भोपाल- मुस्ताअली बोहरा। । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर के टीवी पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई। उनका शव 3 जनवरी को एक सेप्टिक टैंक से बरामद किया गया। 33 वर्षीय मुकेश चंद्राकर यूट्यूब पर बस्तर जंक्शन नाम से चैनल का संचालन करते थे। उनकी पहचान फील्ड में जाकर रिपोर्टिंग करने वाले और सक्रिय पत्रकार की थी। बस्तर में माओवादियों द्वारा अपह्रत पुलिसकर्मियों या ग्रामीणों की रिहाई में मुकेश ने कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने अप्रैल 2021 में बीजापुर के तकलगुडा नक्सली हमले के बाद नक्सलियों की कैद से कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास को रिहा कराने में भी अहम भूमिका अदा की थी। इस हमले में 22 जवान शहीद हो गए थे। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई राजनेताओं और दिग्गज पत्रकारों ने मुकेश की हत्या की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मुकेश चंद्राकर के बड़े भाई और टीवी पत्रकार यूकेश चंद्राकर ने मुकेश के लापता होने की पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान चट्टान पारा बस्ती में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के परिसर में एक सेप्टिक टैंक से मुकेश चंद्राकर का शव बरामद किया गया। ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की ओर से अपने मजदूरों के लिए बनाए गये आवासीय परिसर में पुलिस ने खोजबीन शुरू की तो उन्हें एक ताजा कंक्रीट की ढलाई नजर आई। पता चला कि यह पुराना सेप्टिक टैंक है, जिसके ढक्कन को बंद करके दो दिन पहले ही कंक्रीट की ढलाई की गई थी। इसके बाद पुलिस ने शक के आधार पर उस सेप्टिक टैंक के ऊपरी हिस्से को तोड़ा तो उन्हें पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव मिला। मुकेश के भाई यूकेश ने बताया था कि ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की ओर से बनवाई गई सड़क के निर्माण में भ्रष्टाचार की एक खबर एनडीटीवी पर प्रसारित हुई थी जिसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच की घोषणा की थी। भाई के लापता होने के बाद हमने उनके लैपटॉप पर मोबाइल का अंतिम लोकेशन देखा तो वह ठेकेदार दिनेश चंद्राकर, सुरेश चंद्राकर और रितेश चंद्राकर के मजदूरों के लिए बनाए गए कैंपस में नजर आ रहा था। पुलिस ने जिस ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के परिसर में बने सेप्टिक टैंक से मुकेश चंद्राकर का शव बरामद किया है, वह बस्तर में सरकारी निर्माण कार्यों और माइनिंग से जुड़े बड़े ठेकेदारों में शुमार हैं। वो छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राज्य उपाध्यक्ष भी हैं। उन्हें कुछ महीने पहले हुए महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने नवापुर विधानसभा का आब्जर्वर भी बनाया था। मुकेश बस्तर में 120 करोड़ रूपये की सड़क निर्माण परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे थे। 24 दिसंबर 2024 को मुकेश ने एक राष्ट्रीय चैनल के लिए एक रिपोर्ट की थी। इस रिपोर्ट में आरोपी ठेकदार के खिलाफ भ्रष्टाचार की बात की गई थी। बीजापुर के गंगालूर से नेलशनार तक बनने वाली सड़क को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। रिपोर्ट के अनुसार गंगालूर से हिरौली तक की सड़क पर कई गड्ढे पाए गए। महज एक किलोमीटर में ही करीब तीन दर्जन गड्ढे पाए गए थे। 52 किलोमीटर की इस सड़क में 40 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। मीडिया में खबर आ जाने के बाद जगदलपुर के लोक निर्माण विभाग ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। वहीं, बीजापुर के कलेक्टर संबित मिश्रा ने लोक निर्माण विभाग को बेहतर गुणवत्ता वाले काम को सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। सुरेश चंद्राकर बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए लेकिन पिछले कुछ सालों में ही सरकारी निर्माण कार्यों का ठेका लेकर वे बस्तर के शीर्ष ठेकेदारों में शुमार होने लगे। ये वही सुरेश चंद्राकर हैं जिन्होंने आदिवासी बाहुल्य बीजापुर में शाही अंदाज में शादी की थी। उन्होंने होने वाली पत्नी के लिए ससुराल तक आने के लिए निजी हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया था। इसके अलावा बीजापुर जैसी जगह में उन्होंने अपने विवाह समारोह में नाच-गाने के लिए रूसी डांसर्स के दल को बुलाया था। विवाह के अगले दिन उन्होंने बीजापुर के स्टेडियम में दावत दी थी। मुकेश चंद्रकार की पीएम रिपोर्ट भी आ गई है। पीएम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि पत्रकार मुकेश चंद्रकार के लीवर के चार टुकड़े थे। आरोपियों ने इतनी बेहरमी से मारा था कि उनकी पांच पसलियां भी टूट गई थी। मुकेश चंद्रकार का हार्ट फटा हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार हार्ट के चिथड़े उड़े हैं। पिटाई के दौरान आरोपियों ने पत्रकार के हर हिस्से पर किसी भारी हथियार से वार किया है। उसके सिर पर 15 चोट के निशान मिले हैं। पूरी तरह से सिर क्षतिग्रस्त था। सिर की हड्डियां पूरी तरह से टूट चुकी थीं। आरोपियों न मुकेश की गर्दन की हड्डी भी तोड़ दी थी। डाॅक्टरों का भी कहना है कि शरीर की हालत देखकर लग रहा है कि पत्रकार को कितना तड़पाया गया होगा। इधर, पुलिस ने मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने उसे गिरफ्तार किया है। बहरहाल, पत्रकारों की प्रताड़ना, हमले, मर्डर का ये पहला मामला नहीं है इससे पहले भी देश के दिगर राज्यों से ऐसी खबरें आतीं रहीं हैं। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रोटेक्शन एक्ट बनाए जाने की मांग भी लंबे समय से हो रही है लेकिन अब तक ठोस रूप से हुआ कुछ नहीं है। हां, जब भी ऐसे मामले आते हैं तो संबंधित राज्य के नेता जरूर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर व्यापक प्रबंध करने का वादा कर देते हैं। मुकेश चंद्राकर और ऐसे ही अन्य युवा पत्रकार लगातार संघर्ष करते हुए कई खतरों के बीच काम करते हैं। नक्सलप्रभावित क्षेत्रों में चल रहे सरकार कार्यों में भ्रष्टाचार के बीच काम करते हुए ऐसे पत्रकारों को कभी नक्सलियों तो कभी रसूखदार कारोबारियों का खतरा होता ही है। ना जाने और कब तक कितने ही मुकेश बेपरवाह शासन-प्रशासन और भ्रष्टाचार पोषित तंत्र की भेंट चढ़ते रहेंगे ? 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