भोपाल– मुस्ताअली बोहरा। यूं तो महाकुंभ का आयोजन सदियों से होता आ रहा है। कभी-कभार के अपवाद को छोड़ दिया जाए तो ये आयोजन देश-दुनिया में भारत की सांस्कृतिक-धार्मिक-आध्यात्मिक विरासत को बिखेरता है। लेकिन, इस बार शायद महाकुंभ अपने मकसद से दूर जाता दिख रहा है ? मुसलमानों से लेकर मुलायम तक, मोनालिसा से लेकर हर्षा रिछारिया और ममता कुलकर्णी तक और इसके बाद नेताओं की बयानबाजी से ऐसा लग रहा है जैसे महाकुंभ आस्था का विषय ना होकर ग्लैमर और शक्तिप्रदर्शन का विषय हो गया हो? 6 हजार करोड़ से ज्यादा के खर्च, सैकड़ों समाजसेवी संस्थाओं और हजारों लोगों का सहयोग, शासन-प्रशासन की अथाह मेहनत से हो रहे प्रयागराज महाकुंभ की चर्चा आध्यात्म से ज्यादा ग्लैमर और राजनीति की हो रही है।प्रयागराज महाकुंभ में देश से ही नहीं विदेशों से भी लोग पहुंच रहे हैं। इस बीच ऐसा रोज कोई ना कोई विवाद भी सामने आ रहा है। कभी किसी राजनेता के सियासी बयान तो कभी किसी माॅडल या अभिनेत्री के संगम में डुबकी लगाने की चर्चा हो रही है। हर रोज कोई नया विवाद या बखेड़ा खड़ा हो रहा है। हाल ही में कांग्रेस सुप्रीमो ने नये विवाद को जन्म दे दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी नेता पर निशाना साधा। मध्य प्रदेश के महू में जय बापू, जय भीम, जय संविधान रैली को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि क्या गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी खत्म हो सकती है, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता कैमरों के सामने डुबकी लगाने की होड़ में हैं। खरगे ने कहा कि भाजपा नेता तब तक डुबकी लगाते रहे जब तक कि यह कैमरे पर अच्छा नहीं लग गया, हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वह किसी की आस्था पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। इससे पहले मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापना को लेकर खासा बज बना हुआ था। प्रयागराज महाकुंभ में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और संरक्षक रहे मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित की गई है। सेक्टर 16 के एक कैंप में स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने किया था। इधर, सपा चीफ अखिलेश यादव महाकुंभ पहुंचे और गंगा जी में डुबकी लगाई थी। फिर अखिलेश उस शिविर में भी पहुंचे जहां मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यहां उन्होंने अपने पिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। अखिलेश ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भी मुलाकात की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने प्रतिमा स्थापित किए जाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव हिन्दु विरोधी और सनातन विरोधी विचार रखते थे। महाकुंभ मेले के दौरान कुछ दिनों ही पहले ही खबर आई थी कि मेला क्षेत्र में नागा साधुओं और कुछ युवकों के बीच विवाद हो गया। दरअसल कुछ युवक मेला क्षेत्र में घूम घूमकर पुस्तक बांट रहे थे। साथ ही एक संस्था का प्रचार कर रहे थे। इन लोगों ने एक पोस्टर भी लगाया था। इसमें लिखा था-अंधविश्वास का मेला है। कुंभ एक बहाना, मुक्ति चाहिए तो समझ जगाना है। इससे नाराज होकर नागा साधुओं ने युवकों को दौड़ा दिया। