2 साल में मिले 11 सौ ड्रोन

नमो ड्रोन दीदी स्‍कीम की शुरुआत सन 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसके तहत 1 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाना है। सरकार का लक्ष्य 10 लाख महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और कृषि में ड्रोन का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित करना है। हकीकत ये है कि इस योजना के तहत 1100 के आसपास ही ड्रोन दिए गए हैं। जिन महिलाओं को ड्रोन मिले हैं उनमें भी बैटरी की दिक्कत आ रही है। यानि ड्रोन तो नहीं उड़ पा रहे अलबत्ता पीएम के वादे जरूर हवा में उड़ रहे हैं। मोदी सरकार की मंशा थी कि खेती से महिलाओं को जोड़ा जाए और इन महिलाओं को उच्च तकनीक के साथ खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाए। सरकार ने जोर शोर से इस योजना का प्रचार भी किया। बजट में योजना के लिए प्रावधान भी किया गया लेकिन ये योजना भी फिलहाल कागजों तक सीमित होकर दिख रही है।
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने, डेटा विश्लेषण और ड्रोन के रखरखाव के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें ड्रोन का इस्‍तेमाल करके अलग-अलग कृषि कार्यों के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें फसलों की निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव और बीज बुआई शामिल है। इस योजना को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिये लागू किया जाएगा। महिलाओं के कौशल से अगले दो वर्षों के भीतर 14,500 ड्रोन खेतों के ऊपर उड़ान भरने वाले हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 1261 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। अंतरिम बजट में ड्रोन दीदी स्‍कीम के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। साथ ही नमो ड्रोन दीदी परिचालन के लिए दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। नमो ड्रोन दीदी स्‍कीम की शुरुआत सन 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। योजना का लक्ष्य 2024-25 से 2025-26 के दौरान चयनित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराने का है, जो किराये पर किसानों को कृषि के लिए ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। ड्रोन के माध्यम से खेतों में तरल उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाएगा। माना जा रहा है कि योजना से स्वयं सहायता समूहों को स्थायी व्यवसाय और आजीविका मिलेगी। साथ ही वे अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम होंगे। कृषि में इस नवीनतम प्रयोग से किसानों की दक्षता और पैदावार बढ़ेगी, लागत में कमी आएगी। ड्रोन की खरीदारी एवं अन्य सहायक उपकरणों के साथ समग्र लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम आठ लाख रुपये केंद्रीय सहायता के रूप में महिला स्वयं सहायता समूहों को पैकेज के रूप में दिए जाएंगे। शेष राशि चयनित स्वयं सहायता समूह कृषि अवसंरचना कोष से ऋण के रूप में तीन प्रतिशत ब्याज पर ले सकते हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अन्य स्त्रोतों से ऋण प्राप्त कर सकते हैं। योजना की निगरानी ड्रोन पोर्टल के जरिए होगी, जो संचालन को भी ट्रैक करेगा। ड्रोन के उपयोग पर लाइव जानकारी देगा। यह सेवा एवं धन वितरण के लिए साफ्टवेयर के रूप में कार्य करेगा। कहा जा रहा है कि एक दिन में ड्रोन आसानी से 20 एकड़ खेत में छिड़काव कर सकता है। ड्रोन उड़ाने वाली दीदियों को 15 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें एक वर्ष का बीमा, दो वर्ष के रखरखाव का अनुबंध एवं जीएसटी के पैसे भी दिए जाएंगे। समूह की एक अन्य सदस्य को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें फसल पोषक तत्व एवं कीटनाशक प्रयोग की अतिरिक्त ट्रेनिंग भी दी जाएगी। बिजली सामान की मरम्मत, फिटिंग एवं मशीनी कार्यों में रुचि रखने वाली एक सदस्यों को ड्रोन सहायक के रूप में ट्रेनिंग दी जाएगी। ड्रोन निर्माता कंपनियां दिशा-निर्देशों में वर्णित कार्यक्रम के अनुसार आपूर्ति के साथ प्रशिक्षण भी एक पैकेज के रूप में देंगे।


ड्रोन की आपूर्ति पैकेज के रूप में होगी, जिसमें तरल उर्वरकों एवं कीटनाशकों के छिड़काव के लिए स्प्रे मशीन के साथ बेसिक ड्रोन एवं उसे रखने का डिब्बा, बैटरी सेट, नीचे की ओर फोकस कैमरा, दोहरे चैनल वाला फास्ट बैटरी चॉर्जर, चॉर्जर हब एवं अन्य संबंधित सभी वस्तुओं पर एक साल की ऑनसाइट वारंटी शामिल होगी। निरंतर उड़ान के लिए बैटरी का अतिरिक्त सेट रहेगा। कृषि में ड्रोन का उपयोग अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए राज्य इन गतिविधियों का बारीकी से निगरानी करेंगे। महिला समूहों को सहायता देंगे। साथ ही उन्हें एक वर्ष में कम से कम 2000 से 2500 एकड़ क्षेत्र को कवर करने के लिए व्यवसाय शुरू करने में मदद करेंगे।
   सरकार ड्रोन के लिए प्रशिक्षण केंद्रों, मरम्मत केंद्रों और चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण करेगी। सरकार ड्रोन टेक्‍नोलॉजी के विकास के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगी। ड्रोन स्टार्टअप को प्रोत्‍साहनरू सरकार ड्रोन स्टार्टअप को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के तहत, ड्रोन की लागत का 80 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देगी। योजना के जरिए कम से कम 15,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इस योजना का मकसद, कृषि उद्देश्य के लिए ड्रोन किराए पर देना है। इस योजना के तहत, तरल उर्वरक और कीटनाशक वितरण के लिए ड्रोन दिए जाएंगे। इस योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और जरूरतमंद परिवारों से आने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन दिए जाएंगे। बहरहाल, इस योजना को लेकर सरकार और संबंधित मंत्रालय ने जितने दावे और वादे किए थे वो अभी तक तो धुंधले ही दिख रहे हैं। दो सालों में 14 हजार से ज्यादा ड्रोन उड़ना थे और अभी तक तो 11 सौ ड्रोन ही उड़े हैं। जिस तरह से नमो ड्रोन दीदी स्‍कीम के तहत ड्रोन उड़ रहे हैं उससे तो यही लगता है कि ड्रोन तो नहीं अलबत्ता मोदी सरकार के वादे जरूर हवा में उड़ रहे हैं।  

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