कहने पर राजा ने हमारे घर के मुख्य द्वार पर एक पोटली जैसी चीज लटका दी थी… सोनम ने राजा से कहा था कि इसे लटकाने से घर पर किसी की बुरी नहीं नहीं लगेगी… मुझे लगता है कि सोनम भी तंत्र-मंत्र पर विश्वास करती और उसने इसका प्रयोग मेरे बेटे पर भी किया… हमने हत्या के बाद इस पोटली को घर से हटा दिया है… मेरे बेटे की हत्या के दोषियों को फांसी होना चाहिए…” मालूम हो कि इसी तरह तंत्र-मंत्र के आरोप राजा का परिवार हत्या के बाद से सोनम व उसके परिवार वालों पर लगा रहा है और उसके राजा के भाई ने भी उज्जैन से तंत्र क्रिया करने का आरोप तेरहवीं वाले दिन लगाया था..! शक के घेरे में सोनम का भाई भी… राजा-सोनम के गायब होने के शुरुआती दिनों में लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना रहने वाला सोनम का भाई गोविंद भी शक के घेरे में है… अब मीडिया में ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या गोविंद ने अपनी बहन के राज पर पर्दा डालने की कोशिश की..? वहीं गोविंद को लेकर ”सेफ गेम” खेलने जैसी बातें भी सामने आ रही हैं… कहा जा रहा है कि बहन सोनम के कारण गोविंद और उसके परिवार को सामाजिक बहिष्कार न झेलना पड़े, इसलिए वह राजा के परिवार के साथ खड़ा हो गया… वहीं हवाला कारोबार में भी नाम उछलने के बाद वह लगातार मीडिया में बयानबाजी करता रहा, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि वह अपनी बालाजी फर्म की जांच से संबंधित विभागों का ध्यान हटाना चाहता हो..? वहीं राजा के परिवार ने भी गोविंद के नार्को टेस्ट की मांग की है… इधर, मीडिया के इस तरह के सवालों पर गोविंद का कहना है – ”यदि मुझ पर शक है तो मैं हर जांच के लिए हूं… मेरी बहन ने गलत किया है… मैं राजा के परिवार के साथ हूं..!”गोपाल Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आईजी उमेश जोगा का निर्देश: बारिश से पहले जमीन विवाद के अपराधों पर लगाम कसें एसपी नगर निगम की जनसुनवाई में अनोखी शिकायत: “अधिकारियों के आते ही नल चालू, जाते ही बंद”