प्रदीप चौधरी। कोलकाता उच्च न्यायालय ने 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी के मामले में तत्काल सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। मामले की सुनवाई मंगलवार, 03 जून 2025 को निर्धारित की गई है, और उम्मीद है कि उन्हें मंगलवार तक जमानत मिल सकती है। घटना का विवरण:शर्मिष्ठा पनोली को कोलकाता पुलिस ने 30 मई 2025 को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया था। उन पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित एक अब-हटाए गए इंस्टाग्राम वीडियो में कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामुदायिक नफरत को बढ़ावा देने का आरोप है। वीडियो में उन्होंने बॉलीवुड हस्तियों, विशेष रूप से मुस्लिम अभिनेताओं, पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया था। वीडियो वायरल होने के बाद व्यापक विवाद हुआ, जिसके बाद पनोली ने इसे हटा लिया और 15 मई 2025 को इंस्टाग्राम और X पर बिना शर्त माफी मांगी। View this post on Instagram कानूनी कार्रवाई:15 मई 2025 को कोलकाता के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई, जिसमें समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और सार्वजनिक शांति भंग करने की संभावना जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने दावा किया कि पनोली और उनके परिवार को नोटिस देने के कई प्रयास असफल रहे, जिसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। उन्हें 30 मई को गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया और 31 मई को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई और 13 जून 2025 तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कोलकाता पुलिस का बयान:कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तारी को कानूनी बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई पनोली द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो के कारण की गई, जो एक समुदाय की धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने और समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा देने वाला था। पुलिस ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ “अवैध गिरफ्तारी” के दावों को “भ्रामक और शरारतपूर्ण” करार दिया, और स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई देशभक्ति व्यक्त करने या पाकिस्तान का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि घृणा फैलाने वाले कंटेंट के लिए थी। विवाद और समर्थन:पनोली की गिरफ्तारी ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को जन्म दिया है। बीजेपी नेताओं, जैसे अमित मालवीय, सुकाहता सुकанта मजुमदार, और अभिनेत्री कंगना रनौत ने इसे “वोटबैंक तुष्टिकरण” और “चयनात्मक कार्रवाई” करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की आलोचना की। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भी गिरफ्तारी को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” और “अन्यायपूर्ण” बताया, उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। इसके अलावा, नीदरलैंड के सांसद गीर्ट विल्डर्स ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई। दूसरी ओर, AIMIM के प्रवक्ता वारिस पठान ने उनके वीडियो को इस्लाम का अपमान करने वाला बताया था। वर्तमान स्थिति:सोशल मीडिया पर #ReleaseSharmistha ट्रेंड कर रहा है, जिसमें कई लोग उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य उनकी गिरफ्तारी को उचित ठहरा रहे हैं। उच्च न्यायालय की मंगलवार की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां उनकी जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक संवेदनशीलता, और कानूनी कार्रवाई के बीच संतुलन पर बहस को रेखांकित करता है। कोलकाता उच्च न्यायालय का आगामी निर्णय इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन थाना बड़नगर पुलिस ने वाहन चोर को हिरासत में लिया, चोरी की मोटरसाइकिल बरामद चोरी के संदेह में वाहन चालक को पीटते पीटते उतारा मौत के घाट