चिन्हित लोगो को दी जाती है खाद, डबल लॉक प्रभारी सहित अन्य कर्मचारी नही उठाते फोन। News National World/ JAWA एक तरफ जिला कलेक्टर रीवा द्वारा बैठक कर संबंधित अधिकारियों को आदेशित किया जाता है कि खाद बीज के लिए किसी तरह की समस्या किसानों को न हो वर्ना सख्त कार्यवाही की जाएगी तो दूसरी तरफ संबंधित अधिकारी जिला कलेक्टर के आदेशों को धता बताते हुए मनमानी तरीके से काम करते है। जिला कलेक्टर के द्वारा बैठक, आदेश निर्देश तो जारी होते रहते है लेकिन सारे आदेश बैठकों या कागजो तक ही सीमित रह जाते है जिसका धरातल पर पालन नही होता है। यहाँ तक कि यदि किसी को कोई समस्या हो या जानकारी चाहता है तो स्वयं जिला की मुखिया कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के द्वारा फोन नही उठाया जाता है। और न ही मैसेज का कभी जाबाव दिया जाता है तो दूसरे अधिकारी कैसे फोन उठा ले क्योंकि दूसरे अधिकारियों को भी उन्हें के रास्ते चलना है। इसी तरह के मामले में रीवा ज़िला अंतर्गत जवा ब्लाक में इस वक़्त गेंहू सहित अन्य फसलों की सिंचाई करने के बाद किसानों को यूरिया खाद की जरूरत है जिसके लिए किसान कई दिनों से किसान समृद्धि केंद्र जवा का चक्कर लगा रहे थे तब कही जाकर 16 जनवरी 2025 को खाद आयी और जानकारी लगते ही किसान खाद के लिए टूट पड़े। आलम ये रहा कि काफी लंबी लाइने बन गयी। इसी प्रकार से दूसरे दिन 17 जनवरी को पुनः इस कड़ाके के ठंड में तड़के से ही किसानों की लाइने लग गयी और किसान खाद के लिए एक दूसरे को धक्का देते रहे। जिसमे से कुछ किसानों को खाद मिला बाकी 2 दिन से चक्कर काट रहे है परंतु उन्हें खाद नही मिल रही है।इस संबंध में जब डबल लॉक जवा, सिरमौर और चाकघाट प्रभारी अंवेश मिश्रा, कर्मचारी मौले को कई बार फोन लगाया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीब नही किया गया और न ही मैसेज का जाबाव दिया गया। इसके बाद जिला कलेक्टर रीवा को फोन लगाया गया और मैसेज किया गया लेकिन पहले की भांति उनके द्वारा भी न ही फोन रिसीब किया गया और न ही मैसेज का जाबाव दिया गया। तो सवाल उठता है आखिर आमजनता शिकायत करे तो करे किससे? इस तरह से पूरे जिले की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और अधिकारियों को किसी का कोई डर नही रहा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसान समृद्धि केंद्र जवा में पदस्थ कर्मचारी मौले से जो किसान अकेले में मिल लेता है उन्हें जितनी खाद चाहिए मिल जाती है और जो लोग अकेले में नही मिलते उन्हें खाद नही मिलती है मिलती भी है तो एक या दो बोरी।इसी तरह से डबल लॉक प्रभारी अपने राजनीतिक दबाव का हवाला देकर अपने चहेतों को जितनी खाद चाहिए दिलवाते है बाकी लोग इंतज़ार ही करते रहते है। इस तरह के व्याप्त भ्रष्टाचार में आखिर गरीब किसान जिसका कोई नही है उसे खाद कैसे मिले। Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन रेहान शेख फिर इंदौर जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष नफरती एजेंडे की बलिवेदी पर चढ़ा कुंभ का मेला
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