🔴 विश्रामपुर (सूरजपुर)। सीताराम येचुरी नगर, विश्रामपुर में हो रहे माकपा के 8वें राज्य सम्मेलन में राज्य सचिव एम के नंदी ने राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट पेश की। प्रदेश की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक स्थिति की विवेचना करती इस रिपोर्ट में कारपोरेटी साम्प्रदायिकता की बढ़त के लिए की जा रही साजिशों, सरकार के संरक्षण में सांप्रदायिक तत्वों और गौ गुंडों द्वारा संविधान और कानून अपने हाथ में लेने और भाजपा की जन विरोधी नीतियों के कारण दलित, आदिवासियों और कमजोर तबकों के जीवन में बढ़ रही मुसीबतों का ब्यौरा रखा गया है। प्रतिनिधियों द्वारा इस पर चर्चा जारी है।

🔴 इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से परम्परागत रूप से सौहार्द्र की पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ में बढ़ती साम्प्रदायिक प्रवृत्ति की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई है और ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार सत्ता पार्टी भाजपा, उसके नियंत्रणकारी संगठन आर एस एस तथा उसके आनुषांगिक संगठनों और राज्य सरकार के इशारे पर असंवैधानिक काम करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के हिस्से की इनमें लिप्तता को रेखांकित किया गया है।

🔴 रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि लोकसभा चुनावों में देश में भाजपा को लगे धक्के और राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में साम्प्रदायिकीकरण की मुहिम बहुत तेज हो गई है और पर्वों, त्यौहारों, उत्सवों को भी इसका जरिया बनाया जा रहा है तथा मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाकर पाबन्दियां लगाई जा रही हैं। आदिवासी इलाकों सहित जहां भी थोड़ी बहुत संख्या में ईसाई है, वहाँ उन पर हमले और किसी न किसी बहाने उन्हें परेशान करने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। यह सब ध्यान बंटाने के लिए इसलिए किया जा रहा है, ताकि अडानी-अम्बानी जैसे कार्पोरेट्स के मुनाफों की लूट और बेरोजगारी सहित आम जन की बदहाली से ध्यान बंटाया जा सके ।

🔴 सम्मेलन ने साम्प्रदायिक ताकतों की कारपोरेट पूँजी के साथ घनिष्ठ रिश्ते का पर्दाफ़ाश करते हुए, इससे बढती जनता की मुश्किलों के खिलाफ आन्दोलन विकसित करते हुए धर्म को राजनीति से अलग रखने, धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक लोकतंत्र की हिफाजत करने की मुहिम तेज करने का आव्हान किया है ।

🔴 माकपा राज्य सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधि प्रदेश में सामाजिक रूप से वंचित समुदाय विशेषकर महिलाओं, दलित तथा आदिवासियों की स्थिति के लगातार बदतर होते जाने पर क्षोभ और आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में आजादी के बाद से, राजनीति पर अपना वर्चस्व जमाये सामंती संबंधों और सोच पर निर्णायक प्रहार हुआ ही नहीं। अधिकाँश मामलों में भूमि सुधार, छुआछूत निर्मूलन और सबके लिए शिक्षा तथा समानता सुनिश्चित करने के वे कदम भी नहीं उठाये गए, जिनका भारत के संविधान ने साफ साफ़ समय निर्धारित करके स्पष्ट प्रावधान किया था। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ बलात्कार प्रदेश बन गया है। महिला सशक्तीकरण के जितने गाल बजाये गए, उतनी ही तेजी के साथ स्त्रियों, नाबालिग़ बच्चियों और वृद्धाओं की यातनाएं बढ़ीं। आदिवासियों को प्रताड़ित करने वाली घटनाओं में भी छत्तीसगढ़ का शर्मनाक रिकॉर्ड है। इसी प्रकार, पिछड़ी जातियों के कुछ समूहों को दलित आदिवासियों के उत्पीडन की लाठी के रूप में इस्तेमाल करने की ‘चतुराई’ के बावजूद सामन्तवादी ताकतें इन ओबीसी समुदायों को भी अपना निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहीं हैं।

🔴 अपनी रिपोर्ट में माकपा ने सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया है। इसके लिए भूमि, रोजगार, शिक्षा तथा आर्थिक रूप से विशेष अवसरों के लिए लड़ाई लड़ते हुए जनता के बीच लिंग और जाति की सही समझ विकसित करने के लिए सतत अभियान चलाने, आदिवासियों की संस्कृति और मान्यताओं को खास तरीके से ढालने की योजनाबद्ध साजिशों के खिलाफ जागरण करने, दलितों के शोषण के विरूद्ध व्यापक लामबंदी करने, महिलाओं को संगठित करने के विशेष प्रयत्नों को प्राथमिकता पर लेने के साथ इस तरह के शोषण की हर घटना में हस्तक्षेपकारी सक्रियता का आव्हान किया है ।

🔴 सम्मेलन में खेती किसानी की लागत में बेतहाशा वृद्धि, सिंचाई की स्थिति भी ठीक न होने, स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली का निजीकरण करने, समय पर खाद, बीज और कीटनाशक के न मिलने, प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार का पूरी निर्दयता के साथ उदासीन रहने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का महाघोटाले में बदल कर रह जाने, मंडी खरीदी का लगभग खत्म या औपचारिक बनकर रह जाने, पहले से ही कम निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के भी न मिल पाने आदि-इत्यादि मुद्दों के बारे में चर्चा हो रही हैं।

🔴 माकपा का कहना है कि इस सबके चलते खेती छोड़ने वाले किसानो की संख्या बढ़ी है, ग्रामीण बाजार सिकुड़ा है, पलायन बढ़ा है, रोजगारहीनता बढ़ी है, शिक्षा तथा स्वास्थ्य से गरीब जनता की दूरी बढ़ी है। माकपा ने किसानों की दुर्दशा और खेती की बर्बादी रोकने के लिए आन्दोलन छेड़ने और मिलकर लड़ने का आव्हान किया है।

🔴 सम्मेलन में अभी तक सांप्रदायिकता के खिलाफ, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ, “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के तानाशाही अभियान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए गए हैं। सम्मेलन में गीतों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी की जा रही हैं।

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