इंदौर । दिनेश ठाकुर…. निरंजनपुर सब्जी मंडी की हकीकत , यह तस्वीर बाया करती….आम आदमी सस्ती सब्जियो को खरीदने के लिए हर बार सब्जी मंडी की ओर जाने का रूख कर लेता है। पर उसे ये नहीं मालूम रहता है की सस्ती सब्जियो के चक्कर में वो बड़ी ही किचड़ से भरपूर दल दल भरी सब्जी मंडी में जा रहा है । जैसे तैसे वह वहां निरंजनपुर मंडी पर पहुंच तो जाते है लेकिन उसे ये नहीं मालूम पड़ता की सस्ती सब्जिया सिर्फ ठेले या दुकानदारों के लिये ही रहती है। जो 10,कि. से लेकर ,20, 30,किलो तक के थौक में लेने वालों के लिए होती है । आम आदमी जब वह अपनी जेब के हिसाब से किलो दो किलो सब्जीयो का भाव पूछता है तो यहां पर दुकान लगाए बैठे मंडी का हर व्यापारी उसे किलो का भाव तो बोहोत ही कम ही बताते है । उल्टा उसी से पूछते हैं कितनी लेना है ।अगर वह बोले की एक किलो लेना है तो व्यापारी उस को वहीं भाव बताएगा जो भूल वंश वह उस के खुद के गंत्वय से 8,से 10,किलो मीटर दूर सब्जी मंडी जाकर सब्जियां मंडी में लेने जाता है ।उसे वहां पर सस्ती सब्जियां मिल जायेगी जो उस के इस भ्रम को दूर कर देती है जब वो वहां की हकीकत से वाकिफ होता है । सब्जियां मंडी जब से शिवाजी नगर से निरंजनपुर गई है यहां पर सस्ती सब्जी नहीं मिलती शिवाजी नगर सब्जी मंडी जब से निरंजन पुर स्थानांतरित की गई तो मंडी के अधिकांश व्यपारीयो को यहा पर दुकान लगाने का स्थान मिला है। अगर आम इन्सान को सस्ती सब्जी अगर लेना थी तो उस के नगर ओर कालोनी में भी ठेले वाले भी चिल्ला चिल्ला कर या तेज आवाज के स्पीकर लगा कर भी तो बेच रहे होते वहीं से ले लेता यहा आकर जब वह सब्जी के लिए मंडी में प्रवेश करता है तो सबसे पेहले उस का सामना मंडी के गेट पर बारिश के भरे पानी के गड्ढे से होता है । जेसे तेसे वह वहां से किचड़ भरे गड्ढे से आगे बढ़ेगा तो उस के सामने मंडी में रोड पर अवेधानिक तरिके से खड़े अनेक ठेले वालों के कारण वाहन को निकाल कर जाना मुश्किलो भरा होता है ।फिर वाहन को पार्क करने के लिए इधर उधर भटकना होता है । अगर कहीं थोड़ी बहोत जगह उस को कहीं मिल भी जाए तो वह जेसे ही गाड़ी को पार्क करेगा तभी कहीं से उस के कान पर तेज आवाज आयेगी भईया गाड़ी यहां मत खड़ी करो मेरा ठेला लगेगा या दुकान के सामने मत खड़ी करो सस्ती सब्जी खरीदने आया व्यक्ति अगर यह बोल दे की भईया जरा सी देर में में आ जाउंगा तो ,उसे उतर मिलेगा कर दो पार्क अगर गाड़ी की हावा निकल जाए तो मुझे मत बोलना ,,यह सुन कर घबराया व्यक्ति वहां से वापस गाड़ी को लेकर ही जाना उचित समझता है । फिर चलते चलते उसे मंडी का आखरी कोना खाली नजर आयेगा जहां पर ढैरों, सारी संड़ी सब्जियों की बदबू की हवा सांस लेने पर उसे मजबूर करती नजर आयेंगी आस पास कोई भी नजर नहीं आयेगा ,मतलब चोरी जाने का भी डर उसे लगेगा ना तो यहां कोई नगर निगम का पार्किंग है ।और ना ही कोई साफ सफाई का कोई इन्तजाम दिखाई देगालेकिन यहां पर रोज आप को बरा बर देखने को मिलेगा की नगर निगम की पीली गाड़ी में झौन के कर्मचारियों को आपस में मस्त बात चीत करते रोड के बीच नजर आयेंगे जीन की डियूटी है ।सांब के घर ओर खुद के घर सब्जियां को लेकर जाना है ।मंडी के रोड पर सब्जियां बेचने वाले बीच रोड पर फैले गन्दे पानी किचड़ के बीच झुंड के झुंड लोग किचड़ में सब्जियां बेचते नजर आयेगेजो यहां की आम बात होती है ।ओर रोज संड़ी सब्जिया जीस की वजह से यहां किचड़ में अच्छी खासी गन्दगी के बीच से आम आदमी को गुजरते देखा जा सकता है । यहा रोज सुबह से आस पास से सब्जीया लेकर आये व्यापारी हैं जो रोज यहां संडी गंली, सब्जियो को बीच रास्ते पर पटक कर जाते हैं । एक ओर अहंम बता मंडी की यह है यहां आया हर व्यापारी जनता के साथ धोखा कर रहा है ।अगर मंडी के सभी व्यापारियों के इलेक्ट्रॉनिक तोल कांटे की जांच अगर नाप तोल विभाग के अधिकारी आये ओर इन के तोल कांटे की जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी अलग नजर आयेगा जीससे आम आदमी के साथ हो रही ना इन्साफी काफी हद तक रूक सकती है इस ओर इन्दोर शहर के नगर निगम के महापौर एवं झौन के सम्बंधित निगम कर्मचारियों को भी ध्यान देना जरूरी होगा नहीं तो मंडी जेसी जगह भी बदनाम मंडी के नाम से जानी जाना आम बात होगी जीस की ज़िम्मेदारी का मुख्य किरदार नगर निगम ही होगा Share this:Tweet Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp PostMoreLike this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन आशा-ऊषा-आशा सहयोगिनी एकता एवं सीटू के संयुक्त तत्वाधान में प्रोत्साहन राशि का नियमित एवं पूरा भुगतान कराये जाने को लेकर कलेक्टर रीवा को दिया गया ज्ञापन। पत्रकार के मासूम बच्चे को बुलोरो वाहन ने मारी जोरदार टक्कर।