मेले की बड़ी दुकान अग्रसेन बुक स्टोर और गोयल बुक स्टोर में अभिभावकों को नही मिल रही किताबे, लगा आरोप।

अभिभावकों ने जाहिर की नाराजगी

किताबो में 5 गुना कीमत पर 10 प्रतिशत की दी जा रही लॉलीपॉप।

रीवा/ रीवा जिला अंतर्गत मानस भवन रीवा में जिला प्रशासन के निर्देशन में दो दिवसीय 4 और 5 अप्रैल को कॉपी-किताब मेले का आयोजन किया जा रहा है जिसमे कहा गया था कि बाजार से मेले में सस्ती किताबे मिलेगी लेकिन हकीकत में कुछ और ही है जो प्रशासन के बड़े-बड़े दावे की पोल खोल रहा है।

जिन किताबों की जरूरत बच्चो को है वो किताबे मेले में उपलब्ध ही नही है कुछ ही किताबे मिल रही है जबकि सत्र शुरू होते ही 4 दिन में 95% विद्यार्थी पुस्तकें गोयल बुक स्टोर और अग्रसेन बुक स्टोर से खरीद चुके है जिसका मेरे चैनेल द्वारा पहले ही प्रशासन किया जा चुका है किस तरह प्रशानिक संरक्षण में स्कूल संचालक और दुकानदार के मिलीभगत मेले की तारीख बढ़ाई गई है यदि बाकई में छूट का फायदा ही देना था तो सत्र शुरू होने के पहले ही मेले का आयोजन कराना था लेकिन ऐसा नही किया गया था।


जिससे साबित होता है कही न कही मेले के नाम पर अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है। मेले में कई बुक स्टोर के बैनर लगे थे लेकिन नामचीन दुकान गोयल और अग्रसेन अपना बैनर नीचे लगाए हुए थे जहा पर कई अभिभावकों ने आरोप लगाए है कि ये मेला सिर्फ दिखावा है। जितनी छूट दुकान में मिलती थी उतनी ही मेले में मिल रही है वो भी NCERT की किताबे नही मिल रही है। जबकि कल दिनांक 03/04/25 तक गोयल बुक स्टोर और अग्रसेन बुक स्टोर में सभी किताबे मिल रही थी।

पूरा मामला क्या है आइये जानते है-
     जानकारी के मुताबिक रीवा शहर में गोयल बुक स्टोर और अग्रसेन बुक स्टोर  सबसे बड़ी किताब कापी की दुकानें है जहा पर सभी प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूलों की किताबें मिलेगी इसके अलावा अन्य जगहों में नही मिलेगी। जिसमे स्कूल संचालकों और दुकानदारों के मिलीभगत से उसी राइटर की किताबे बच्चे को खरीदने के लिए कही जाती है जो बाजार में उपलब्ध न हो ताकि चिन्हित दुकानों से खरीदा जा सके। जिसमे 5 गुना ज्यादा कीमत लिखी हुई होती है।

दूसरा मेले में सभी किताबे न मिलना बड़ा कारण यह है दोनो प्रतिष्ठित दुकानों में किताब कापी, पेंसिल, पेन का सेट बनाया जाता है यदि जिसको लेना है पूरा सेट ले वर्ना किताबे नही दी जाती है क्योंकि उसमें औने पौने दाम लिखे होते है ऐसा अभिभावकों का आरोप है।
कुछ अभिभावकों का कहना है जो छूट बताई जा रही है वैसी ही कीमतें तो बाजार में भी मिल रही है।

सवाल यही की- अगर बाजार से इसी कीमत पर किताबें नहीं मिल रही है तो मेला लगाने की प्रशासन की जरूरत क्या थी।
दूसरा सवाल की क्या अभिभावकों को मेले के नाम पर गुमराह किया गया?

तीसरा क्या यह मेला अभिभावकों के लिए राहत थी या बस ‘मैनेजमेंट’ का खेल?

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By kushmendra

Journlist- NNW News(News National World)

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