इन्दौर जी हम आपको बताते चलें कि मां अहिल्या की नगरी मै कोई भी बेरोजगार नहीं है उसके प्रमाण भी मोजूद है एक रिपोर्ट के अनुसार आईटीओ मै लाखों वाहनों की बिक्री बताईं गईं हैं जहां शहर में लाखों की तादाद में जनता है वहीं लाखों की तादाद में वाहनों की बिक्री भी हुई है शहर मै 80 प्रतिशत वाहन चालक है जिसमें से 20 प्रतिशत वाहन पर पुलिस लिखा हुआ होता है जो कि एक जनता का रक्षक होता है वहीं सरकारी नौकरी कहलातीं है जिसकी उसे तनख्वाह प्राप्त होती है हजारों मैं। वहीं 20 प्रतिशत वाहन पर प्रेस लिखा होता है जो संस्थान द्वारा रखा हुआं मुलाजिम होता है वहां भी सैलेरी पर ही नियुक्त होता है जिसकी इनकम भी हजारों रूपए माह की होती है।वहीं 40 प्रतिशत वाहन पर कहीं डाक्टर, नगर निगम, वकील, नेता के पदों की पट्टी लगी होती है और अन्य विभागों का लिखा होता है फिर बच्चे 20 प्रतिशत लोग जो होटलों , आफिसों और मजदूर चौराहों पर काम करते दिखाई देते हैं यह सब मिलाकर 100 प्रतिशत जनता आपके सामने आ जाती है है तो फिर इन्दौर शहर मै बेरोजगार होने का कोई सवाल ही नहीं बनता हैशाम होते ही यातायात व्यवस्था प्रभावित हो जातीं हैं चैकिंग अभियान चलता है लेकिन वाहनों पर प्रेस, पुलिस , वकील, डाक्टर, मप्र शासन, नगर निगम, नेता लिखा देख जाने दिया जाता है असल मै क्या है यहां जानना जरूरी ही नहीं समझा जाता है क्या यह लिखवाने वाला व्यक्ति वाहनों के कागज़ों को रखता है या फिर वह नियमों के विरुद्ध ही कार्य करता है क्या वह जो लिखा है उस पद पर कार्यरत हैं या फिर यातायात पुलिस से बचने के लिए यहां लिखा रखा हैयह सब सवाल इसलिए सामने आते हैं की जहां 80 प्रतिशत वाहनों पर पैशावर और सक्षमता का लिखा हुआ है तो फिर मां अहिल्या की नगरी मै कोई भी बेरोजगार हो ही नहीं सकता है Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आनलाइन कैसिनो किंग इरफ़ान बिहारी कैसे बना करोड़ों का मालिक। ये हैं पुलिसिंग , यही है व्यवस्था, कहने में नहीं, करने में सक्षम….