क्यों? यूँ जताते हो अपनी नाराजगी,जब लौटकर महायुती में ही आना है।क्या? ये बीमारी भी एक बहाना है,फिर लौटकर इसी घर ही आना है!अपरिपक्व कह रहा यह जमाना है। क्यों? यूँ जताते हो अपनी नाराजगी,जब लौटकर महायुती में ही आना है।अब न जाना सतारा नेटवर्क है खटारा,वे दिल्लीवाले हैं अब न खोलेंगे पिटारा!मुश्किल में पाओगे अजब ही है नज़ारा। क्यों? यूँ जताते हो अपनी नाराजगी,जब लौटकर महायुती में ही आना है।छोड़ दो जिद अब नहीं रही है वह बात,उनका प्रचंड है बहुमत छूट जाएगा साथ!ऐसा ना हो कहीं मलते रह जाओ हाथ। क्यों? यूँ जताते हो अपनी नाराजगी,जब लौटकर महायुती में ही आना है।सोच लो, अगर यही रवैया रखना है,नेता बनकर खुद को भी परखना है!हा रिक्त है नेता प्रतिपक्ष का भी स्थान,उस पर हो जाओ एकनाथ विराजमान। संजय एम. तराणेकर(कवि, लेखक व समीक्षक)इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश) Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन सिरमौर न्यायालय परिसर में हुए अतिक्रमण पर प्रशासन का चला बुलडोजर,17 लोगो का हटाया गया अतिक्रमण संसद को ठप्प कौन कर रहा है?