डॉ. बी.एल.मिश्रा
एम.डी.(मेडिसिन)   ।  ।  ब्यूरो रिपोर्ट-प्रबीण कुमार पाण्डेय,
से.नि.क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवायें रीवा संभाग रीवा
हमारे बुजुर्ग कहते हैं “नशा नाश की जड़ है”। वर्तमान समय में यह कथन चरितार्थ प्रतीत हो रहा है। नशा एक मानसिक बीमारी है जो किसी एक या अधिक चीज (शराब , ड्रग्स) के लगातार प्रयोग के कारण होती है। यही नशा कुछ समय में “लत” में परिवर्तित हो जाता है जिससे तात्पर्य है_ किसी भी हानिकारक चीज को करने ,लेने या इस्तेमाल करने पर नियंत्रण न होना। संयुक्त राष्ट्र महासभा के निर्देशन में विश्व के अनेकों देशों में प्रतिवर्ष 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य है लोगों को नशे की बुरी आदत से निजात दिलाना व उन्हें नशे से होने वाली विभिन्न जटिलताओं से बचने हेतु आमजन को जागरूक करना है। साथ ही नशीली दवाओं के गैर कानूनी इस्तेमाल और अवैध तस्करी को रोकने के लिए इस दिवस का विशेष महत्व है। वर्तमान समय में मादक पदार्थ शराब ,गांजा व भांग कुछ देवी_ देवताओं से जुड़े होने के कारण धार्मिक पवित्रता की श्रेणी में आते हैं।
नशे की स्थिति
दुनिया में अनुमान के अनुसार 30 लाख करोड़ का नशे का कारोबार होता है। 27 करोड़ से अधिक लोग गैर कानूनी रूप से नशे का उपयोग करते हैं जिसमें 19 करोड लोग गांजा का सेवन करते हैं। विश्व में 8 लाख लोगों की नशे से मौत होती है जबकि भारत में यह संख्या 22 हजार है। विश्व में एक करोड़ से अधिक लोग इंजेक्शन का नशा लेते हैं जिसमें 13 लाख व 55 लाख लोग क्रमशः एचआईवी_ एड्स व हेपेटाइटिस सी (10 लाख को दोनों बीमारियां) से पीड़ित हैं। भारत में 10 वर्ष से 75 वर्ष के 20% आबादी विभिन्न नशों की चपेट में है। विश्व में मात्र एक देश आइसलैंड नशा मुक्त देश है। देश में एक करोड़ नशेड़ी गांजा का सेवन करते हैं। हर पांचवा पुरूष व हर 16 वी महिला नशे की चपेट में है। 90 लाख महिलाएं शराब, 40 लाख गांजा व 20 लाख अफीम का सेवन करती हैं। देश में सरकार के बैन के बावजूद ब्लैक मार्केट में यह नशे की सामग्री प्राप्त होती है।
यह हैं नशीले पदार्थ
वर्तमान समय में किशोर व किशोरिया विभिन्न प्रकार के नशों के दलदल में फंसते चले जा रहे हैं व इनमें नशे की लत बढ़ती जा रही है। नशा पदार्थ की बढ़ती मांग के कारण अवैध तस्करी भी बढ़ रही है। यह नशा बच्चों के स्वास्थ्य व कैरियर को ध्वस्त करने में सहयोगी बन रहा है। प्रमुख रूप से जो नशीले पदार्थ प्रचलन में हैं वह है_ तंबाकू ,सिगरेट शराब, गांजा, भांग, अफीम, चरस, हीरोइन ,ब्राउन शुगर, कोकेन , कफ सिरप, एलसीडी, दवाइयां व नींद की गोली ,इंजेक्शन पेंटाजोसिन, सूंघने की दवा( थिनर, पेट्रोल ,सुलेशन, आयोडेक्स ,व्हाइटनर)।
दिवस की वर्ष 2024 की थीम
“स्वास्थ्य के बारे में सोचें, न कि दवाओं के बारे में” करोड़ों युवाओं के स्वस्थ जीवन हेतु इस संदेश पर चिंतन हेतु वर्ष 24 की टीम है “साक्ष्य स्पष्ट हैं : रोकथाम में निवेश करें” यह विषय निश्चित रूप से नशीली दावों की समस्याओं से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा।
पंजाब और नशा
“उड़ता पंजाब” मूवी सर्व विदित है। कभी आतंकवाद की दिशा में कार्य करने वाला पंजाब मादक पदार्थ आतंकवाद में परिवर्तित हो गया है । 3 लाख की आबादी वाला अफगानिस्तान व पाकिस्तान की सीमा में उत्तर भारतीय कृषि के क्षेत्र में समृद्ध राज्य में 15 से 35 वर्ष के 8.6 लाख से अधिक युवा नशे की गिरफ्त में हैं। इनमें सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला नशा हीरोइन 53% है, साथ ही अफीम व ड्रग्स भी बहुतायत में उपयोग में लाया जाता है। पंजाब में हर 2/3 घरों में कम से कम एक नशेड़ी है यानि राष्ट्रीय औसत से तीन गुना ज्यादा।
नशे की लत के कारण
एक हिंदी फिल्म के नायक की एक लाइन “पीता हूं गम भुलाने को “के मायने हैं । युवा पीढ़ी में नशे की लत के प्रमुख कारणों में मानसिक अस्वस्थता, अकेलापन ,विद्यालय या कार्य स्थल में अरुचि ,विभिन्न पारिवारिक समस्याएं ,असफल प्यार, बेरोजगारी ,व्यापार मे घाटा आदि प्रमुख कारक हैं।
नशा के दुष्परिणाम
विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के दीर्घकालिक सेवन से आकस्मिक मृत्यु ,हृदय रोग, लकवा, विभिन्न अंगों में कैंसर ,एचआईवी/ एड्स, हेपेटाइटिस बी ,सी ,मानसिक अस्वस्थता फेफड़ा लीवर किडनी की बीमारी ,तलाक ,अकेलापन,ईष्ट मित्र जनो से खराब रिश्ता,आर्थिक संकट, तलाक, लैंगिक अपराध, सड़क दुर्घटना, अपराधिक गतिविधियां आदि जटिलताएं हो सकती हैं।
नशे की लत से बचने के उपाय
महत्वपूर्ण दुर्गुण नशा की लत से बचने हेतु समयबद्ध तरीके से योजना बनाएं, दृढ इच्छा शक्ति विकसित करना ,गंभीर बीमारी का विशेषज्ञ द्वारा निदान ,बुरी संगत व बुरी चीजों से दूरी बनाएं। नियमित व्यायाम, योग व मॉर्निंग वॉक के साथ अपनी लाइफ स्टाइल व दिनचर्या में बदलाव करना ,शिक्षित बने ,तनाव मुक्त रहने का प्रयास करें ,पारिवारिक सदस्यों व अच्छे मित्रों के साथ समय बिताए, पूर्ण निद्रा ले व संतुलित आहार का सेवन करें।
नशे की लत पहचानें-
नशा करने वालों की जिन लक्षणों द्वारा पहचान की जा सकती है वह है_ नशेड़ी की जेब खर्च बढ़ना, घर का सामान गायब होना ,व्यवहार में परिवर्तन ,स्कूल कॉलेज नौकरी से भागना ,बात-बात पर झगड़ा करना, घर में नए-नए मित्रों का आना, शराब की गंध छुपाने हेतु सुगंधित पदार्थ जैसे पान_ गुटखा का चबाना, भूख न लगना ,अनिद्रा ,आवाज में परिवर्तन, बांह में सुई के निशान ,वाहन से बार-बार दुर्घटना ,आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पुलिस द्वारा पूछताछ, किसी से भी झूठ बोलकर उधार मांगना एवं चोरी करना आदि।