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। यह मामला मेला क्षेत्र के ओल्ड जीटी पांटून पुल के पास का बताया गया था। पुस्तकों का वितरण कर रहे युवकों ने महांकुंभ को अंधविश्वास बताया। इसका पता चलने पर जब कुछ नागा साधुओं ने विरोध किया तो युवक उनसे उलझ गए। नाराज साधुओं ने युवकों के स्टाल को गिरा दिया, सामान उठाकर फेंक दिया। इधर, ममता कुलकर्णी के महाकुंभ के दौरान महामंडलेश्वर बनाए जाने की घटना ने सबको हैरत में डाल दिया। करण-अर्जुन फेम एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी ने भी संन्यास दीक्षा ले ली है। किन्नर अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर बनाया है। उन्हें नया नाम श्री यामाई ममता नंद गिरी दिया गया है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि 24 घंटे में संन्यासी से महामंडलेश्वर का सफर ममता ने कैसे पूरा कर लिया? उन्होंने गुरु दीक्षा जूना अखाड़े से ली तो फिर महामंडलेश्वर किन्नर अखाड़े से क्यों बनीं? योग गुरू बाबा रामदेव ने तो ये तक कह दिया कि आजकल मै देख रहा हूं किसी की भी मुंडी पकड़कर महामंडलेश्वर बना दिया, ऐसा नहीं होना चाहिए। ममता ने किन्नर अखाड़ा की प्रमुख डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मुलाकात कर संन्यास की इच्छा जताई। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनकी मुलाकात अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी से कराई। इसके बाद किन्नर अखाड़े में उन्हें महामंडलेश्वर बनाने की दीक्षा पूरी की गई। दो घंटे तक आचार्य और पुरोहितों ने उनकी संन्यास दीक्षा की। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर गर्गाचार्य मुचकुंत और पीठाधीश्वर स्वामी महेंद्रानंद गिरि की मौजूदगी में धार्मिक क्रियाएं हुईं। किन्नर अखाड़े की प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उन्हें महामंडलेश्वर घोषित किया। बता दें कि ममता कुलकर्णी के धार्मिक गुरु चैतन्य गगन गिरि महाराज हैं। 23 साल पहले ममता ने उन्हीं के आश्रम में दीक्षा ली थी। ममता के गुरु का संबंध जूना अखाड़ा से है। ममता ने सनातन धर्म की दीक्षा जरूर ली थी लेकिन संन्यास महाकुंभ में आकर लिया है। महामंडलेश्वर बनाने के लिए किन्नर अखाड़े के नियम थोड़ा उदार हैं। महामंडलेश्वर बनने के बाद भी घर-परिवार और काम धंधे से जुड़े रह सकते हैं। 13 अखाड़ों की तरह कठिन साधना नहीं करनी पड़ती है। यहां तक तो सब ठीक है लेकिन अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंन्द्र कृष्ण शास़्त्री ने इस पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जब तक साधुत्व और संतत्व प्रकट ना हो जाए तो उसे साधु या मंडलेश्वर या महामंडलेश्वर नहीं कह सकते। धीरेन्द्र शास्त्री से पहले किन्नर महामंडलेश्वर हेमांगी सखी मां ने भी आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह अखाड़ा किन्नर समाज के लिए बना था लेकिन इसमें अब महिला को स्थान दे दिया गया है।इसी तरह हर्षा रिछारिया के शाही रथ पर बैठने को लेकर विवाद हो गया था जो अभी तक थमा नहीं है। हर्षा रिछारिया जो महाकुंभ में पेशवाई के रथ पर बैठने और अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में रही थीं, अब अखाड़ा परिषद के महंत रविंद्र पुरी के संरक्षण में हैं। उन्होंने महंत रविंद्र पुरी को अपने पिता के समान बताया और शाही रथ पर बैठकर अमृत स्नान करने की बात कही है। दूसरी तरफ, शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने हर्षा के साधु वेश में स्नान करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े, हर्षा को साधु वेश में स्नान नहीं करने देंगे। स्वामी आनंद स्वरूप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर्षा-वर्षा से मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मुझे कैलाशानंद और रविंद्र पुरी से दिक्कत है। अगर वे हर्षा को प्रश्रय न देते, तो यह स्थिति नहीं बनती। वहीं, हर्षा रिछारिया ने स्वामी आनंद स्वरूप की बातों को खारिज करते हुए कहा कि वह महाकुंभ में फिर से आएंगी और शाही रथ पर बैठकर स्नान करेंगी। उनका कहना है कि महंत रविंद्र पुरी ने उन्हें संरक्षण दिया है और वह उनके सम्मान में ऐसा करेंगी। हर्षा ने कथित तौर पर स्पष्ट किया था कि वह संन्यासिन नहीं थीं। हालांकि साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस