ऐ इतनी दीवानगी अच्छी नहीं यारा,ज़ब कोई तुझसे नाम तेरा पूछे, औरहोश में भी तू मेरा नाम बताएं प्यारा।हाँ, देखों मैं कितना खुशकिस्मत हूँ,कितना बस गया दिल से सहमत हूँ!मैं तेरे प्यार की सबसे बड़ी रहमत हूँ। ऐ इतनी दीवानगी अच्छी नहीं यारा,ज़ब कोई तुझसे नाम तेरा पूछे, औरहोश में भी तू मेरा नाम बताएं प्यारा।तुझे क्यों? हैं मुझसे इतनी दीवानगी,क्या? अभिभावक दे देंगे परवानगी!ये नौबत न आए डालना पड़े रवानगी। ऐ इतनी दीवानगी अच्छी नहीं यारा,ज़ब कोई तुझसे नाम तेरा पूछे, औरहोश में भी तू मेरा नाम बताएं प्यारा।तेरी जुल्फों के साए में जीना हैं हमें,सारी ज़िन्दगी भर उसमें ही रहें रमें!इतनी मोहब्बत करें अपनी खूब जमें। संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)मो. 98260-25986 Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन जुबान नहीं फिसली है, असल बात जुबान पर आ गई है आगरा में हाइवे का एक ऐसा वीडियो वायरल, दो युवकों को ट्रक ने तेज़ रफ़्तार में घसीटे.