दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का मामला सुर्खियों में है। इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके मूल कोर्ट, इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है, लेकिन इस फैसले के बाद न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। View this post on Instagram इस मामले में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है। यह संविधान में कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि कुछ लोगों ने इसे अपने हिसाब से बनाया है। जज का बेटा जज, जज का भतीजा जज, जज का दामाद जज—यह क्या बात हुई? क्या दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों में प्रतिभा नहीं है?” चंद्रशेखर ने आगे कहा, “जब कोई 50 करोड़ का घोटाला करता है और सेटिंग से 2000 करोड़ किसी सम्मानित व्यक्ति को ट्रांसफर करवा देता है, तो फिर ऑर्डर उसके पक्ष में आ जाता है। जनता यह सब देख रही है। सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए कि इतनी दौलत कहां से आई।” उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए इसकी नियुक्ति प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की मांग की। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है और जस्टिस वर्मा को फिलहाल कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपने का निर्देश दिया है। यह मामला अब न केवल न्यायपालिका, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी गरमाया हुआ है। आगे की अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन मेरठ में मस्जिद विवाद: हनुमान चालीसा पाठ और ‘योगी जी बुलडोजर चलाओ’ के नारे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश: जस्टिस यशवंत वर्मा की इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापसी का प्रस्ताव