मुद्दे को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि भगवा कपड़े पहनना कोई अपराध नहीं है और युवती ने निरंजनी अखाड़े के एक महामंडलेश्वर से मंत्र दीक्षा ली थी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि उसने रामनामी कपड़ा पहना हुआ था। हमारी परंपरा है कि जब भी सनातन का कोई कार्यक्रम होता है, तो हमारे युवा भगवा कपड़े पहनते हैं। यह कोई अपराध नहीं है। उनका कहना है कि हर्षा को प्रमोट कर महाकुंभ से नारी सशक्तिकरण का बड़ा संदेश भी दिया जाएगा। जब महाकुंभ की शुरूआत हो रही थी तभी मुसलमानों की एंट्री को लेकर मामले ने तूल पकड़ा था। हालांकि यहां बात आगे नहीं बढ़ी। प्रयागराज महाकुंभ में मुसलमानों की एंट्री को लेकर भी विवाद सामने आया था। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दावा किया था कि महाकुंभ का आयोजन वक्फ की जमीन पर हो रहा है। हमने कोई आपत्ति नहीं की, मगर दूसरी तरफ अखाड़ा परिषद और दूसरे बाबा लोग मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगा रहे है। आॅल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा था कि प्रयागराज के रहने वाले सरताज ने दावा किया है कि कुंभ मेले की जहां तैयारियां की जा रही हैं, वो जमीन वक्फ की है, ये जमीन लगभग 54 बीघा है। मुसलमानों ने बड़ा दिल दिखाते हुए इस पर कोई आपत्ति नही की, कुंभ मेले के सारे इंतजाम इसी वक्फ की जमीन पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मगर दूसरी तरफ अखाड़ा परिषद और दूसरे बाबा लोग मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगा रहे हैं, ये तंग नजरी छोड़नी होगी। बात यहीं तक नहीं है। महाकुंभ मेले में बिजली विभाग के कर्मचारियों पर भी साधुओं के साथ मारपीट करने के आरोप लगे हैं। महाकुंभ मेले में साधुओं पर हमला करने, सोने की चेन लूटने और जान से मारने की धमकी देने वाले बिजली विभाग के ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज हो गया है। कोतवाली पुलिस ने संत प्रेमदास की लिखित शिकायत पर बिजली विभाग के ठेकेदार आशीष द्विवेदी, उसके भाई अनिल द्विवेदी सहित कई अज्ञात के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। अयोध्या स्थित काशी मंदिर के प्रमुख महंत रामबालक दासजी महाराज का शिविर महाकुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर 18 में अन्नपूर्णा मार्ग पर शिविर है। यहां पर संत प्रेमदास समेत अन्य संत आराधना करते हैं। प्रेमदास का कहना है कि 15 जनवरी की रात आश्रम की बिजली चली गई। तब वह अपने गुरु राजन दास के साथ इसकी शिकायत लेकर ओल्ड जीटी रिवर फ्रंट चैराहा थाना जीटी झूंसी के पास इशू वासू कंपनी के बिजली मरम्मत गोदाम पर पहुंचे। शिकायत किए जाने पर वहां उपस्थित बिजली ठेकेदार आशीषकुमार द्विवेदी, उसके बड़े भाई अनिल कुमार द्विवेदी सहित कई लोग गाली-गलौज करते हुए हमला कर दिया। वहां से हटने की कोशिश की तो गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया और गले से सोने की चेन छीन ली। किसी तरह वह आश्रम लौटकर अपने गुरु भाइयों एवं गुरु से इस बात की चर्चा की। इस पर उनके साथ 10-15 गुरु भाई सोने की चेन वापस दिलाने और अभद्रता का कारण पूछने के लिए दोबारा कंपनी के गोदाम पहुंचे। उन्हें देखते ही गुंडा साधु कहते हुए गाली-गलौज की और दोबारा हमला किया गया।कुल मिलाकर, महाकुंभ का ये आयोजन आस्था और धर्म से जुड़ा हुआ है। सदियों पुरानी रही है महाकुंभ की परंपरा। लेकिन, जिस तरह से ये शक्ति प्रदर्शन, ग्लैमर और इंवेट की ओर आगे बढ़ रहा है उसे इसे सनातनी परंपरा नहीं कहा जा सकता। यदि महाकुंभ की गरिमा को बरकरार रखना है तो धर्म के ध्वजवाहकों को आगे आना होगा। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन डॉ राज के प्रजापति बने स्टेट चेयरमैन राजेंद्र शर्मा के दो व्यंग्य