ओएसटी केंद्र रीवा
कुशा भाऊ ठाकरे जिला अस्पताल रीवा मे नशे का इंजेक्शन लेने वाले युवाओं का एचआईवी _एड्स से बचाने व सुई की आदत छुड़ाने हेतु मध्य प्रदेश का पहला ओएसटी केंद्र वर्ष 2013 से संचालित है जहां चिकित्सक, काउंसलर व नर्स द्वारा सीधी देखरेख में दवा खिलाई जाती है । जिले में अनुमानित 2 हजार से अधिक युवा इस ब्यसन से पीड़ित हैं। केंद्र में 400 युवा नियमित हितग्राही है ।अब तक 100 युवा नशा मुक्त हो चुके हैं।
अपेक्षाएं
15 अगस्त 2020 को देश के 272 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में “नशा मुक्त भारत अभियान” की शुरुआत की गई थी । इस अभियान को देश के समस्त जिलों में 15 अगस्त 2023 से लागू किया गया। आवश्यकता इस बात की है कि इस अभियान को अन्य शासकीय योजना की तरह सरकारी कार्यक्रम होने से बचाया जाए। शासन द्वारा मादक पदार्थों व नशीली दवाओं की तस्करी रोकने हेतु सख्त कानून बनाना, विद्यालय ,महाविद्यालय द्वारा भाषण प्रतियोगिता ,पोस्टर प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता द्वारा जागरूकता अभियान में तेजी लाना होगा। आइए हम सब मिलकर युवा पीढ़ी के सर्वांगीण विकास हेतु नशीली दवा व मादक पदार्थों को हमेशा के लिए “ना” कहें।

(डॉ. बी.एल.मिश्रा)

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