— हर दिन देखा 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्तअंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अन्य दो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल के जरिए पृथ्वी पर लौट आए हैं। बीते साल जून में महज आठ दिनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर गए ये दोनों एस्ट्रोनॉट नौ महीनों बाद लौट पाए हैं। बोइंग का जो स्टारलाइनर यान उन्हें वापस धरती पर लाने वाला था वो खराब हो गया था इसलिए उन्हें इतना लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्हें आखिरकार एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल ने फ्लोरिडा के तट पर सुरक्षित रूप से उतारा। समुद्र में गिरने के बाद कैप्सूल के चारों ओर जिज्ञासु डॉल्फिनों का एक समूह चक्कर लगा रहा था। अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन से धरती पर पहुँचने में 17 घंटों का लंबा वक्त लगा। भारतीय समयानुसार तड़के 3 बजकर 27 मिनट पर चार अंतरिक्ष यात्रियों को लाने वाला कैप्सूल फ्लोरिडा के तट के पास समंदर में गिरा। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की सकुशल वापसी से भारत से लेकर अमेरिका से खुशी का माहौल है। View this post on Instagram स्पलैशडाउन सफल रहा। स्पेसएक्स क्रू-9 वापस धरती पर आ गया।अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 9 महीने तक फंसे रहने के बाद, नासा के बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर वापस धरती पर आ गए हैं। भारत की बेटी सुनीता विलियम्स के सकुशल लौटने से रंगपंचमी का आनंद और अधिक बढ़ गया है – मुख्यमंत्री डॉ. यादव—मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाईभोपाल : 19 मार्च, 2025मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत की बहादुर बेटी, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स एवं अन्य साथियों को अपनी 9 महीने की लंबी यात्रा पूर्ण कर सकुशल पृथ्वी पर लौटने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण हैं, सुनीता विलियम्स की यह यात्रा विज्ञान के साथ-साथ नारी शक्ति और धैर्य की विजय है। यह अभूतपूर्व कीर्तिमान अंतरिक्ष जगत के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। भावी पीढ़ियों और खगोल शास्त्र के क्षेत्र में शोध के लिए उनकी यह यात्रा स्वर्णिम मार्ग प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की बेटी सुनीता विलियम्स के सकुशल लौटने से रंगपंचमी का आनंद और अधिक बढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह भाव व्यक्त किए। View this post on Instagram इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से पृथ्वी तक आने का सफर लगभग 17 घंटे का था। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय ड्रैगन कैप्सूल की रफ्तार 17000 मील प्रति घंटा थी जिसे कुछ मिनटों के अंतराल में तेजी से धीमा किया गया। इससे पहले मंगलवार को सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर के साथ दो और अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री लेग्जेंडर गोर्बूनोव ने बाकी अंतरिक्ष यात्रियों से विदा लिया था। निक हेग और गोर्बूनोव पिछले साल सितंबर में स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल के जरिए छह महीने के अंतरिक्ष मिशन पर आईएसएस पर पहुंचे थे। जब कैप्सूल धरती के वायुमंडल में प्रवेश किया तो कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हो गया था जोकि करीब तीन बजकर 20 मिनट पर फिर से बहाल हुआ। वायुमंडल में प्रवेश के बाद अंतरिक्ष यान के प्लाज्मा शील्ड का तापमान 1927 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था लेकिन हीट शील्ड सवार अंतरिक्ष यात्रियों को इतनी तेज गर्मी से बचाने में मददगार साबित हुई। करीब 3 बजकर 21 मिनट पर अंतरिक्षयान ऑटोनोमस यानी स्वचालित हो गया था, यानी अंतरिक्ष यात्री इसे नियंत्रित नहीं कर रहे थे। इस दौरान उनके सामने लगे टच स्क्रीन पर वे सारी गतिविधियों को देख पा रहे थे।