त्योंथर/कुशमेंद्र सिंह। रीवा जिले के त्योंथर सत्र न्यायालय में 14 वर्ष से चल रहे आपराधिक प्रकरण क्र.-300388/2011 अच्छेलाल सिंह बनाम प्रतिमा देवी उरमर्लिया में (मोहिनी भदौरिया) न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी त्योंथर जिला रीवा मप्र.ने दोनो पक्षो की दलील सुनने के बाद कूटरचित अंक सूची से सचिव की नियुक्ति करने पर श्रीमती प्रतिमा उरमर्लिया पति राजकुमार उर्फ राजू उरमर्लिया को 2 वर्ष का सक्षम कारावास सुनाया एवं 1000 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया
    निर्णय में बताया गया कि अंकसूची में कम अंक प्राप्त किये थे फिर भी प्रतिमा देवी का पंचायतकर्मी के पद पर नियुक्ति हुई है। उक्त दस्तावेज में यह लेख है कि प्रतिमा देवी द्वारा हाई स्कूल प्रथम श्रेणी अर्थात 79.84 प्रतिशत से उत्तीर्ण की है जिस कारण मैरिट के आधार पर प्रतिमा देवी की पंचायतकर्मी/सचिव पद पर नियुक्ति की गयी है। उपरोक्त समस्त परिस्थितियों से यह दर्शित होता है कि अभियुक्त प्रतिमा देवी द्वारा स्वयं की हाई स्कूल की कूटरचित अंकसूची का असली में प्रयोग कर पंचायतकर्मी के पद पर नियुक्ति प्राप्त की है।

अंतिम आदेश
उपरोक्त साक्ष्य विवेचना के आलोक में न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि परिवादी यह युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा है कि अभियुक्त ने वर्ष 1994 से अगस्त 2007 के मध्य अपने हाई स्कूल (कक्षा दसवी) की अंकसूची में कुल प्राप्तांक 383 प्राप्त किया था परन्तु इस प्राप्तांक को कूट रचना कर 519 करते हुए प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण दर्शाकर कूटरचना इस आशय से की, कि ग्राम पंचायत जवा के लिए पंचायतकर्मी के रूप में नियुक्ति प्राप्त कर ली जावे एवं अभियुक्त ने उक्त समय में ही उक्त कूटरचित अंकसूची का कपट पूर्वक अथवा बेईमानीपूर्वक सत्य अंकसूची के रूप में उपयोग ग्राम पंचायत जवा के लिए पंचायतकर्मी की नियुक्ति हेतु किया। अतः अभियुक्त प्रतिमा देवी को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 465 सहपठित धारा 471 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध के आरोप से दोष सिद्धि घोषित किया जाता है।
   प्रकरण में समन विचारण की प्रकिया अपनाई गई है। धारा 255(2) द०प्र०सं० से स्पष्ट है कि समन मामले में दण्ड के प्रश्न पर अभियुक्त को सुना जाना आवश्यक नहीं है। आरोपित अपराध दो वर्ष तक के अधिकतम कारावास से दण्डनीय है तथा समन प्रक्रिया द्वारा विचारणीय है। अभियुक्त ने कूटरचित अंकसूची का उपयोग कर पंचायतकर्मी की नियुक्ति प्राप्त की है। अभियुक्त प्रतिमा देवी द्वारा किये गये अपराध के आलोक में परिवीक्षा अधिनियम के अंतर्गत अभियुक्त प्रतिमा देवी को परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
दण्ड के प्रश्न पर अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा निवेदन किया गया कि अभियुक्त विगत 14 वर्षों से प्रकरण का सामना कर रही है जिस कारण अभियुक्त को न्यूनतम दण्ड से दण्डित किया जाये। अभियुक्त के अधिवक्ता के निवेदन पर विचार किया गया। किंतु जिस प्रकार वर्तमान में धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ती जा रही है उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त प्रतिमा देवी को केवल अर्थदण्ड से दण्डित किया जाना उचित दर्शित नहीं होता है। अतः अभियुक्त प्रतिमा देवी को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 465 सहपठित धारा 471 भा.दं.स. के अंतर्गत दोष सिद्धि कर दो वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया जाता है। अर्थदण्ड की राशि न चुकाये जाने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास उसे पृथक से भुगताया जावे।

निर्णय खुले न्यायालय में घोषित कर कित व हस्ताक्षरित किया गया। (मोहिनी भदौरिया) न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी त्योंथर जिला रीवा म०प्र०।

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