करीब तीन बजकर 24 मिनट पर पहले ड्रैगन कैप्सूल के दो पैराशूट खुले जिससे इसकी रफ्तार और धीमी हो गई। इस दौरान एक जोर का झटका लगा और कैप्सूल की रफ्तार और धीमी हो गई। इसके बाद दो और पैराशूट खुले। जिस समय कैप्सूल समंदर में उतरा, उसके ठीक बाद ही पानी में कैप्सूल के चारों ओर डॉल्फिन चक्कर लगाती हुई तैरती दिखीं। मौके पर मौजूद रिकवरी टीम फास्ट बोट्स से कैप्सूल तक पहुंची और पहले सुरक्षा का जायजा लिया और पैराशूट हटाया। इसके बाद स्पेसएक्स का रिकवरी पोत पहुंचा, जोकि लैंडिंग साइट से दो मील ही दूर पर रुका हुआ था। जिस समय अंतरिक्ष यान की वापसी हो रही थी, आसमान पूरी तरह साफ नीला था। इसके बाद रस्सियों के सहारे कैप्सूल को सुरक्षा नाव में लाया गया। इसके बाद ड्रैगन का साइड हैच खुला और सारी दुनिया अंतरिक्ष यात्रियों की झलक पाने का इंतजार करने लगी। अरसे बाद ये लोग पृथ्वी पर ताजा हवा में सांस लेने वाले हैं। क्रू-9 के कमांडर निक हेग ड्रैगन से बाहर निकलने वाले पहले यात्री थे। वो बाहर निकले, कैमरे की ओर देखकर मुस्कुराए, हवा में हाथ लहराए और आगे निकल गए। कैप्सूल से निकलने से ठीक पहले सुनीता विलियम्स और विलमोर ने कैमरे की ओर हवा में हाथ हिलाकर खुशी जाहिर की। अंतरिक्ष में करीब 286 दिन बिताने के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने धरती पर ताजा हवा में सांस ली। जिस समय वे कैप्सूल से बाहर आ रहे थे उनके चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी और कैमरे की ओर देखकर वे लगातार हाथ हिला रहे थे। करीब नौ महीने तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हुए इन दोनों यात्रियों ने हर दिन 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखा और अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे तालमेल बिठाना उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। नासा के कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम के मैनेजर स्टीव स्टिच ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत ठीक है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्री कुछ समय के लिए रिकवरी शिप पर रहेंगे और फिर उन्हें ह्यूस्टन ले जाया जाएगा। उन्होंने अपनी टीम का शुक्रिया कहा और नासा की जरूरतों के मुताबिक खुद को ढालने के लिए अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की तारीफ की। हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है और जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी इसके बाद परिवार से मिलने की इजाजत मिलेगी। स्टीव स्टिच ने कहा कि वे अंतरिक्ष में रहते हुए बिताए गए अपने समय के बारे में बात करेंगे और फिर छुट्टी पर चले जाएंगे। सुनीता विलियम्स ने स्पेस में 900 घंटे का रिसर्च किया। 286 दिन स्पेस में बिताए। उन्होंने 150 वैज्ञानिक प्रयोग किये। और आखिर में 17घंटों की स्पेस स्टेशन से धरती की यात्रा की। नासा स्पेस ऑपरेशन मिशन डायरेक्टर्स के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर्स जोएल मोंटालबानो ने कहा कि सुनी और बुच ने आईएसएस पर रहते हुए 900 घंटों तक रिसर्च किया और इस दौरान 150 वैज्ञानिक प्रयोग किए। उन्होंने नासा अंतरिक्ष यात्रियों के किए गए प्रयोगों को देश के लिए लाभदायक बताया और उम्मीद जताई कि इस दशक के अंत तक मंगल ग्रह पर इंसान उतारने के नासा के लक्ष्य में ये मददगार साबित होंगे। मालूम हो कि अधिकांश यात्रियों का अंतरिक्ष में रहने का समय आम तौर पर अधिकतम छह महीने का होता है, लेकिन सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को वहां 9 महीने तक रुकना पड़ा। खुद को फिट रखने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को हर दिन चार घंटे तक व्यायाम करना पड़ता है हालांकि शून्य गुरुत्वाकर्षण में भारहीनता की वजह से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। शरीर में खून का प्रवाह गुरुत्वाकर्षण की वजह से आसान होता है और अंतरिक्ष में रहते हुए इस पर भी असर पड़ता है। आंख में द्रव के इकट्ठा होने से आंख की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन का भी सामना करना होता है। इसलिए आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर करीबी नजर रखी जाती है। हालांकि अंतरिक्ष में हुए अधिकांश बदलाव, धरती पर वापसी के बाद सामान्य हो जाते हैं, लेकिन इसमें कुछ समय लगता है। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन साइबर जागरूकता के पेपलेट्स को श्री गणेश जी के चरणों में रखकर पूजन कर शुरुआत की गई. श्रीकृष्ण ने जहां की लीलाएं और जहां पड़े उनके चरण, सभी देवस्थानों को तीर्थ के रूप में करेंगे विकसित